देश के कई राज्यों की मंडियों में अभी भी अनाज खुले में रखा जाता है। यह अनाज भगवान भरोसे ही रहता है। अगर बारिश हो गई तो अनाज को खराब होने से कोई बचा नहीं सकता है। अब ऐसा ही कुछ हरियाणा और पंजाब की कई मंडियों में हुआ है। एक-दो दिन की बारिश के बाद मंडियों में जलभराव के चलते वहां पड़ा अनाज भीग गया है। कई जगहों पर अनाज पानी में तैरता दिखा जिसके बाद आशंका है कि अब वह सड़ ही जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि अनाज सुखाया जाएगा लेकिन किसानों को डर है कि अब उनका ज्यादातर अनाज सड़ जाएगा और उचित कीमत नहीं मिल पाएगी।
हरियाणा के करनाल और अंबाला के अलावा पंजाब के फजिल्का की मंडियों में पानी भर जाने से धान की फसल खराब हो रही है। इसमें ज्यादातर फसलें ऐसी हैं जिनकी अभी खरीद भी नहीं हुई है। कुछ धान बोरियों में पड़ा है, कुछ ट्रैक्टर पर और कुछ यूं ही जमीन पर ढेर के रूप में इकट्ठा किया गया। मंडियों में जल निकासी के सही इंतजाम न होने के कारण पानी भर गया है और बोरियों के साथ-साथ जमीन पर रखा धान भी भीगकर खराब हो रहा है।
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अंबाला मंडी के अधिकारी दिखा रहे अलग तस्वीर
हरियाणा के अंबाला जिले के मंडी बोर्ड के सहायक सचिव जसबीर ने बताया है, 'हमारी मंडी में 4,14,368 कुंतल धान आ चुका है जिसमें से 3,43,972 कुंतल धान खरीदा जा चुका है। लगभग 74 प्रतिशत धान की उठान हो चुकी है। किसान को तो किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जाएगी। अगर मंडी में जलभराव है तो हमने कर्मचारी लगाए हैं ताकि नालियां साफ हों और किसानों को दिक्कत न हो और उनका नुकसान न हो।'
उन्होंने आगे कहा, 'खुले में बोरियां तो नहीं हैं लेकिन अगर हैं तो पानी निकलवाने की कोशिश की जा रही है। हमारे पास ज्यादा अनाज आ गया है जिसके चलते मंडी में जाम की स्थिति बन गई है। फिर भी किसान को नुकसान नहीं दिया जाएगा। अनाज को सुखा लिया जाएगा। हमने मंडी का निरीक्षण भी किया है। नीचे से पानी आ भी जाता है तो हम कोशिश करते हैं कि अनाज गीला ना हो। अगर किसी की शिकायत है तो वह आकर संपर्क कर सकता है।'
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इसी तरह करनाल की मंडी के सुपरवाइजर सुनील ने कहा है, 'हमने सभी मंडी वालों को पहले ही कह दिया था कि तिरपाल आदि का इंतजाम करें। हमारी तरफ से पूरा इंतजाम है। कल भी खरीदी नहीं हो पाई क्योंकि हड़ताल हो रही है। उठान में देरी हो रही है इसलिए अनाज खराब हो रहा है।'
क्या बोले किसान?
फजिल्का में धान लेकर आए किसान नरेश कुमार कहते हैं, 'बारिश तो चलो आ जाती है लेकिन निकासी का इंतजाम नहीं है। इससे नुकसान हो रहा है। पानी यहां लगातार खड़ा है। सारा अनाज इसी में पड़ा है। 6 महीने खेती की है, अब यह हाल है। सब बेकार हो गया। इसका क्या हल निकलेगा? पूरी मंडी में यही हाल है। मेरे अकेले का नहीं, बहुत लोगों का नुकसान हो गया है। बहुत तकलीफ है लेकिन क्या कहें?'
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बता दें कि यह समस्या कई साल से बनी हुई है। कई मंडियों में खरीद के समय बहुत सारा अनाज खुले में भी रखा जाता है। बारिश के समय उसे तिरपाल से तो ढक दिया जाता है लेकिन नीचे पानी भर जाने के बाद अनाज खराब ही हो जाता है।
