हिमाचल प्रदेश में दूध बेचकर परिवार का गुजारा करने वाले हजारों पशुपालकों के लिए राहत भरी खबर है। अब दूध की बिक्री पर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि दोगुनी होगी। प्रदेश सरकार ने मिल्क इन्सेंटिव स्कीम के तहत दूध उत्पादकों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि तीन रुपये से बढ़ाकर छह रुपये प्रति लीटर करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
सरकार के इस फैसले से दूध उत्पादकों को दूध की बिक्री से होने वाली कमाई के अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि का लाभ मिलेगा। ग्रामीण हिमाचल में खेतीबाड़ी के साथ पशुपालन करने वाले परिवारों के लिए यह निर्णय आर्थिक सहारा बन सकता है। खासकर उन परिवारों को इससे मदद मिलने की उम्मीद है, जिनकी नियमित आय का एक बड़ा हिस्सा दूध बेचने से आता है।
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तीन से छह रुपये हुआ प्रोत्साहन, अब बढ़ेगी अतिरिक्त कमाई
मिल्क इन्सेंटिव स्कीम के तहत प्रोत्साहन राशि में की गई बढ़ोतरी से दूध उत्पादकों को पहले के मुकाबले दोगुनी रकम मिलेगी। पहले जहां पात्र दुग्ध उत्पादकों को प्रति लीटर तीन रुपये प्रोत्साहन राशि मिलती थी, वहीं अब इसे बढ़ाकर छह रुपये प्रति लीटर करने का निर्णय लिया गया है। इसका सीधा गणित समझें तो पात्रता शर्तें पूरी करने वाले किसी दुग्ध उत्पादक को यदि योजना के तहत प्रतिदिन 20 लीटर दूध पर प्रोत्साहन मिलता है, तो पहले उसे 60 रुपये प्रतिदिन मिलते थे।
नई दर लागू होने पर यह राशि बढ़कर 120 रुपये प्रतिदिन हो जाएगी। यानी प्रतिदिन 60 रुपये और महीने में 1800 रुपये की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि मिल सकती है, बशर्ते पूरे महीने इतनी ही मात्रा में दूध योजना के तहत पात्र हो। इसी तरह 10 लीटर दूध पर पहले 30 रुपये प्रोत्साहन मिलता था, जो नई दर के अनुसार बढ़कर 60 रुपये हो जाएगा। हालांकि, वास्तविक लाभ पात्र दूध की मात्रा, योजना की शर्तों और नई दर लागू होने की तारीख पर निर्भर करेगा।
सरकारी विभागों में भी मिल्कफेड के उत्पादों की खरीद
मंत्रिमंडल ने केवल प्रोत्साहन राशि बढ़ाने का ही निर्णय नहीं लिया है, बल्कि दुग्ध उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध करवाने की दिशा में भी कदम उठाया है। इसके तहत सरकारी विभागों को अपनी जरूरत के लिए दूध और दूध से बने उत्पाद हिमाचल प्रदेश दुग्ध प्रसंघ यानी मिल्कफेड से खरीदने के निर्देश देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस फैसले का उद्देश्य मिल्कफेड के उत्पादों की मांग बढ़ाना और दुग्ध क्षेत्र से जुड़े किसानों को बिक्री के लिए एक संस्थागत बाजार उपलब्ध करवाना है।
सरकारी विभागों में दूध और दुग्ध उत्पादों की खरीद मिल्कफेड से होने पर प्रसंघ के कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है। इससे दूध संग्रहण और विपणन व्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इस व्यवस्था का वास्तविक प्रभाव सरकारी विभागों की खरीद की मात्रा, उत्पादों की मांग और दूध संग्रहण नेटवर्क की क्षमता पर निर्भर करेगा।
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गांवों की अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा
हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है। कई परिवार खेतीबाड़ी के साथ गाय और भैंस पालकर दूध बेचते हैं। दूध की नियमित बिक्री से उन्हें रोजमर्रा के खर्च चलाने में मदद मिलती है, लेकिन पशुओं के चारे, देखभाल और अन्य जरूरतों पर भी लगातार खर्च होता है।
ऐसे में प्रति लीटर प्रोत्साहन राशि बढ़ने से पात्र पशुपालकों को अतिरिक्त आर्थिक मदद मिल सकती है। इससे छोटे दुग्ध उत्पादकों को भी लाभ मिलने की संभावना है, यदि उनका दूध योजना के निर्धारित मानकों के तहत खरीदा जाता है। सरकार के इस फैसले को दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण परिवारों की आय के अतिरिक्त स्रोत को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
अब नई दर लागू होने का इंतजार
मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने के बाद अब दुग्ध उत्पादकों की नजर इस बात पर रहेगी कि छह रुपये प्रति लीटर की नई प्रोत्साहन राशि कब से लागू होगी। इसके साथ ही योजना के तहत पात्रता, दूध की निर्धारित मात्रा, भुगतान प्रक्रिया और लाभार्थियों से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश भी महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल, प्रोत्साहन राशि को तीन रुपये से बढ़ाकर छह रुपये प्रति लीटर करने और सरकारी विभागों की खरीद को मिल्कफेड से जोड़ने के फैसले से हिमाचल के दुग्ध क्षेत्र को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। इन निर्णयों का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि नई व्यवस्था जमीन पर कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती है और इससे कितने दुग्ध उत्पादक जुड़ पाते हैं।
