बिहार के भोजपुर के बिलौटी गांव में बुधवार को जो हुआ, उसके बाद पूरे इलाके में एक ही सवाल गूंज रहा है। आखिर भरत तिवारी को क्यों मारा गया? एक दिन पहले तक पुलिस जिस युवक को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताकर उसका इलाज कराने की बात कर रही थी, अगले ही दिन वही युवक पुलिस मुठभेड़ में मार दिया जाता है।

 

इसके बाद गांव की सड़कों पर उबलता गुस्सा, फोरलेन पर घंटों जाम, पुलिस के खिलाफ नारे और फिर लाठीचार्ज का सिलसिला शुरू होता है। घटनाओं की यह पूरी श्रृंखला अब बिहार की राजनीति और पुलिस व्यवस्था दोनों को कठघरे में खड़ा कर रही है।

 

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फेसबुक लाइव से शुरू हुई कहानी

बुधवार की सुबह बिलौटी गांव अचानक चर्चा में आ गया। गांव का 30 वर्षीय भरत भूषण तिवारी हाथ में पिस्टल लेकर फेसबुक लाइव पर आया। वीडियो में वह पुलिस और प्रशासन को खुली चुनौती देता दिखाई दिया। देखते ही देखते वीडियो वायरल हो गया और पुलिस हरकत में आ गई। पुलिस का दावा है कि भरत हथियार के साथ हवाई फायरिंग कर रहा था। सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस और एसटीएफ की टीम पहुंची। काफी देर तक उसे आत्मसमर्पण के लिए कहा गया, लेकिन वह नहीं माना और पुलिस पर फायरिंग करता रहा। जवाबी कार्रवाई में चली गोलियां उसके पैरों में लगीं। बाद में पटना पीएमसीएच में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

परिवार का आरोप सरेंडर के बाद मारी गई गोली

यहीं से कहानी में सबसे बड़ा मोड़ आता है। भरत की मां आशा देवी का आरोप है कि उनके बेटे ने पुलिस के सामने हथियार फेंक दिया था और आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बावजूद उसे गोली मार दी गई। परिवार का कहना है कि यह मुठभेड़ नहीं, बल्कि योजनाबद्ध हत्या है। परिजनों ने डीएसपी, थानाध्यक्ष और कार्रवाई में शामिल सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल है। इमसें भरत पुलिस के सामने हथियार रखता है और खुद को प्रशासन के हवाले कर देता है।

मौत की खबर और फूट पड़ा जनाक्रोश

गुरुवार की सुबह भरत का शव गांव पहुंचा तो माहौल विस्फोटक हो गया। हजारों ग्रामीण शव लेकर आरा-बक्सर फोरलेन पर उतर आए। देखते ही देखते राष्ट्रीय राजमार्ग ठप पड़ गया। सड़क पर शव रखा गया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारे गूंजने लगे। लोगों का आरोप था कि पुलिस ने एक युवक की जान लेकर सच छिपाने की कोशिश की है। करीब छह घंटे तक चला यह विरोध प्रदर्शन पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना रहा। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।

 

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पत्थर चले, लाठियां चलीं, तनाव और बढ़ा

हालात तब बिगड़ गए जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हो गया। पुलिस का कहना है कि भीड़ की ओर से पत्थरबाजी की गई, जबकि ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी आवाज दबाने के लिए लाठीचार्ज किया गया। इस दौरान कई लोगों के घायल होने की खबर है। बिलौटी गांव कुछ घंटों के लिए मानो पुलिस और जनता के बीच संघर्ष का मैदान बन गया।

मंत्री के बयान ने बढ़ाया राजनीतिक तापमान

मामला तब और गर्म हो गया जब बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने इस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पुलिस को कार्रवाई से पहले युवक की मानसिक स्थिति और पृष्ठभूमि की पूरी जांच करनी चाहिए थी। उनका यह बयान कि अगर कार्रवाई जरूरी थी तो पूरा एनकाउंटर नहीं, हाफ एनकाउंटर होना चाहिए था। अब राजनीतिक बहस का नया विषय बन गया है।

दबाव बढ़ा तो गिराई गाज

जनाक्रोश और सवालों के बढ़ते दबाव के बीच भोजपुर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार, दो सब-इंस्पेक्टर और एक सिपाही को निलंबित कर दिया। हालांकि गांव के लोगों का कहना है कि सिर्फ निलंबन से न्याय नहीं मिलेगा। वे पूरे मामले की न्यायिक जांच और दोषियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग कर रहे हैं।