हिमाचल प्रदेश की राजनीति में अपने बेबाक तेवरों और मुखर राजनीतिक जीवन के लिए पहचान रखने वाले पूर्व मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया के निधन हो गया है। अब एक ऐसा अध्याय भी फिर चर्चा में आ गया है, जिसका संबंध पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से रहा है। उनका एक बहुचर्चित ऑडियो सीडी प्रकरण भी रहा है, जिसे हिमाचल के लोग भूल नहीं पाए हैं।
करीब दो दशक पहले सामने आए इस मामले ने हिमाचल की राजनीति में भूचाल ला दिया था।

 

यह वही प्रकरण था जिसमें मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने वर्ष 2007 में एक ऑडियो रिकॉर्डिंग सार्वजनिक की थी। रिकॉर्डिंग में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह और तत्कालीन नौकरशाह मोहिंदर लाल के बीच कथित बातचीत होने का दावा किया गया था। इसके बाद मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर जांच और अदालत तक पहुंचा।

एक गुमनाम सूचना से शुरू हुआ था पूरा विवाद

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायिक रिकॉर्ड में दर्ज विवरण के मुताबिक मई 2007 में मेजर विजय सिंह मनकोटिया को शिमला में एक गुप्त सूचना मिली थी। इसके बाद एक ऑडियो कैसेट उनके पास पहुंची। मनकोटिया ने रिकॉर्डिंग सुनी और उसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह तथा अन्य लोगों की आवाज होने का दावा किया। बाद में यही रिकॉर्डिंग सार्वजनिक हुई और प्रदेश की राजनीति में इसका व्यापक असर पड़ा। 

 

रिकॉर्डिंग में कथित तौर पर औद्योगिक परियोजनाओं और पैसों के लेन-देन से संबंधित बातचीत का मामला सामने आया था। जांच एजेंसियों ने इस प्रकरण को गंभीरता से लिया और बाद में वीरभद्र सिंह तथा उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह के खिलाफ मामला दर्ज हुआ। ऑडियो सीडी प्रकरण की जांच आगे बढ़ने के बाद वर्ष 2012 में शिमला की विशेष अदालत ने वीरभद्र सिंह और प्रतिभा सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश से जुड़े आरोप तय किए थे।

 

उस समय अदालत के समक्ष अभियोजन की ओर से यह तर्क रखा गया था कि रिकॉर्ड में आगे कार्यवाही के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है। मामला उस समय इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण बन गया था क्योंकि वीरभद्र सिंह हिमाचल की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल थे और केंद्र में मंत्री भी रह चुके थे।

गवाही के दौरान बदला घटनाक्रम

मामले की सुनवाई के दौरान घटनाक्रम ने नया मोड़ लिया। नवंबर 2012 में मेजर विजय सिंह मनकोटिया से भी अदालत में गवाही हुई। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने रिकॉर्डिंग सार्वजनिक करने की बात स्वीकार की, लेकिन आवाज की पहचान को लेकर उनकी गवाही अभियोजन के लिए पूरी तरह अपेक्षित नहीं रही और उन्हें आंशिक रूप से प्रतिकूल गवाह माना गया। मामले के कुछ अन्य महत्वपूर्ण गवाहों ने भी कथित लेन-देन के आरोपों की पुष्टि नहीं की। इसके बाद अभियोजन का मामला कमजोर हुआ।

 

24 दिसंबर 2012 को शिमला की अदालत ने वीरभद्र सिंह और प्रतिभा सिंह को इस बहुचर्चित भ्रष्टाचार मामले में बरी कर दिया। अदालत के फैसले के बाद उनके खिलाफ चल रही यह कानूनी लड़ाई समाप्त हो गई। इस तरह जिस ऑडियो सीडी ने वर्ष 2007 में हिमाचल की राजनीति में तूफान खड़ा किया था, वह अंततः अदालत में वीरभद्र सिंह और प्रतिभा सिंह को राहत मिलने के साथ एक अलग निष्कर्ष पर पहुंची।

 

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मनकोटिया और वीरभद्र सिंह के बीच राजनीतिक टकराव

सीडी प्रकरण से पहले और बाद में भी मेजर विजय सिंह मनकोटिया और वीरभद्र सिंह के बीच राजनीतिक मतभेद सार्वजनिक रहे। मनकोटिया लंबे समय तक कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय रहे, लेकिन बाद के वर्षों में उन्होंने वीरभद्र सिंह की कार्यशैली और राजनीतिक नेतृत्व पर खुलकर सवाल उठाए। वर्ष 2019 में भी उन्होंने कांग्रेस की चुनावी हार के लिए पार्टी नेतृत्व और वीरभद्र सिंह को जिम्मेदार ठहराया था। राजनीतिक जीवन के बाद के दौर में मनकोटिया ने भारतीय जनता पार्टी का दामन भी थामा था। साल 2024 में भारतीय सेना ने उन्हें चीफ ऑफ द आर्मी वेटर्न अचीवर अवार्ड से सम्मानित किया। 

एक ऑडियो सीडी से बदल गया था सियासी विमर्श

मेजर विजय सिंह मनकोटिया का राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा। सैनिक पृष्ठभूमि से राजनीति में आए मनकोटिया5 बार विधायक और दो बार मंत्री रहे। लेकिन उनके राजनीतिक जीवन के सबसे चर्चित अध्यायों में वीरभद्र सिंह से जुड़ा ऑडियो सीडी प्रकरण आज भी प्रमुखता से याद किया जाता है। करीब दो दशक बाद मनकोटिया के निधन के मौके पर यह पुराना प्रकरण एक बार फिर इसलिए चर्चा में है क्योंकि हिमाचल की राजनीति में उस दौर में एक ऑडियो रिकॉर्डिंग ने सत्ता, विपक्ष और जांच एजेंसियों के बीच ऐसा विवाद खड़ा किया था, जिसकी गूंज अदालत तक सुनाई दी थी। एक दौर ऐसा भी रहा जब मनकोटिया वीरभद्र सिंह के करीब आए और उन्हीं की कैबिनेट में पर्यटन मंत्री रहे।