उत्तर प्रदेश के अयोध्या राम मंदिर में दान के चढ़ावे और पैसों की चोरी के गंभीर मामले में आखिरकार यूपी पुलिस ने गुरुवार को एफआईआर दर्ज कर ली। पुलिस ने एफआईआर में आठ लोगों के नाम शामिल किए हैं। एफआईआर में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, रमाशंकर मिश्र, करुणेश पांडेय, टीनू यादव, मनीष कुमार यादव और सुभाष श्रीवास्तव के नाम शामिल हैं।
अधिकारियों ने बताया कि यह एफआईआर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर दर्ज की गई है। इससे दो दिन पहले मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंपी थी। पुलिस के अनुसार चोरी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक षड़यंत्र समेत विभिन्न आरोपों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
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एसआईटी ने सरकार से की सिफारिशें
पुलिस के मुताबिक, एसआईटी ने कुछ सरकार ने कुछ 'कठोर' सिफारिशें की हैं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस मामले को लेकर बहुत गंभीर हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी गठित की थी। यह कदम अयोध्या राम मंदिर को मिले चढ़ावे की रकम के दुरुपयोग के आरोप सामने आने के बाद उठाया गया था।
दोषियों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई
एसआईटी में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं। यूपी पुलिस ने कहा है कि मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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एफआईआर को लेकर उठ रहे थे सवाल
अधिकारियों ने बताया कि एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में की गई सिफारिशों के बाद यह एफआईआर दर्ज की गई। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आई है, जब राम मंदिर को मिलने वाले दान की रकम के गबन को लेकर एफआईआर दर्ज करने की मांग तेज हो रही थी। समाजवादी पार्टी सहित समूचा विपक्ष एफआईआर दर्ज ना करवाने को लेकर बीजेपी पर योगी सरकार पर गंभीर सवाल उठा रहे थे।


