उत्तर प्रदेश में UPPSC की स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी परीक्षा में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। लखनऊ के नेशनल पीजी कॉलेज में आयोजित परीक्षा में एक अभ्यर्थी की जगह दूसरा युवक सॉल्वर बनकर बैठा था। परीक्षा के दौरान आइरिस मैच नहीं होने पर डिजिटल सत्यापन में गड़बड़ी पकड़ी गई। दोबारा बायोमेट्रिक और आधार सत्यापन कराया गया तो मामला और संदिग्ध हो गया। परीक्षा खत्म होने के बाद सख्ती से पूछताछ की गई तो फर्जी परीक्षार्थी ने अपना असली नाम जयशंकर त्रिपाठी बताया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पूछताछ में सामने आया कि उसने गोरखपुर निवासी शशांक कुमार मिश्रा की जगह परीक्षा देने के लिए 10 लाख रुपये में सौदा किया था। 

मामला 4 अक्टूबर को आयोजित स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी (स्क्रीनिंग) परीक्षा का है। लखनऊ के राणा प्रताप मार्ग स्थित नेशनल पीजी कॉलेज के ब्लॉक-बी में पहली पाली में सुबह 9:30 से 11:30 बजे तक परीक्षा हुई। एक युवक शशांक कुमार मिश्रा के नाम से परीक्षा दे रहा था। इसी दौरान आयोग की डिजिटल वेरिफिकेशन एजेंसी के कंट्रोल रूम से सूचना मिली कि अभ्यर्थी का आइरिस यानी आंखों का मिलान नहीं हो रहा है। इसके बाद केंद्र पर दोबारा बायोमेट्रिक और आधार सत्यापन के निर्देश दिए गए। 

आधार मांगा तो देने से किया इनकार

परीक्षा खत्म होने के बाद संदिग्ध युवक को केंद्र पर रोक लिया गया। अधिकारियों ने उससे आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्र मांगे लेकिन उसने दस्तावेज देने से इनकार कर दिया। इसके बाद स्टैटिक मजिस्ट्रेट नृपेंद्र सिंह, सेक्टर मजिस्ट्रेट, केंद्र व्यवस्थापक और आयोग के अधिकारियों ने पुलिस के साथ उससे पूछताछ की। सख्ती बढ़ी तो उसने आखिरकार अपना असली नाम और पूरी कहानी बता दी। 

 

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पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए युवक की पहचान गोरखपुर के विकासनगर विस्तार निवासी 37 वर्षीय जयशंकर त्रिपाठी के रूप में हुई है। वह वर्तमान में कानपुर देहात में रेलवे टेक्नीशियन के पद पर तैनात है। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह अपने दोस्त शशांक कुमार मिश्रा की जगह परीक्षा देने पहुंचा था।

10 लाख रुपये में हुआ था सौदा

पूछताछ में जयशंकर ने बताया कि शशांक को परीक्षा पास कर नौकरी दिलाने के लिए उसकी जगह परीक्षा देने का 10 लाख रुपये में सौदा तय हुआ था। फर्जीवाड़े के लिए शशांक के वोटर आईडी कार्ड पर जयशंकर की फोटो लगाकर कूटरचित पहचान पत्र तैयार किया गया। इसी पहचान पत्र के सहारे वह परीक्षा केंद्र में पहुंचा और शशांक की जगह बैठ गया। 

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फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद हजरतगंज पुलिस ने जयशंकर त्रिपाठी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। स्टैटिक मजिस्ट्रेट नृपेंद्र सिंह की शिकायत पर जयशंकर और शशांक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि 10 लाख रुपये की डील कैसे हुई, फर्जी पहचान पत्र किसने तैयार कराया और इस पूरे खेल में और कौन लोग शामिल हैं। फरार शशांक कुमार मिश्रा की भी तलाश की जा रही है।