उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुए अलीगंज अग्निकांड को दो माह से ज्यादा बीत चुके हैं लेकिन इस हादसे में अपनों को खोने वाले 15 परिवारों का इंतजार खत्म नहीं हुआ है। 22 जून को अलीगंज की अवैध व्यावसायिक इमारत की कोचिंग सेंटर में हुए अग्निकांड में 15 छात्र- छा़त्राओं की मौत के बाद शासन ने अगले ही दिन दो सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित कर जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए थे। एसआईटी ने भवन स्वामी, संबंधित विभागों के अधिकारियों, प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ित परिवारों के बयान दर्ज किए। करीब दो माह की जांच के बाद समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। अब परिवारों की नजर रिपोर्ट में सामने आई जिम्मेदारी के आधार पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी है।
एसआईटी ने जांच के दौरान लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए), अग्निशमन विभाग, नगर निगम और बिजली विभाग से उनकी-अपनी रिपोर्ट मांगी थी। प्रारंभिक जांच में भवन निर्माण में अनियमितता, अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और विभिन्न विभागों की लापरवाही सामने आई थी।एलडीए की जांच में भवन के अवैध होने और आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने की बात सामने आई। हादसे के तुरंत बाद चार अधिकारियों को निलंबित किया गया था। बाद में निलंबित अधिकारियों की संख्या बढ़कर छह हो गई। इनमें एलडीए,अग्निशमन विभाग और बिजली विभाग से जुड़े अधिकारी शामिल हैं।
सुरक्षा इंतजामों पर बड़ा सवाल
जांच में भवन निर्माण से जुड़ी अनियमितताओं के साथ अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आई। एलडीए की जांच में भवन को अवैध पाया गया और आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने की बात सामने आई थी। हादसे के बाद भवन को एलडीए ने गिरा दिया। एलडीए की ओर से भवन मालिक को नोटिस जारी कर भवन गिराने के लिए समय भी दिया गया था। समय दिए जाने के बावजूद भवन मालिक की ओर से कार्रवाई नहीं की गई, जिसके बाद एलडीए ने भवन को ध्वस्त कर दिया। साथ ही, इसी तरह के दूसरे भवनों को भी चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
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22 जून को गई थीं 15 जानें
22 जून को अलीगंज की अवैध व्यावसायिक इमारत में भीषण आग लगी थी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और इमारत में मौजूद लोग इसकी चपेट में आ गए। हादसे में 15 लोगों की मौत हुई। घटना के बाद शासन ने अगले ही दिन दो सदस्यीय एसआईटी गठित कर जांच और जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए थे।हादसे में जान गंवाने वालों में अब्दुल रहमान, मोहम्मद अम्मार, अनामिका, आदित्य श्रीवास्तव, जयनिल, ज्योति, नीलेश, सागर, संयम, शहजान, सौमाल्या, सुखमनी, अनुक्षा, भविष्य और सूरज शामिल थे।
हादसे के बाद पुलिस ने छह नामजद समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। वहीं भवन से जुड़े सुरेंद्र शुक्ला की तलाश अब भी जारी है।
सुरेंद्र पर 1 लाख का इनाम, भगोड़ा घोषित करने की तैयारी
फरार चल रहे सुरेंद्र शुक्ला की तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है। पुलिस आयुक्त लखनऊ की ओर से सुरेंद्र पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।अब पुलिस उसे भगोड़ा घोषित करने की तैयारी कर रही है। इसके बाद उसकी संपत्ति की कुर्की की कार्रवाई भी की जाएगी। पुलिस उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है।
हादसे में अपनों को खोने वाले परिवारों का कहना है कि जांच और रिपोर्ट से ज्यादा जरूरी अब जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई है। उनका कहना है कि दो महीने से ज्यादा समय बीतने के बाद भी उन्हें इंतजार करना पड़ रहा है। एसआईटी की रिपोर्ट शासन के सामने आने के बाद भी कार्रवाई कब होगी, यह स्पष्ट नहीं है।परिवारों को उम्मीद है कि हादसे में सामने आई लापरवाही की जवाबदेही तय होगी और भविष्य में किसी दूसरे परिवार को ऐसी त्रासदी नहीं झेलनी पड़ेगी।
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शासन के फैसले का इंतजार
SIT ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। रिपोर्ट में लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश के साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जिला स्तर पर एसआईटी गठित करने का सुझाव दिया गया है। अब गेंद शासन के पाले में है। 15 मौतों के बाद जांच पूरी हो चुकी है, रिपोर्ट भी सामने आ चुकी है लेकिन इंसाफ की कार्रवाई अभी बाकी है। पीड़ित परिवारों की नजर अब इस बात पर है कि रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदारी कब तय होती है और कार्रवाई कब शुरू होती है।
