बिहार के पूर्णिया जिले के टीकापट्टी थाना क्षेत्र में बुधवार की सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब खेतों में काम कर रहे ग्रामीणों के बीच अचानक एक तेंदुआ आ धमका। धूसर टीकापट्टी बहियार में पहले तो लोगों को अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ, लेकिन कुछ ही सेकेंड में हालात भयावह हो गए। तेंदुए ने खेत में मौजूद ग्रामीणों पर हमला कर दिया और देखते ही देखते चीख-पुकार से पूरा इलाका गूंज उठा।

 

हमले में दो से तीन ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए। खेतों में काम कर रहे अन्य लोग जान बचाकर इधर-उधर भागने लगे। घटना की खबर गांव में आग की तरह फैल गई और कुछ ही देर में सैकड़ों ग्रामीण मौके पर जमा हो गए।

 

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गुस्साई भीड़ ने हथियारों से घेरा

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तेंदुआ लगातार आक्रामक बना हुआ था। घायल ग्रामीणों की हालत देखकर लोगों का गुस्सा भड़क उठा। ग्रामीण लाठी-डंडे, फरसा और पारंपरिक हथियार लेकर बहियार की ओर दौड़ पड़े। चारों तरफ से घिर जाने के बाद तेंदुआ और ज्यादा उग्र हो गया। खुद को बचाने की कोशिश में वह इधर-उधर भागता रहा, लेकिन भीड़ लगातार उस पर हमला करती रही। आखिरकार ग्रामीणों के सामूहिक हमले में तेंदुए की मौके पर ही मौत हो गई।

दहशत में गांव, अस्पताल में घायल

घटना के बाद पूरे इलाके में भय का माहौल है। घायल ग्रामीणों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। गांव के लोग अब भी सहमे हुए हैं। कई ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहली बार इतनी नजदीक से तेंदुआ देखा। स्थानीय लोगों के बीच इस बात को लेकर भी चर्चा है कि आखिर जंगली तेंदुआ आबादी वाले इलाके तक कैसे पहुंच गया।

 

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वन विभाग की जांच शुरू

टीकापट्टी थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने तेंदुए के शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। वन विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि तेंदुआ किस दिशा से भटककर गांव तक पहुंचा। शुरुआती आशंका है कि भोजन या सुरक्षित ठिकाने की तलाश में वह जंगल से निकलकर खेतों तक आ गया होगा।

इंसान और वन्यजीव के बीच बढ़ता टकराव

यह घटना सिर्फ एक तेंदुए की मौत की कहानी नहीं, बल्कि इंसानों और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष की भी है। जंगल सिकुड़ रहे हैं, आबादी बढ़ रही है और जंगली जानवर अब गांवों की तरफ भटकने लगे हैं। जब अचानक किसी गांव में खूंखार वन्यजीव पहुंचता है तो डर और गुस्से में लोग अक्सर हिंसक हो जाते हैं। पूर्णिया की यह घटना भी उसी तनाव का एक उदाहरण है।