उत्तर प्रदेश के रामपुर में मौजूद मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी एक बार फिर सुर्खियों में है। रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने यूनिवर्सिटी कैंपस में बनी 38 इमारतों को गिराने का आदेश दिया है। RDA का कहना है कि इन इमारतों का निर्माण बिना मंजूर बिल्डिंग प्लान के किया गया था, इसलिए इन्हें अवैध माना गया है। इस कार्रवाई को यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े ट्रस्ट के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान का ड्रीम प्रोजेक्ट मानी जाने वाली जौहर यूनिवर्सिटी पहले भी कई कानूनी विवादों में फंस चुकी है। आजम खान लंबे समय तक यूनिवर्सिटी के चांसलर और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के आजीवन अध्यक्ष रहे। हालांकि, साल 2026 की शुरुआत में वह और उनका परिवार ट्रस्ट के प्रबंधन से अलग हो गए थे।
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जांच के बाद जारी हुआ कार्रवाई का आदेश
रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि क्षेत्रीय जूनियर इंजीनियर की रिपोर्ट में यूनिवर्सिटी परिसर में अवैध निर्माण की बात सामने आई थी। इसके बाद विकास प्राधिकरण ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। प्रबंधन ने 8 जुलाई को अपना पक्ष रखा, जबकि 15 जुलाई को दोनों पक्षों की मौजूदगी में सुनवाई हुई। सुनवाई और उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच के बाद उत्तर प्रदेश शहरी नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत 38 भवनों को गिराने का आदेश जारी कर दिया गया।
यूनिवर्सिटी ने रखा अपना पक्ष, RDA ने नहीं मानी दलील
सुनवाई के दौरान यूनिवर्सिटी ने कहा कि जिस सिंगनखेड़ा गांव में परिसर स्थित है, वह 27 सितंबर 2024 तक रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में नहीं था। इसलिए उस समय RDA से नक्शा पास कराने की आवश्यकता नहीं थी। साथ ही यह भी कहा गया कि इमारतों का निर्माण पहले ही पूरा हो चुका था, इसलिए मौजूदा नियम लागू नहीं किए जा सकते।
हालांकि, विकास प्राधिकरण ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। RDA का कहना है कि निर्माण के समय संबंधित सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य था। जिला पंचायत के रिकॉर्ड में केवल मेडिकल कॉलेज और अकादमिक ब्लॉक के नक्शे स्वीकृत मिले, जबकि बाकी 38 भवनों के लिए कोई वैध मंजूरी नहीं मिली।
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पहले भी विवादों में रही जौहर यूनिवर्सिटी
साल 2006 में शुरू हुई मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पिछले कुछ सालों से जमीन पर कब्जे, लीज के नियमों के उल्लंघन और कई दूसरे कानूनी विवादों को लेकर लगातार सुर्खियों में रही है। राज्य सरकार पहले भी यूनिवर्सिटी की काफी जमीन अपने कब्जे में ले चुकी है। अब 38 इमारतों को गिराने के आदेश के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
