असम में लाखों लोग बाढ़ प्रभावित हैं। उन्हें मदद का इंतजार है। इस बीच राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा को राजनीति की चिंता है। रविवार को उन्होंने खुद कहा है कि सहायता राशि में देरी की जा रही है ताकि अखिल गोगोई (विधायक) को इसका क्रेडिट ना मिले। इसकी वजह यह है कि रायजोर दल के नेता और विधायक अखिल गोगोई लोगों को सहायता राशि दिलाने के लिए विधानसभा परिसर में धरने पर बैठ गए हैं। इस पर हिमंत बिस्व सरमा का कहना है कि अखिल गोगोई को यह पहले से पता था और वह राजनीति कर रहे हैं। हिमंत का कहना है कि उन्हें भी तो अपनी पार्टी यानी भारतीय जनता पार्टी (BJP) की चिंता करनी होगी।

 

रायजोर दल के अध्यक्ष गोगोई पिछले तीन दिन से राज्य विधानसभा परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं और जल्द से जल्द सहायता राशि जारी करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा पर इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने और गंभीर स्थिति को हल्का बताने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कुछ परिवारों को छोड़कर अधिकांश प्रभावित लोगों को सरकार की ओर से कोई आर्थिक सहायता नहीं मिली है।

हिमंत बिस्व सरमा ने क्या कहा?

इसी के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में हिमंत बिस्व सरमा ने कहा, 'करीब सात दिन पहले अखिल गोगोई ने मुआवजे के मुद्दे पर मुझसे फोन पर काफी देर तक बात की थी। मैंने उन्हें विस्तार से समझाया था। अब जब उन्हें पता है कि लोगों को पैसा मिलने वाला है तो वह इसका क्रेडिट लेना चाहते हैं। हमें सहायता राशि जारी करने में देरी करनी होगी, ताकि वह इसका श्रेय न ले सकें। मेरी गलती यह थी कि मैंने उन्हें मुआवजे से जुड़ी जानकारी दे दी। वह इस मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं और मैं भी राजनीति करूंगा।'

 

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उन्होंने आगे कहा, 'लोगों को अखिल गोगोई पर भरोसा नहीं है। गोगोई और एक अन्य शख्स को लगता है कि वे लोगों को भरोसा दिला सकते हैं कि उनकी वजह से सहायता मिल रही है।' इससे पहले, हिमंत बिस्व सरमा ने यह भी कहा था कि अगर अखिल गोगोई अपना धरना खत्म कर दें तो लोगों को सहायता राशि मिल जाएगी।

अखिल गोगोई का जवाब

इस मुद्दे पर अखिल गोगोई का कहना है, 'मैं इस मुद्दे को लेकर 2 अक्टूबर को धरने पर बैठा। यह पूर्वी जिलों में बाढ़ आने का 76वां दिन था। कुछ परिवारों को 15 हजार रुपये दिए जाने के अलावा अभी तक कोई मदद नहीं दी गई है। यह कोई सालाना बाढ़ नहीं तबाही जैसा था। फिर भी जिस तरह से सरकार काम कर रही है वह स्वीकार्य नहीं है।' 

 

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अखिल गोगोई ने हिमंत को जवाब देते हुए कहा, 'मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि मैं क्रेडिट ले रहा हूं। मुझे बाढ़ से कोई क्रेडिट नहीं चाहिए। आपको चाहिए तो आफ ले लें। मैं लिखकर दे दूंगा कि मुझे क्रेडिटन नहीं चाहिए। आप बाढ़ में से लोगों को बचा नहीं पाए। क्या मैं इसका क्रेडिट ले रहा हूं? आप लोगों को राहत नहीं पहुंचा पाए। मैं इसका क्रेडिट क्यों लूंगा? अगर मुख्यमंत्री कामाख्या मंदिर में जाकर कसम खा लें कि दो दिन में सहायता राशि दे दी जाएगी तो मैं तुरंत अपना अनशन खत्म कर दूंगा।  '


बता दें कि अखिल गोगोई जोरहाट, चराईदेव और शिवसागर जिलों में बाढ़ प्रभावित परिवारों को 10-10 लाख रुपये दिए जाने की मांग कर रहे हैं। इस साल की बाढ़ के चलते अभी तक असम के कुल 108 लोगों की मौत हो चुकी है। लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। स्कूल, घर और सड़कों को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा, लोगों के खेत, मछली पालन वाले तालाब और जानवरों के बसेरे भी उजड़ गए हैं।