संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) में अब ब्रेन ट्यूमर और रीढ़ की जटिल सर्जरी अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक से आसान और अधिक सटीक होने की उम्मीद है। संस्थान के न्यूरोसर्जरी विभाग को रोबोटिक सर्जरी की सुविधा से लैस करने की तैयारी अंतिम चरण में है। करीब 32 करोड़ रुपये की लागत से दो अत्याधुनिक रोबोटिक मशीनें खरीदी जा रही हैं। शासन से मंजूरी मिलने के बाद इन्हें दीपावली तक संस्थान में स्थापित किए जाने की तैयारी है।

रोबोटिक तकनीक शुरू होने के बाद ब्रेन ट्यूमर और स्पाइन की जटिल सर्जरी में सर्जनों को अधिक सटीकता और बेहतर नियंत्रण मिलेगा। खास बात यह है कि ब्रेन ट्यूमर और स्पाइन की सर्जरी के लिए अलग-अलग रोबोटिक मशीनें लगाई जाएंगी। अभी तक प्रदेश के किसी सरकारी चिकित्सा संस्थान के न्यूरोसर्जरी विभाग में इस तरह की रोबोटिक सुविधा उपलब्ध नहीं है। एसजीपीजीआई में न्यूरोसर्जरी समेतअलग-अलग विभागों में हर साल बड़ी संख्या में जटिल ऑपरेशन किए जाते हैं। रोबोटिक तकनीक के आने से जटिल मामलों में सर्जिकल योजना और ऑपरेशन के दौरान सटीकता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

 चंद मिलीमीटर की चूक भी पड़ सकती है भारी

विशेषज्ञों के मुताबिक रीढ़ की हड्डी की सर्जरी बेहद जटिल होती है। इसमें हड्डियों के साथ उनसे निकलने वाली नसों की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखना पड़ता है। स्पाइनल फ्यूजन, रीढ़ की विकृति, टूट-फूट, अस्थिरता और अन्य जटिल बीमारियों में रीढ़ की सही स्थिति बेहद महत्वपूर्ण होती है। रोबोटिक तकनीक में मरीज की रीढ़ की बनावट के अनुसार सर्जरी की योजना तैयार की जाती है। इसके आधार पर स्क्रू का आकार, कोण और प्रवेश बिंदु तय करने में मदद मिलती है। इससे सर्जन को जटिल हिस्सों में अधिक सटीकता के साथ काम करने में मदद मिलती है। 

 

यह भी पढ़ें: साइबर अपराध पर कैसे लगेगी लगाम? 350 केस, 6 इंस्पेक्टर और गाड़ी सिर्फ 1

स्पाइन सर्जरी में बढ़ा रोबोटिक तकनीक का महत्व

SGPGI एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो आरके धीमान के मुताबिक, स्पाइन सर्जरी में रोबोटिक तकनीक का महत्व लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि स्पाइन रोबोट का प्रमुख इस्तेमाल पेडिकल स्क्रू लगाने में होता है। स्पाइनल फ्यूजन जैसी सर्जरी में इन स्क्रू के जरिये रीढ़ को स्थिर किया जाता है। उन्होंने कहा कि हर मरीज की रीढ़ की बनावट अलग होती है। इसी के अनुसार स्क्रू का आकार, कोण और प्रवेश बिंदु तय करना पड़ता है। कुछ मरीजों में हड्डी पतली होती है, जबकि रीढ़ टेढ़ी होने या पहले हुई सर्जरी के कारण सामान्य शारीरिक बनावट भी बदल जाती है। ऐसे मामलों में स्क्रू का सही रास्ता तय करना चुनौतीपूर्ण होता है। 

ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी में भी मिलेगी सटीकता

ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी में भी रोबोटिक तकनीक महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। मस्तिष्क के अलग-अलग हिस्से बोलने, देखने, सुनने, हाथ-पैर की गतिविधियों और याददाश्त जैसे महत्वपूर्ण कार्यों से जुड़े होते हैं। ऐसे में ट्यूमर तक पहुंचते समय आसपास के स्वस्थ हिस्सों को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी होता है। रोबोटिक प्रणाली सर्जिकल योजना के मुताबिक निर्धारित मार्ग पर अधिक सटीकता से काम करने में सर्जन की मदद करेगी। इससे संवेदनशील हिस्सों के आसपास मौजूद ट्यूमर की जटिल सर्जरी में भी बेहतर नियंत्रण मिलने की उम्मीद है।

यह भी पढ़ें: चार साल तक सील रही अफजाल की कोठी, अब कोर्ट के आदेश पर क्यों खुली सील?

मरीजों को दिल्ली-मुंबई जाने की जरूरत होगी कम

रोबोटिक सुविधा शुरू होने के बाद जटिल ब्रेन और स्पाइन सर्जरी के लिए मरीजों को बड़े निजी अस्पतालों या दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों का रुख कम करना पड़ेगा। SGPGI में ही अत्याधुनिक तकनीक से उपचार की सुविधा उपलब्ध होगी।रोबोट सर्जन का स्थान नहीं लेगा, बल्कि सर्जन को अधिक सटीकता के साथ ऑपरेशन करने में सहायता करेगा। विशेष रूप से संवेदनशील हिस्सों के आसपास सर्जिकल योजना और उपकरणों की स्थिति तय करने में यह तकनीक उपयोगी होगी।