संजय सिंह, पटना। बिहार के बेगूसराय जिला परिवहन कार्यालय में लंबे समय से चल रही कथित रिश्वतखोरी की शिकायतों पर आखिरकार निगरानी विभाग का शिकंजा कस गया। शुक्रवार को हुई एक बड़ी कार्रवाई में निगरानी विभाग की टीम ने वाहन ट्रांसफर कराने के नाम पर रिश्वत लेते एक क्लर्क और एक कथित दलाल को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के बाद पूरे कार्यालय परिसर में हड़कंप मच गया।
मामला चेरिया बरियारपुर थाना क्षेत्र के सकरौली गांव निवासी सत्यम कुमार से जुड़ा है। आरोप है कि उनकी गाड़ी के ट्रांसफर संबंधी काम के लिए डीटीओ कार्यालय में रिश्वत की मांग की गई थी। लगातार दबाव बनाए जाने के बाद सत्यम कुमार ने 22 मई को पटना स्थित निगरानी विभाग में इसकी शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने मामले का सत्यापन कराया। जांच में आरोप सही पाए जाने पर कांड संख्या 63/26 दर्ज कर जाल बिछाया गया।
यह भी पढ़ें: फर्जी हस्ताक्षर विवाद में अभिषेक बनर्जी की बढ़ीं मुश्किलें, CID ने भेजा नोटिस
6 हजार रुपये लेते ही दबोचे गए आरोपी
डीएसपी रंजीत कुमार निराला के नेतृत्व में निगरानी विभाग की टीम तय योजना के तहत बेगूसराय डीटीओ कार्यालय पहुंची। जैसे ही रिश्वत की रकम का लेन-देन हुआ, टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कार्यालय के क्लर्क संजय कुमार और कथित दलाल शिवानंद झा को छह हजार रुपये के साथ गिरफ्तार कर लिया। अचानक हुई इस कार्रवाई से कार्यालय में अफरा-तफरी मच गई। कर्मचारियों और वहां मौजूद लोगों के बीच गिरफ्तारी की चर्चा पूरे दिन होती रही।
सर्किट हाउस में पूछताछ, पटना ले जाने की तैयारी
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को निगरानी विभाग की टीम अपने साथ ले गई। फिलहाल उनसे सर्किट हाउस में पूछताछ की जा रही है। विभागीय सूत्रों के अनुसार आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दोनों को पटना ले जाया जाएगा, जहां आगे की कार्रवाई होगी।
यह भी पढ़ें: TMC के कई सांसद-विधायक BJP के संपर्क में! टूट जाएगी ममता की पार्टी?
फिर कठघरे में डीटीओ कार्यालय की व्यवस्था
इस कार्रवाई ने एक बार फिर परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्यालय में कई काम बिना दलालों और अतिरिक्त पैसे के कराना मुश्किल माना जाता रहा है। आम नागरिकों को अक्सर फाइल आगे बढ़ाने और प्रक्रिया पूरी कराने के लिए अनौपचारिक भुगतान की मांग का सामना करना पड़ता है।
निगरानी विभाग की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह गिरफ्तारी केवल दो लोगों तक सीमित रहेगी या फिर जांच की आंच विभाग के भीतर मौजूद बड़े नेटवर्क तक भी पहुंचेगी। फिलहाल भ्रष्टाचार के खिलाफ इस कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया है कि शिकायत करने पर कार्रवाई संभव है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि जांच आगे बढ़कर सिर्फ रिश्वत लेने वालों तक सीमित रहती है या पूरे नेटवर्क की परतें भी खुलती हैं।
