उत्तर प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लगा है। अब प्रदेश में बिजली का बिल पहले की तुलना में 10 प्रतिशत तक ज्यादा आएगा। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने ईंधन अधिभार शुल्क (फ्यूल सरचार्ज) के तहत एक्स्ट्रा वसूली का फैसला किया है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा। बढ़ी हुई दरों का असर आने वाले बिलों में दिखाई देगा और घरेलू से लेकर व्यावसायिक उपभोक्ताओं तक सभी को ज्यादा भुगतान करना होगा।
बिजली विभाग के अनुसार, बिजली खरीद में हुए अतिरिरक्त खर्च की भरपाई उपभोक्ताओं से की जाएगी। इसी के तहत बिजली बिल में 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। रिपोर्ट्स में बताया गया है कि नवंबर 2025 के दौरान बिजली खरीद पर विभाग को निर्धारित दरों की तुलना में ज्यादा खर्च करना पड़ा था। इसी अंतर को एडजस्ट करने के लिए फ्यूल सरचार्ज लगाया गया है।
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क्यों बढ़ी कीमतें?
जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग की ओर से मंजूर बिजली खरीद दर 4.94 रुपये प्रति यूनिट थी, जबकि नवंबर 2025 में बिजली की खरीद औसतन 5.79 रुपये प्रति यूनिट की दर से की गई। इसी वजह से अतिरिक्त वित्तीय भार पैदा हुआ, जिसकी भरपाई अब उपभोक्ताओं से की जाएगी। विभाग का कहना है कि गणना के आधार पर बिल में 12 प्रतिशत से अधिक वृद्धि बन रही थी, लेकिन नियमों के तहत अधिकतम 10 प्रतिशत तक ही बढ़ोतरी की जा सकती है, इसलिए यही सीमा लागू की गई है।
जून के बिल में होगी बढ़ोतरी
उत्तर प्रदेश में जारी गर्मी के प्रकोप के बीच उपभोक्ता बिजली की दरों में राहत की उम्मीद लगाए बैठे थे लेकिन सरकार ने उपभोक्ताओं को झटका दे दिया है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, बिजली का यह बढ़ा हुआ दाम जून के बिल के साथ जुड़कर आएगा। इसका सीधा मतलब है कि जून की भीषण गर्मी में आप जितनी ज्यादा बिजली इस्तेमाल करोगे उसका बिल आपको 10 प्रतिशत ज्यादा देना होगा।
सरकार के फैसले पर उठे सवाल
इस फैसले को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने बिजली खरीद की प्रक्रिया और लागत को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। परिषद का कहना है कि नवंबर जैसे सामान्य मांग वाले महीने में बिजली इतनी महंगी दरों पर क्यों खरीदी गई, यह जांच का विषय है। परिषद ने आयोग से हस्तक्षेप की मांग करते हुए स्वतंत्र जांच कराने की अपील की है।
उपभोक्ता परिषद का तर्क है कि मई 2025 में भीषण गर्मी और रिकॉर्ड बिजली मांग के बावजूद बिजली खरीद की औसत दर कम थी, जबकि नवंबर में अपेक्षाकृत सामान्य परिस्थितियों के बावजूद खरीद दर अधिक दर्ज की गई। ऐसे में बिजली खरीद के आंकड़ों और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। परिषद ने मांग की है कि जांच पूरी होने तक बढ़ी हुई वसूली पर रोक लगाई जाए।
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मंहगे पेट्रोल -डीजल के बाद बिजली की मार
बिजली बिल में यह बढ़ोतरी ऐसे समय पर हुई है जब आम जनता पहले से ही महंगाई की मार झेल रही है। ईरान संकट के कारण सरकार लगातार पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी कर रही है। रसोई गैस, खाद्य पदार्थों और अन्य जरूरी सामान की बढ़ती कीमतों के बीच बिजली का अतिरिक्त बोझ लोगों के घरेलू बजट को प्रभावित कर सकता है। खासकर मिडिल क्लास और कम इनकम वाले परिवारों के लिए यह फैसला आर्थिक दबाव बढ़ाने वाला माना जा रहा है। मंहगाई की मार से लोग पहले ही परेशान हैं और अब यह झटका लोगों को और ज्यादा परेशान करेगा।
