सबरीमाला तीर्थयात्रा को आसान और सुगम बनाने के लिए केरल सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केरल के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने रविवार 13 सितंबर को बताया कि इस बार लोक निर्माण विभाग यानी पीडब्ल्यूडी को तैयारियों के लिए 551.5 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जो पिछले दो वर्षों के मुकाबले काफी ज्यादा है। बता दें कि नवंबर के मध्य से शुरू होने वाले मंडलकाल-मकरविलक्कु सत्र के लिए राज्य सरकार और त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड मिलकर श्रद्धालुओं की यात्रा को व्यवस्थित करने में जुटे हैं।
मंडलकाल-मकरविलक्कु सत्र भारत के केरल राज्य में स्थित प्रसिद्ध सबरीमाला अयप्पा मंदिर का सबसे महत्वपूर्ण वार्षिक तीर्थयात्रा काल है। यह लगभग दो महीने लंबा चलने वाला एक पावन समय होता है, जो हर साल नवंबर के मध्य से शुरू होकर जनवरी के मध्य तक चलता है।
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पिछले दो साल के मुकाबले इस बार बढ़ा यात्रा का बजट
सरकार ने सबरीमाला तीर्थयात्रा से जुड़ी तैयारियों के लिए पीडब्ल्यूडी को 551.5 करोड़ रुपये दिए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में सतीशन ने कहा कि पिछली सरकार ने सबरीमाला तीर्थयात्रा की तैयारियों के लिए वर्ष 2025-26 में 377.80 करोड़ रुपये और 2024-25 में 326.97 करोड़ रुपये आवंटित किए थे। उन्होंने कहा कि तीर्थयात्रा की तैयारियों की समीक्षा के लिए हुई बैठक के बाद राज्य के लोक निर्माण मंत्री पी. के. बशीर द्वारा दिए गए प्रस्ताव के आधार पर 551.5 करोड़ रुपये की राशि दिए गए हैं।
इसके अलावा, सतीशन ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि आगामी मंडलकाल-मकरविलक्कु तीर्थयात्रा सत्र के दौरान श्रद्धालुओं की यात्रा सुचारु बनाने के लिए सरकार और त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड (टीडीबी) मिलकर काम करेंगे। इस वर्ष मंडलकाल-मकरविलक्कु तीर्थयात्रा नवंबर के मध्य में शुरू होगी और अगले वर्ष जनवरी के तीसरे सप्ताह में समाप्त होगी।
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दोष दूर करने के लिए मंदिरों में की गईं खास रस्में
पिछले महीने की शुरुआत में, त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड ने सबरीमाला मंदिर से जुड़े कथित 'दोषों' को दूर करने के लिए केरल के मंदिरों में खास रस्में कीं। ये रस्में कोल्लूर के मूकाम्बिका मंदिर समेत करीब 25 मंदिरों में की गईं, ताकि 'वाक दोष' को ठीक किया जा सके।
कर्नाटक के कोल्लूर मूकाम्बिका मंदिर और कासरगोड के मंदिरों में खास रस्में की गईं। मूकाम्बिका मंदिर में, रस्म के तहत घंटी, जीभ और स्टाइलस (लिखने की नुकीली छड़) चढ़ाए गए। देवस्वोम बोर्ड के मुताबिक, 'दोष' की पहचान 2018 में हुए एक देव प्रश्नम के दौरान हुई थी। बताया गया है कि यह सबरीमाला में कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों द्वारा भक्तों के साथ कथित तौर पर की गई गाली-गलौज की वजह से हुआ था। (ANI)
