हरियाणा के जींद के एक युवक ने 15 दिन लगाकर 41 फीट लंबी, 30 फीट चौढ़ी सांझी बनाई है। इसे बनाने में उसने परिवार के अलावा अन्य साथियों की भी मदद ली। इस सांझी को बनाने में 70 हजार रुपये खर्च आया है। हरियाणवी संस्कृति की विशेष पहचान सांझी को भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। जींद जिले के इस युवक ने सांझी बनाकर एक बार इंडिया बुक में भी अपना नाम दर्ज करवाया है।
बता दें कि कुंवारी युवतियां सांझी के व्रत भी रखती हैं। माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए ये व्रत रखा था। अब शादी जैसे विशेष मौके पर या घरों को सजाने के लिए भी सांझी बनाई जाने लगी है। हालांकि, बदलती जीवनशैली में पहले के मुकाबले अब कम लोग सांझी बना रहे हैं। जींद का युवक इस खत्म होती प्रथा को जिंदा रखने का प्रयास भी कर रहा है।
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कौन हैं सांझी बनाने वाले गौतम?
जींद जिले के गांव ढिगाना निवासी एमए फाइन आर्ट के छात्र गौतम ने ये सांझी उकेरी है। इस सांझी को बनाने के लिए 2 ट्रॉली गाय का गोबर और 8 ट्रॉली काली मिट्टी लगी है। गौतम वर्ष 2014 से सांझी उकेरने का काम कर रहे हैं। वर्ष 2023 में 31 फीट लंबी सांझी बनाकर वह अपना नाम इंडिया बुक में दर्ज करवा चुके हैं। अब गिनीज बुक में नाम दर्ज करवाने का प्रयास जारी है। गौतम हरियाणा के लगभग सभी जिलों में सांझी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं। गौतम ने अपनी नानी से सांझी बनाने की प्रेरणा ली और अब वह इस कला को विश्वस्तर पर पहुंचाना चाहते हैं।
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सांझी का व्रत रखती हैं कुंवारी युवतियां
बता दें कि कुंवारी युवतियां योग्य वर पाने के लिए सांझी का व्रत रखती हैं। सांझी को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर इसकी पूजा की जाती है। माता पार्वती ने भी भगवान शिव को पाने के लिए सांझी का व्रत रखा था। दीवारों व आंगन में उकेरी जाने वाली सांझी को विजयदशमी पर नहरों में बहाया जाता है। लगातार बदलती जीवनशैली में आज के युवा इसको लेकर अनजान हैं। आधुनिक जीवनशैली में सांझी की परंपरा को बनाए रखना अब चुनौती हो गया है।
