प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव ने शिक्षक MLC का चुनाव लगातार दूसरी बार जीत लिया है। लाल बिहारी यादव ने बीजेपी प्रत्याशी डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा को 5,015 वोटों से हराया। लाल बिहारी यादव को 11,612 वोट मिले, जबकि प्रमोद कुमार मिश्रा को 6,597 वोट मिले। जीत के बाद लाल बिहारी यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि यह भाजपा के नीतियों के खिलाफ शिक्षकों का आक्रोश है। इस दौरान उन्होंने पार्टी के सर्वेसर्वा अखिलेश यादव का आभार जताया। उन्होंने कहा अखिलेश यादव शिक्षकों की पीड़ा समझते हैं। 

 

लाल बिहारी यादव की जीत इसलिए चर्चा में है, क्योंकि वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है। लाल बिहारी यादव की पहचान भी शिक्षक राजनीति से ही बनी है। वह लंबे समय से वित्तविहीन शिक्षकों के मुद्दे उठाते रहे हैं। 2020 में पहली बार जीतने के बाद अब उन्होंने दूसरी बार इस सीट पर कब्जा बरकरार रखा है। वह 2024 से विधान परिषद में नेता विपक्ष हैं। 

आजमगढ़ के रहने वाले हैं लाल बिहारी यादव

लाल बिहारी यादव मूल रूप से आजमगढ़ जिले के विशुनपुर गांव के रहने वाले हैं। उनका जन्म 1 जुलाई 1960 को हुआ था। उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय से बीए और बीएड की डिग्री हासिल की है। वह पेशे से शिक्षक रहे हैं और आजमगढ़ के खरिहानी स्थित राधा कृष्ण इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य के रूप में काम कर चुके हैं। उनकी पहचान शिक्षक संगठन चलाने और शिक्षकों की समस्याओं को उठाने वाले नेता के रूप में बनी।

 

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वित्तविहीन शिक्षकों के मुद्दों से बनाई पहचान

लाल बिहारी यादव की राजनीति का मुख्य आधार वित्तविहीन शिक्षकों के मुद्दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश में वित्तविहीन निजी स्कूलों में काम करने वाले शिक्षकों के सामने वेतन, मानदेय और सेवा सुरक्षा जैसी समस्याएं लंबे समय से रही हैं। लाल बिहारी यादव ने इन मुद्दों को लेकर शिक्षक संगठन बनाया और शिक्षकों के अधिकारों की आवाज उठाई।

 

वह उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के वित्तविहीन गुट के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं। शिक्षक समुदाय के बीच काम करने की वजह से उन्हें इस निर्वाचन क्षेत्र में अपनी अलग पहचान मिली। हालांकि, उनके संगठन से जुड़े शिक्षकों की संख्या और चुनाव में उनके समर्थन का सटीक आंकड़ा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

 

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2020 में पहली बार बने MLC

 

लाल बिहारी यादव ने 2020 में वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से पहली बार चुनाव जीता था। उस चुनाव में उन्हें 7,766 वोट मिले थे, जबकि डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा को 6,830 वोट मिले। लाल बिहारी यादव ने 936 वोटों से जीत दर्ज की थी। उस समय बीजेपी समर्थित चेत नारायण सिंह तीसरे स्थान पर रहे थे।

 

इस जीत के बाद लाल बिहारी यादव उत्तर प्रदेश विधान परिषद पहुंचे। मई 2022 में उन्हें विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भी मिली। बाद में सदन में सपा की सदस्य संख्या से जुड़ी परिस्थितियों के बीच यह जिम्मेदारी बदली और जुलाई 2024 में वह दोबारा नेता प्रतिपक्ष बने।