झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (CGL) परीक्षा को रद्द करने और भर्ती विज्ञापन वापस लेने के राज्य सरकार के फैसले को खारिज कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले से JSSC CGL भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। इस परीक्षा  के जरिए जिन अभ्यर्थियों को नौकरी मिली थी उनके लिए यह काफी अहम फैसला है। झारखंड सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को लेकर पहले बड़ा कदम उठाते हुए परीक्षा रद्द करने और विज्ञापन वापस लेने का निर्णय लिया था।

 

झारखंड सरकार ने सीआईडी की जांच रिपोर्ट और अभ्यर्थियों के आंदोलन का हवाला देते हुए 18 अगस्त 2026 को CGL सहित कुछ भर्ती परीक्षाओं और उनके आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने का आदेश जारी किया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए सफल अभ्यर्थी आकाश गौरव और अन्य ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की थीं।

 

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हाई कोर्च पहुंचे थे अभ्यर्थी

हाई कोर्ट में याचिकाकर्ताओं का दावा था कि भर्ती प्रक्रिया में हुई कथित गड़बड़ी की जांच की जा सकती है और  कथित गड़बड़ी में शामिल लोगों की पहचान की जा सकती है। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि ऐसे में कुछ अभ्यर्थियों की कथित गलतियों के लिए पूरी चयन प्रक्रिया और सभी नियुक्तियों को रद्द करना उचित नहीं है। राज्य सरकार ने अदालत में सीलबंद रिपोर्ट सौंपकर भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और व्यवस्था की विफलता का पक्ष रखा था।

कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अधूरी जांच के आधार पर पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद करना उचित नहीं है। राज्य सरकार ऐसा कोई पक्का सबूत नहीं दे पाई, जिससे साबित हो कि पूरी भर्ती प्रक्रिया में धांधली हुई थी। कोर्ट ने कहा कि कुछ अभ्यर्थियों पर आरोप लगने या जांच चलने का मतलब यह नहीं है कि सभी चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां रद्द कर दी जाएं।

 

कोर्ट ने कहा कि पहले पूरे मामले की जांच पूरी की जानी चाहिए। जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि भर्ती में गड़बड़ी करने वाले अभ्यर्थी कौन-कौन हैं और कितने अभ्यर्थियों का इसमें कोई हाथ नहीं है। अगर कुछ अभ्यर्थियों ने गलत तरीके से नौकरी हासिल की है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन इसकी सजा सभी चयनित अभ्यर्थियों को नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने आगे स्पष्ट कहा कि बिना जांच पूरी किए और दोषी अभ्यर्थियों की पहचान किए पूरी भर्ती रद्द करने का सरकार का फैसला सही नहीं ठहराया जा सकता।

 

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क्या बोले वकील?

इस मामले में वकील हर्ष कुमार ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने अपने मुवक्किल से बात की है और वह कोर्ट के इस फैसले से खुश नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश से यह साफ है कि आज तक मामले की जांच पूरी नहीं हुई है। इतने लंबे समय से जांच चल रही है, लेकिन राज्य सरकार झारखंड के लोगों और यहां के छात्रों के साथ धोखा कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि  कि सरकार जब भी कोई दस्तावेज या कैबिनेट नोट सामने रखती है तो उसमें मामले की गहराई से जांच किए जाने की कोई जानकारी नहीं मिलती।

 

उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार ने कोर्ट में भी अपना पक्ष ठीक से नहीं रखा। सरकार को कोर्ट के सामने जरूरी दस्तावेज और सबूत पेश करने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। हर्ष कुमार के मुताबिक, सरकार को यह बताना चाहिए था कि भर्ती में गड़बड़ी के क्या सबूत हैं और जांच में अब तक क्या सामने आया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने याचिका दाखिल करने वाले छात्रों के साथ ठगी की है।