भारतीय सेना में करीब 39 साल की लंबी और गौरवपूर्ण सेवा के बाद लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा सेवानिवृत्त हो गए हैं। उन्होंने आर्मी ट्रेनिंग कमांड (ARTRAC) के प्रमुख के रूप में युद्ध प्रशिक्षण और सैन्य तैयारी के तरीकों में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए। उनके नेतृत्व में सेना के प्रशिक्षण को आधुनिक युद्ध की बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर जोर दिया गया।

 

लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा ‘द सिंध हॉर्स’ से जुड़े रहे हैं और वह इस रेजिमेंट के पहले अधिकारी हैं जिन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल के पद तक पहुंचकर गौरव हासिल किया है। सैन्य सेवा के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं और सेना की प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दिया। उनकी सेवानिवृत्ति के साथ ही भारतीय सेना में उनका करीब चार दशक लंबा सफर समाप्त हो गया है। 

 

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सैन्य सेवा के लिए जाना जाता है परिवार

देवेंद्र शर्मा का परिवार सैन्य सेवा के लिए जाना जाता है। उनके पिता विंग कमांडर शिव कुमार शर्मा ने 1961, 1962, 1965 और 1971 के सैन्य अभियानों में हिस्सा लिया। उनके ससुर ब्रिगेडियर सरजीत सिंह कालेर ने तीन प्रमुख युद्धों में भाग लिया जबकि बड़े भाई एयर कमोडोर शैलेंद्र शर्मा ने 1999 के कारगिल युद्ध में मिराज-2000 से हवाई अभियानों में हिस्सा लिया। मेयो कॉलेज, अजमेर से लेकर सेना के शीर्ष प्रशिक्षण कमान तक देवेंद्र शर्मा का सफर असाधारण उपलब्धियों से भरा रहा। NDA और IMA में वे सर्वश्रेष्ठ कैडेट रहे तथा उन्हें स्वॉर्ड ऑफ ऑनर भी मिला। हालांकि,  19 दिसंबर 1987 को 'द सिंध हॉर्स' में कमीशन प्राप्त करने के बाद उन्होंने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों से लेकर पश्चिमी मोर्चे की महत्वपूर्ण कमानों और संयुक्त राष्ट्र मिशन तक जिम्मेदारियां संभालीं।

ARTRAC में बदला युद्ध प्रशिक्षण का तरीका

जुलाई 2024 में ARTRAC की कमान संभालने के बाद उनके कार्यकाल में ड्रोन वारफेयर प्रशिक्षण को बड़े स्तर पर संस्थागत किया गया और 50 हजार से अधिक सैनिकों को प्रशिक्षित किया गया। साइबर, इलेक्ट्रॉनिक और अर्बन वारफेयर प्रशिक्षण के साथ नई सैन्य तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया गया। शिमला और हिमाचल में भी उनके कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण पहल हुई। अन्नाडेल में 52 फुट ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज वाले 'श्रद्धांजलि स्थल', आर्मी हेरिटेज म्यूजियम के आधुनिकीकरण और पूर्व सैनिकों से जुड़ी सुविधाओं के विस्तार को प्रमुख उपलब्धियों में गिना जाता है।

 

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'द सिंध हॉर्स' के पहले लेफ्टिनेंट जनरल

देवेंद्र शर्मा अपनी रेजिमेंट 'द सिंध हॉर्स' के पहले लेफ्टिनेंट जनरल और आर्मी कमांडर बने। सेवानिवृत्ति से पहले उन्होंने अन्नाडेल स्थित श्रद्धांजलि स्थल पर शहीद सैनिकों को पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद 111 इन्फैंट्री बटालियन टेरिटोरियल आर्मी की सम्मान गार्ड ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। 39 वर्षों की वर्दी, पीढ़ियों की राष्ट्रसेवा और आधुनिक युद्ध की बदलती जरूरतों के अनुरूप सेना को तैयार करने की विरासत लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा की सैन्य यात्रा इसी त्रिवेणी के रूप में याद की जाएगी।