स्वतंत्रता दिवस के दिन चंडीगढ़ और मोहाली सीमा पर तनाव की स्थिति है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल कर रही है। पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी है। मोहाली सीमा पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। ड्रोन से पूरे इलाके में नजर रखी जा रही है।इसकी वजह कौमी इंसाफ मोर्चा का राजभवन घेराव है।
कौमी इंसाफ मोर्चा ने 15 अगस्त को मोहाली के वाईपीएस चौक से पंजाब राजभवन तक मार्च निकालने का ऐलान किया था। जब प्रदर्शनकारी मोहाली सीमा से चंडीगढ़ में दाखिल होने लगे तो पुलिस ने वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले दागकर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने की कोशिश की।
पुलिस ने मोहाली चंडीगढ़ सीमा पर करीब 4500 पुलिसकर्मियों और केंद्रीय बलों की आठ कंपनियों को तैनात किया है। इससे पहले 'वारिस पंजाब दे' ने 29 जुलाई को राजभवन और सीएम आवास घेराव किया था। उस वक्त प्रदर्शनकारी चंडीगढ़ के भीतर घुसने में सफल रहे हैं। अबकी चंडीगढ़ पुलिस ने कई स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था की है। मोहाली के अलावा पंचकूला, रोपड़ और सोलन की तरफ से आने वाले रास्तों की निगरानी की जा रही है।
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प्रदर्शन की वजह क्या है
कौमी इंसाफ मोर्चा 'बंदी सिंह' यानी सिख कैदियों की रिहाई की मांग कर रहा है। संगठन का कहना है कि सजा पूरी होने के बावजूद सिख कैदियों को अलग-अलग जेलों में बंद रखा गया है। कौमी इंसाफ मोर्चा 7 जनवरी 2023 से चंडीगढ़ के सेक्टर-52 और सेक्टर-53 व मोहाली के वाईपीएस चौक पर धरना दे रहा है। प्रदर्शनकारी 2015 में फरीदकोट में हुए बरगाड़ी बेअदबी और बहिबल कलां फायरिंग केस में भी न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
प्रदर्शनकारी पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे जगतार सिंह हवारा के पैरोल की भी मांग उठा रहे हैं। हालांकि शुक्रवार शाम हवारा का एक कथित वीडियो वायरल हुआ। इसमें वह सिख समुदाय से कौमी इंसाफ मोर्चा के मार्च को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने की अपील की है।
शांतिपूर्ण विरोध में बाधा डाल रही सरकार: गुरचरण सिंह
जगतार सिंह हवारा के पिता बापू गुरचरण सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध हमारा मौलिक अधिकार है। हम तीन साल से अधिक समय से यहां शांति से बैठे हैं, लेकिन सरकार हमें न्याय देने को तैयार नहीं है। इसीलिए, आजादी के दिन हमने काले झंडे लेकर शांतिपूर्ण मार्च और विरोध प्रदर्शन किया। हमारा मकसद पूरी तरह शांतिपूर्ण है, लेकिन हमें लगता है कि सरकार उस शांतिपूर्ण विरोध में बाधा डाल रही है।
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'सिखों की रिहाई हमारी प्रमुख मांग'
उन्होंने आगे कहा, 'हमने कभी बैरिकेड नहीं तोड़े। हम पुलिस का सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन बेवजह बैरिकेडिंग से तनाव पैदा हो रहा है और हमें ऐसी स्थिति में धकेला जा रहा है जो हम नहीं चाहते। हमारी मुख्य मांग हिरासत में लिए गए सिखों की रिहाई है। अभी हम उनमें से एक के लिए 10 दिन की पैरोल की भी मांग कर रहे हैं, ताकि वह अपनी मां से मिल सके, जो लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार और बिस्तर पर है।
