देश में जहां एक तरफ चुनाव आयोग की वोटर लिस्ट को लेकर हंगामा मचा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव से पहले योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट ने वोटर लिस्ट के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। जिसके मुताबिक, पंचायत चुनाव में वे लोग ही वोट दे सकेंगे, जो पिछले 6 महीने से गांव में रह रहे हैं। फिलहाल इस नियम का प्रस्ताव रखा गया है। उत्तर प्रदेश की कैबिनेट ने तय किया है कि जो व्यक्ति पिछले 6 महीने से गांव में रह रहा है, उसे वोटर लिस्ट में शामिल होने के लिए अपना आधार कार्ड और बिजली बिल या टेलीफोन बिल दिखाना होगा। इसी के आधार पर तय होगा कि वह व्यक्ति गांव में पिछले 6 महीने से रह रहा है या नहीं।

 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को सुबह 11 बजे कैबिनेट की बैठक की थी। तब कैबिनेट के सामने पंचायत चुनाव से संबंधित एक प्रस्ताव रखा गया, जिसमें 6 महीने से गांव में रहने वाले लोगों के नाम वोटर लिस्ट में शामिल करने की बात कही गई थी। हालांकि, यह केवल एक प्रस्ताव है, जो अभी पंचायत चुनाव का नियम नहीं बना है।

 

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वोटर लिस्ट को लेकर क्या बोली कैबिनेट?

उत्तर प्रदेश की कैबिनेट के मुताबिक, पंचायत चुनाव की वोटर लिस्ट में जीवनभर गांव में रहने वाले लोगों के नाम तो होंगे ही, इसके साथ-साथ उन लोगों के नाम भी वोटर लिस्ट में शामिल हो सकते हैं, जो कम से कम पिछले 6 महीने से गांव में रह रहे हैं।

 

वे लोग अपने गांव की वोटर लिस्ट में नाम शामिल करा सकते हैं। हालांकि, उन लोगों को पुराने निवास स्थान की वोटर लिस्ट से अपना नाम हटवाना होगा। इस प्रस्ताव को योगी आदित्यनाथ ने हरी झंडी दे दी है। उत्तर प्रदेश कैबिनेट का मानना है कि वोटर लिस्ट से जुड़े इस नियम से ग्राम पंचायत चुनाव और सटीक हो पाएंगे। साथ ही लोगों को एक समान रूप से वोट देने की सुविधा मिल पाएगी।

 

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किस आधार पर बनाया गया प्रस्ताव?

उत्तर प्रदेश की कैबिनेट ने यह नियम पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा 9 के आधार पर बनाया है। इस अधिनियम में निवासी का उल्लेख किया गया था, जिसमें बताया गया है कि व्यक्ति जिस जगह पर कम से कम 6 महीने रहता है, वह वहां का निवासी माना जाएगा।