हिमाचल प्रदेश में नशे से जुड़े अपराधों की सुनवाई को गति देने और NDPS अधिनियम के तहत दर्ज मामलों के निपटारे की व्यवस्था मजबूत करने के लिए कांगड़ा और मंडी में दो नई अदालतें खोली जाएंगी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने रविवार को हिमाचल प्रदेश नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (HPNLU) के तीसरे दीक्षांत समारोह में यह घोषणा की। इन अदालतों की स्थापना से नशे से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए न्यायिक व्यवस्था को विस्तार मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे से जुड़े अपराधों के खिलाफ कार्रवाई को मजबूती देने के लिए प्रभावी कानूनी व्यवस्था जरूरी है। NDPS अधिनियम के तहत मामलों की सुनवाई के लिए कांगड़ा और मंडी में नई अदालतें स्थापित करने का निर्णय इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, इन अदालतों के शुरू होने की समयसीमा और इनके संचालन से संबंधित विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। गौर हो कि रविवार को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के ज्ञान पथ सभागार में आयोजित दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। समारोह में विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान करने के साथ कानून और न्याय के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली तीन न्यायिक हस्तियों को मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया।
यह भी पढ़ें: हिमाचल में नौकरियों की बहार, हजारों पदों पर भर्ती का रास्ता खुला
नशे के मामलों की सुनवाई के लिए बढ़ेगा न्यायिक ढांचा
हिमाचल प्रदेश में नशे से जुड़े अपराध कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं। ऐसे मामलों में समयबद्ध सुनवाई और प्रभावी न्यायिक प्रक्रिया की अहम भूमिका होती है। कांगड़ा और मंडी में NDPS मामलों के लिए नई अदालतें खोलने की घोषणा से प्रदेश के न्यायिक ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद है। NDPS अधिनियम के तहत मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध कब्जे और अन्य प्रतिबंधित गतिविधियों से जुड़े अपराधों पर कार्रवाई की जाती है। ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायिक व्यवस्था का उद्देश्य कानूनी प्रक्रिया को प्रभावी बनाना है।
नई अदालतों की स्थापना के बाद संबंधित क्षेत्रों में मामलों की सुनवाई के लिए अतिरिक्त न्यायिक क्षमता उपलब्ध हो सकती है। इससे लंबित मामलों के निपटारे में कितनी तेजी आएगी, यह अदालतों के वास्तविक संचालन, उपलब्ध संसाधनों और मामलों के कार्यभार पर निर्भर करेगा।
यह भी पढ़ें: सिंचाई टैंक में फंसा भालू, बाहर निकलने के लिए रोने लगा
विद्यार्थियों को समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने उपाधियां प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि कानूनी शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि समाज और जनसेवा में अपनी भूमिका निभाना भी है।
मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि हिमाचल प्रदेश नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी आने वाले समय में कानूनी शिक्षा और शोध के क्षेत्र में एक उत्कृष्ट संस्थान के रूप में उभरेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार विश्वविद्यालय को आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, ताकि संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियों और शोध कार्यों को आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी विशेषज्ञता का उपयोग समाज की समस्याओं के समाधान, न्याय की पहुंच बढ़ाने और जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए करने का आह्वान किया।
तीन न्यायिक हस्तियों को मानद डॉक्टरेट
समारोह में कानून और न्याय के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए तीन प्रतिष्ठित न्यायिक हस्तियों को मानद डॉक्टर ऑफ लॉज की उपाधि प्रदान की गई। इनमें भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना, त्रिपुरा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एमएस रामचंद्र राव और झारखंड हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस तरलोक सिंह चौहान शामिल रहे। इन न्यायिक हस्तियों को सम्मानित करना समारोह का प्रमुख आकर्षण रहा। विश्वविद्यालय की ओर से यह सम्मान कानून और न्याय के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए प्रदान किया गया।
16 विद्यार्थियों को मिले गोल्ड मेडल
दीक्षांत समारोह में बीए एलएलबी ऑनर्स, बीबीए एलएलबी ऑनर्स और एलएलएम पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। कानून में पीएचडी पूरी करने वाले शोधार्थियों को भी उपाधियां दी गईं। शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए कुल 16 गोल्ड मेडल प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त मेधावी विद्यार्थियों को फाउंडर चांसलर फेलोशिप पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
समारोह की शुरुआत अकादमिक जुलूस के साथ हुई। HPNLU की कुलपति प्रो. प्रीति सक्सेना ने स्वागत संबोधन दिया और विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने संस्थान की शैक्षणिक यात्रा, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी।
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एवं HPNLU के चांसलर जस्टिस गुरमीत सिंह संधावालिया ने विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान कीं। भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
यह भी पढ़ें: हिमाचल में नौकरियों की बहार, हजारों पदों पर भर्ती का रास्ता खुला
कानून की पढ़ाई के साथ समाज की समझ भी जरूरी: जस्टिस सुंदरेश
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एवं HPNLU के विजिटर जस्टिस एमएम सुंदरेश ने समारोह की अध्यक्षता की और दीक्षांत भाषण दिया। उन्होंने कहा कि कानून के विद्यार्थियों को केवल कानूनी प्रावधानों की व्याख्या करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्हें समाज की वास्तविक परिस्थितियों और लोगों की समस्याओं को भी समझना होगा।
उन्होंने विधि पेशेवरों की भूमिका को सामाजिक अभियंता, सामाजिक वास्तुकार और सामाजिक चिकित्सक के रूप में रेखांकित किया। उनके अनुसार, न्याय की प्रभावी समझ विकसित करने के लिए कानून के साथ सामाजिक परिस्थितियों का अध्ययन भी जरूरी है।
जस्टिस सुंदरेश ने कानूनी पेशे पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के संभावित प्रभावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने तकनीकी बदलावों के बीच विधि पेशेवरों की जिम्मेदारियों पर चर्चा करते हुए बदलते समय के अनुरूप ज्ञान और कौशल विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
न्यायिक व्यवस्था और कानूनी शिक्षा पर रहा जोर
HPNLU का तीसरा दीक्षांत समारोह एक ओर विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों के सम्मान का अवसर बना, तो दूसरी ओर प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से सामने आए। कांगड़ा और मंडी में नई NDPS अदालतें खोलने की घोषणा के साथ मुख्यमंत्री ने नशे से जुड़े अपराधों की सुनवाई के लिए न्यायिक ढांचे के विस्तार का संदेश दिया।
वहीं, न्यायपालिका की वरिष्ठ हस्तियों ने कानून की शिक्षा को सामाजिक जिम्मेदारी, न्याय तक पहुंच और बदलती तकनीक से जोड़ने पर जोर दिया। समारोह में डिग्रियां प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह संदेश भी स्पष्ट रहा कि विधि का ज्ञान तभी सार्थक है, जब उसका उपयोग समाज में न्याय और समानता को मजबूत करने के लिए किया जाए।
