महाराष्ट्र के सतारा जिले के मल्हारपेठ इलाके में बंदरों के आतंक से परेशान गांव वालों को अब राहत मिली है। वन विभाग ने विशेष अभियान चलाकर 75 बंदरों को पकड़ लिया। इसके बाद उन्हें मल्हारपेठ क्षेत्र से दूर सुरक्षित प्राकृतिक जंगल में छोड़ दिया गया। पिछले कई महीनों से बंदरों के झुंड खेतों में घुसकर खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा रहे थे और घरों की छतों पर उत्पात मचा रहे थे।

 

बंदरों की बढ़ती संख्या ने किसानों और ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी थीं। खेतों में फसल खराब होने के साथ-साथ घरों का सामान भी बंदरों के निशाने पर रहता था। ग्रामीणों की लगातार शिकायतों के बाद वन विभाग ने कार्रवाई की और बंदरों को पकड़ने के लिए अभियान शुरू किया।

 

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खेतों में घुसकर फसल करते थे बर्बाद

यह अभियान मल्हारपेठ क्षेत्र के कदमवाड़ी और डिंडुकलेवाड़ी गावों में चलाया गया। ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले साल से इलाके में बंदरों की संख्या लगातार बढ़ रही थी। झुंड के झुंड बंदर खेतों में पहुंच जाते थे और खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाते थे। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था। बंदरों का उत्पात सिर्फ खोतों तक सीमित नहीं था। वे घरों की छतों पर कुदते-फांदते थे और कई बार घरेलू सामान भी तोड़ देते थे। इससे गांव में लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित हो रही थी।

75 बंदरों को पकड़कर जंगल में छोड़ा

वन विभाग की टीम ने पिंजरों की मदद से 75 बंदरों को सुरक्षित तरीके से पकड़ा। इसके बाद सभी बंदरों को उनके मूल इलाके से दूर एक उपयुक्त प्राकृतिक जंगल में छोड़ दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक, इस कार्रवाई का उद्देश्य ग्रामीणों को राहत देने के साथ-साथ बंदरों को भी सुरक्षित प्राकृतिक माहौल उपलब्ध कराना था। 75 बंदरों के पकड़े जाने के बाद मल्हारपेठ के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।