उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी का एक बयान के वजह से विवादों के घेरे में आ गई है। जैन समुदाय का दावा है कि मेनका गांधी दिल्ली के एक जैन मंदिर गई थीं, जहां उन्होंने कहा था कि एक पिच्छी बनाने के लिए लाखों मोरों की हत्या की जाती है। इस बयान के बाद कई लोगों की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंची। इसके बाद जैन समुदाय के लोगों ने मेनका गांधी को नोटिस भेजा। साथ ही मांग की गई कि मेनका गांधी अपने बयान को लेकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। जैन समुदाय का कहना है कि अगर मेनका गांधी माफी नहीं मांगती हैं तो देशभर में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

 

मुजफ्फरनगर के जैन समुदाय ने हाल ही में विरोध प्रदर्शन को लेकर एक बैठक की, जिसमें यह रणनीति बनाई गई कि 30 जून को सोशल मीडिया पर एक अभियान शुरू किया जाएगा। इसके बाद 7 जुलाई को देशभर के जैन मंदिरों के बाहर सुबह 9 बजे से 11 बजे तक मौन प्रदर्शन किया जाएगा।

 

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क्यों शुरू हुआ विवाद?

अधिवक्ता निपुण जैन ने दावा किया कि 17 जून को मेनका गांधी दिल्ली के एक जैन मंदिर गई थीं, जहां उन्होंने कहा कि पिच्छी बनाने में लाखों मोरों की जान ली जाती है और तभी मोर के पंखों से पिच्छी बनाई जाती है। मेनका गांधी के इस दावे को निपुण जैन ने खारिज करते हुए कहा कि पिच्छी केवल उन मोरों के पंखों से बनाई जाती है, जो प्राकृतिक रूप से उनके शरीर से झड़ जाते हैं

 

जैन एकता मंच की युवा शाखा के अध्यक्ष गौरव जैन ने इस बयान पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों से जैन धर्म और संत परंपरा पर लगातार आरोप लगाए जा रहे हैं। इसी तरह पिच्छी को लेकर दिया गया यह विवादित बयान जैन समाज की धार्मिक अस्मिता को ठेस पहुंचाता है।

 

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क्या है पिच्छी और क्या है इसका इस्तेमाल?

पिच्छी मोर के पंखों से बनाई जाती है, जिसका इस्तेमाल जैन संत और मुनि करते हैं। पिच्छी के जरिए संत या मुनि जमीन पर मौजूद छोटे-छोटे कीड़ों को धीरे से हटाकर आगे बढ़ते हैं, ताकि किसी जीव को नुकसान न पहुंचे। मोर के मुलायम पंखों से कीड़ों को आसानी से हटाया जा सकता है। जैन समुदाय के अनुसार, जब मोर के पंख प्राकृतिक रूप से झड़ जाते हैं, तभी उन पंखों को इकट्ठा करके पिच्छी बनाई जाती है।