आम आदमी पार्टी ने पंजाब में सरकार बनाने के लिए दिल्ली मॉडल को पंजाब की जनता के सामने रखा था। इस मॉडल में शिक्षा और स्वास्थ्य दो अहम मुद्दे थे। पार्टी ने 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में पंजाब के स्कूलों में बड़े बदलावों के वादे किए थे। 2022 में आम आदमी पार्टी की ओर से जारी घोषणापत्र में भी पार्टी ने कई वादे किए थे। पार्टी ने प्राइवेट स्कूलों पर नकेल कसने का वादा किया था और सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने का भी वादा किया था। 

 

हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स 2025-26 रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में स्कूली शिक्षा के मामले में चंडीगढ़ ने देशभर में बाजी मारी है। वहीं पंजाब, केरल, दिल्ली और केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर हैं। पंजाब के कुल 7 जिले टॉप पर रहे हैं। 

 

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नीति आयोग की रिपोर्ट में भी नंबर वन

नीति आयोग की स्कूल शिक्षा गुणवत्ता रिपोर्ट 2026 में  भी पंजाब  नंबर वन बना है। पंजाब ने दिल्ली, केरल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों को पीछे छोड़ते हुए स्कूल एजुकेशन में पूरे देश में पहला स्थान हासिल कर सबको चौंका दिया है। डेटा के मुताबिक, 2016-17 में पंजाब देश में 22वें नंबर पर था। 2018-19 में रैंकिंग और नीचे गिरी और 2020 में तो राज्य फिसलकर 27वें पायदान पर पहुंच गया। 

बजट भी बढ़ा

2022 से पहले आम आदमी पार्टी ने शिक्षा बजट बढ़ाने का भी वादा किया था। 2026-27 के बजट के लिए राज्य सरकार ने 19,279 करोड़ शिक्षा के लिए रखे हैं। यह पिछले साल से 7 प्रतइशत ज्यादा है। इसके साथ ही सरकार ने शिक्षा क्रांति 2.0 की योजना की घोषणा की है। 

प्राइवेट स्कूलों पर नकेल कसी

पंजाब सरकार ने हाल ही में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी पर लगाम लगाने के लिए अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। सीएमओ के अनुसार, प्राइवेट अनएडेड स्कूलों की अनुचित फीस बढ़ोतरी को नियंत्रित करने के लिए कैबिनेट ने 'पंजाब रेगुलेशन ऑफ फी ऑफ अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) अध्यादेश, 2026' को मंजूरी दे दी है। यह कदम पंजाब रेगुलेशन ऑफ फी ऑफ अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस एक्ट, 2016 में संशोधन करके उठाया गया है। इससे अब प्राइवटे स्कूलों की मनमर्जी पर लगाम लगाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

लगातार घट रही संख्या

पार्टी का दावा था कि पार्टी की सरकार बनने के बाद सरकारी स्कूलों को इतना अच्छा बना दिया जाएगा कि प्राइवेट स्कूलों की बजाय बच्चे सरकारी स्कूलों में एडमिशन लेंगे। हालांकि, सरकार इस मुद्दे पर फेल होते ही नजर आ रहे हैं।  सरकारी स्कूलों में लगातार दाखिले घट रहे हैं। 2024-25 में सरकारी स्कूलों में 26.69 लाख छात्र थे, जो पिछले साल के 28.23 लाख से कम हैं। वहीं प्राइवेट स्कूलों में दाखिले 29.81 लाख से बढ़कर 30.63 लाख हो गए हैं। पंजाब में सरकारी रिकॉर्ड पर ऐसे 13 से 15 स्कूल मौजूद हैं जहां पर जीरो एडमिशन हैं। 

 

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सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी

सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी अभी भी बनी हुई है। आधे से ज्यादा सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपल ही नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 30 प्रतिशत स्कूलों में हेडमास्टर नहीं है और 40 प्रतिशत से ज्यादा ब्लॉक प्राइमरी एजुकेशन ऑफिसर के पद भी खाली पड़े हैं। इन मुद्दों पर आम आदमी पार्टी पहले की सरकारों की आलोचना करती थी लेकिन चार साल सरकार में रहने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ है।