उत्तर प्रदेश में स्पेशल टीईटी में शामिल होने की उम्मीद लगाए बैठे शिक्षा मित्रों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। वसीम अहमद समेत 220 लोगों की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने शिक्षा मित्रों को विशेष टीईटी में शामिल करने की मांग खारिज कर दी। अदालत ने साफ किया कि केवल सामान्य टीईटी में शामिल होने की पात्रता होने के आधार पर कोई व्यक्ति विशेष टीईटी में बैठने का अधिकार नहीं मांग सकता। कोर्ट ने शिक्षा मित्रों की कानूनी स्थिति और पहले से सरकारी स्कूलों में शिक्षक के रूप में कार्यरत शिक्षकों की स्थिति को अलग माना है।
शिक्षा मित्रों को विशेष टीईटी में शामिल करने की मांग को लेकर वसीम अहमद समेत 220 लोगों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। याचिका में कहा गया था कि राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों में पहले से कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष टीईटी कराने का फैसला किया है, इसलिए शिक्षा मित्रों को भी इस परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया जाना चाहिए।
इस मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ में हुई। 24 सितंबर को सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब अदालत ने फैसला सुनाते हुए याचिका खारिज कर दी।
कोर्ट ने क्यों नहीं मानी शिक्षा मित्रों की मांग?
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता सिर्फ इस आधार पर विशेष टीईटी में शामिल होने का दावा नहीं कर सकते कि वे सामान्य टीईटी में बैठने के लिए पात्र हैं।
कोर्ट ने शिक्षा मित्रों और पहले से सरकारी नौकरी में शिक्षक के रूप में कार्य कर रहे शिक्षकों की कानूनी स्थिति को अलग माना। अदालत के अनुसार दोनों वर्गों के बीच अंतर का आधार एक वैध कानूनी उद्देश्य से जुड़ा है। इसलिए सामान्य टीईटी की पात्रता अपने आप किसी व्यक्ति को विशेष टीईटी में शामिल होने का अधिकार नहीं देती।इसी आधार पर हाईकोर्ट ने शिक्षा मित्रों की ओर से दाखिल याचिका को खारिज कर दिया।
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आखिर क्या है स्पेशल टीईटी?
दरअसल, उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों में पहले से शिक्षक के पद पर कार्यरत शिक्षकों के लिए अलग से टीईटी कराने का फैसला लिया गया है। यह व्यवस्था शिक्षकों के लिए टीईटी को अनिवार्य किए जाने से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सामने आई है।सरकारी स्कूलों में पहले से नौकरी कर रहे शिक्षकों को निर्धारित अवधि में टीईटी पास करना होगा।
तय समय में टीईटी पास नहीं करने पर उनकी नौकरी पर असर पड़ सकता है। ऐसे शिक्षकों को एक अवसर देने के लिए विशेष टीईटी कराने की व्यवस्था की गई है।इसी परीक्षा को स्पेशल टीईटी कहा जा रहा है। इसका उद्देश्य पहले से सरकारी स्कूलों में शिक्षक के रूप में कार्यरत उन लोगों को परीक्षा का अवसर देना है, जिन पर टीईटी की अनिवार्यता लागू हुई है।
शिक्षा मित्र क्यों चाहते थे स्पेशल टीईटी में मौका?
उत्तर प्रदेश के शिक्षा मित्र लंबे समय से अपनी सेवा और शिक्षक भर्ती से जुड़े मुद्दों को लेकर राहत की मांग करते रहे हैं। ऐसे में जब सरकारी स्कूलों में पहले से कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष टीईटी की व्यवस्था सामने आई तो शिक्षा मित्रों ने भी इसमें शामिल किए जाने की मांग उठाई।शिक्षा मित्रों की ओर से दलील दी गई थी कि उन्हें भी विशेष टीईटी में बैठने का मौका मिलना चाहिए। उनका मानना था कि परीक्षा पास करने के बाद शिक्षक भर्ती में उनकी स्थिति मजबूत हो सकती है और उनके लिए आगे का रास्ता खुल सकता है।
इसी मांग को लेकर शिक्षा मित्रों की ओर से प्रदर्शन भी किए गए। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा और 220 लोगों ने याचिका दाखिल की।
टीईटी शिक्षा मित्रों के लिए क्यों अहम?
शिक्षा मित्रों के बीच टीईटी को लेकर लंबे समय से चिंता बनी हुई है। इनमें ऐसे भी कई शिक्षा मित्र हैं जिन्होंने अभी तक टीईटी पास नहीं किया है। शिक्षक भर्ती में पात्रता और शिक्षक के रूप में आगे की स्थिति को मजबूत करने के लिए टीईटी उनके लिए महत्वपूर्ण है।
इसी वजह से शिक्षा मित्रों को उम्मीद थी कि जिस तरह पहले से सरकारी स्कूलों में शिक्षक के रूप में काम कर रहे लोगों को विशेष टीईटी में बैठने का मौका दिया जा रहा है, उसी तरह उन्हें भी इस परीक्षा में शामिल किया जाएगा।लेकिन हाईकोर्ट के ताजा फैसले ने फिलहाल इस मांग पर रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि सिर्फ सामान्य टीईटी में बैठने की पात्रता होने से विशेष टीईटी में शामिल होने का अधिकार नहीं मिल जाता।
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अब शिक्षा मित्रों के सामने क्या स्थिति?
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद शिक्षा मित्रों की स्पेशल टीईटी में शामिल होने की मांग को अदालत से राहत नहीं मिली है। 220 याचिकाकर्ताओं की ओर से दाखिल याचिका खारिज होने के बाद फिलहाल विशेष टीईटी में शिक्षा मित्रों को शामिल करने का रास्ता बंद हो गया है।इस फैसले से उन शिक्षा मित्रों को झटका लगा है, जो विशेष टीईटी को शिक्षक भर्ती और अपनी सेवा से जुड़े भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर मान रहे थे। अब शिक्षा मित्रों की आगे की रणनीति और इस मामले में किसी अन्य कानूनी कदम पर नजर रहेगी।
