महाराष्ट्र सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना में एक बेहद हैरान करने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है। योजना के तहत कराए गए सरकारी ई-केवाईसी और पात्रता सत्यापन के दौरान पता चला है कि महिलाओं के लिए बनी इस योजना में करीब 14 हजार पुरुषों ने भी गलत तरीके से आवेदन कर सरकारी पैसे डकार लिए। मंगलवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस बड़ी गड़बड़ी का खुलासा करते हुए साफ किया कि गलत इरादे से पैसे लेने वाले इन सभी पुरुषों से सरकार कड़ाई से एक-एक रुपये की रिकवरी करेगी।
मंगलवार को मंत्रिमंडल बैठक से पहले पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना शुरू होने के समय महिलाओं को स्वयं पात्रता का प्रमाण देने की अनुमति दी गई थी, क्योंकि कई लोगों के पास आवश्यक दस्तावेज जमा करने के लिए पर्याप्त समय नहीं था। बाद में सरकार ने लाभार्थियों का विस्तृत सत्यापन कराया, जिसमें कई गड़बड़ियां सामने आईं।
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80 लाख नाम हटने पर मचा सियासी घमासान
30 अप्रैल को ई-केवाईसी की समयसीमा समाप्त होने के बाद योजना से जुड़े करीब 80 लाख लाभार्थियों के नाम सूची से हटा दिए गए। इसके बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधते हुए महिलाओं के साथ विश्वासघात का आरोप लगाया। हालांकि सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई केवल ई-केवाईसी नहीं कराने वालों के खिलाफ नहीं, बल्कि पात्रता मानदंडों का पालन न करने वालों के खिलाफ भी की गई है।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि जांच के दौरान करीब 10 लाख मामलों में पात्रता संबंधी गड़बड़ियां पाई गईं। कई सरकारी कर्मचारियों के परिवारों की महिलाओं ने भी योजना का लाभ लिया था। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि करीब 14 हजार पुरुषों ने भी इस योजना के तहत आवेदन कर लाभ प्राप्त किया। सरकार ने लाभार्थियों का मिलान आयकर, परिवहन और राशन कार्ड जैसे विभिन्न सरकारी डाटाबेस से किया, जिसके बाद ये तथ्य सामने आए।
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पुरुषों से होगी रिकवरी
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि जो महिलाएं बाद में अपात्र पाई गई हैं, उनसे पहले दी गई सहायता राशि वापस नहीं ली जाएगी। हालांकि जिन पुरुषों ने गलत जानकारी देकर योजना का लाभ उठाया है, उनसे पूरी राशि की वसूली की जाएगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 1.70 करोड़ महिलाएं सभी पात्रता शर्तों को पूरा करती हैं और उन्हें योजना का लाभ मिलता रहेगा। फडणवीस ने दोहराया कि यह योजना राज्य की सबसे बड़ी कल्याणकारी योजनाओं में से एक है और भविष्य में भी जारी रहेगी।
