उत्तर प्रदेश के जिला सुल्तानपुर में वर्ष 2004 के सैफई महोत्सव के दौरान करंट से झुलसे एक युवक को 22 साल बाद भी मुआवजा नहीं मिलने का मामला अब अदालत पहुंच गया है। पीड़ित मोहम्मद अली ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तथा उनके निजी सचिव गजेंद्र सिंह के खिलाफ सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में परिवाद दाखिल कर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। आरोप है कि हादसे के बाद पीड़ित परिवार को 15 लाख 5 हजार रुपये देने का आश्वासन दिया गया था। अखिलेश यादव के हस्ताक्षर से चेक भी जारी हुआ लेकिन बैंक में भुगतान के लिए पहुंचने पर चेक बाउंस हो गया। इतना ही नहीं, परिवाद में जीवित युवक का कथित फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए जाने का भी गंभीर आरोप लगाया गया है। अदालत ने मामले में संबंधित थाने से रिपोर्ट तलब की है। अगली सुनवाई 7 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है।

 

मामला दिसंबर 2004 का है, जब इटावा के सैफई में महोत्सव की तैयारियां चल रही थीं। पीड़ित के अधिवक्ता काशी प्रसाद शुक्ला के मुताबिक, उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और तत्कालीन सांसद अखिलेश यादव के निर्देश पर बिजली विभाग की ओर से काम कराया जा रहा था।आरोप है कि महोत्सव की तैयारियों के दौरान बिजली व्यवस्था में भारी लापरवाही बरती गई थी। बिजली के तार खुले पड़े थे। इसी दौरान सुल्तानपुर के गोसाईगंज थाना क्षेत्र के सुरौली गांव निवासी मोहम्मद अली समेत तीन लोग करंट की चपेट में आ गए। हादसा इतना गंभीर था कि दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि मोहम्मद अली बुरी तरह झुलस गए।इस हादसे के बाद पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और इलाज के लिए मदद मिलने की उम्मीद थी। लेकिन अधिवक्ता का दावा है कि 22 साल बीत जाने के बाद भी पीड़ित को  मुआवजा नहीं मिल सका।

 

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15 लाख 5 हजार रुपये देने का आश्वासन

पीड़ित के अधिवक्ता काशी प्रसाद शुक्ला के अनुसार, हादसे के बाद मामला अखिलेश यादव के संज्ञान में लाया गया था। पीड़ित परिवार को इलाज और मुआवजे के लिए पार्टी फंड से 15 लाख 5 हजार रुपये देने का लिखित आश्वासन दिया गया था।आरोप है कि इस सहायता राशि के लिए अखिलेश यादव के हस्ताक्षर से चेक भी जारी किया गया। जब पीड़ित परिवार चेक लेकर बैंक पहुंचा तो खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण उसका भुगतान नहीं हो सका और चेक बाउंस हो गया।परिवार का आरोप है कि इसके बाद भी लगातार आश्वासन दिए जाते रहे, लेकिन आर्थिक सहायता नहीं मिली। लंबे समय तक इंतजार करने के बाद पीड़ित ने न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

 

जीवित युवक का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने का आरोप

इस मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। परिवाद में अखिलेश यादव के निजी सचिव गजेंद्र सिंह पर जीवित मोहम्मद अली का कथित फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का आरोप लगाया गया है।पीड़ित के अधिवक्ता का दावा है कि प्रमाण पत्र पर गजेंद्र सिंह के हस्ताक्षर हैं। आरोप है कि युवक के जीवित होने के बावजूद उसके मृत्यु प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया गया। इस कथित दस्तावेज को लेकर भी अदालत में शिकायत की गई है।हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच के बाद ही हो सकेगी।

 

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HC के आदेश के बाद MP-MLA कोर्ट में दाखिल हुआ परिवाद

अधिवक्ता के मुताबिक, पीड़ित को लंबे समय तक न्याय नहीं मिलने के बाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। हाईकोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत उपलब्ध कानूनी उपाय के लिए निचली अदालत जाने का निर्देश दिया।इसके बाद सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में एफआईआर दर्ज कराने के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया। अधिवक्ता काशी प्रसाद शुक्ला ने  बताया कि अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित थाने से आख्या तलब की है।अब इस मामले में अगली सुनवाई 7 नवंबर 2026 को होनी है। 22 साल पुराने सैफई महोत्सव हादसे से जुड़े इस प्रकरण में अदालत की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी।