पंजाब में इन दिनों हलचल है। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) राजबीर घुमन और कई अन्य लोगों के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की जांच शुरू हो गई है। ये सभी पहले से ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) के निशाने पर हैं। चुनाव से ठीक पहले हो रही छापेमारियों के पैटर्न को दिल्ली चुनाव से पहले हुई गिरफ्तारियों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी के 4 प्रमुख नेता यानी अरविंद केजरीवाल , मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन और संजय सिंह चुनाव से पहले गिरफ्तार हो गए थे। अरविंद केजरीवाल के बेहद खास बिभव कुमार भी गिरफ्तार हुए थे। बिभव कुमार की तरह ही राजबीर घुमन भी मुख्यमंत्री के बेहद खास हैं इसलिए चुनावी साल में AAP और सीएम भगवंत मान की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद CBI ने राजबीर घुमन और उनके सहयोगियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया और मंगलवार को आठ स्थानों पर छापेमारी की। राजबीर घुमन और और उनके सहयोगियों पर कथित तौर पर पैसे लेकर आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की तैनाती को प्रभावित करने का आरोप है। सीबीआई ने राजबीर घुमन और अन्य आरोपियों से जुड़े आठ ठिकानों पर छापेमारी भी की। सीबीआई ने यह कार्रवाई पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के उस आदेश के बाद की, जिसमें CBI को यह कहते हुए मामले की जांच करने का निर्देश दिया गया था कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से साझा की गई सामग्री से प्रथम दृष्टया आरोपियों के भ्रष्ट आचरण में शामिल होने का संकेत मिलता है।
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AAP और BJP में जुबानी जंग
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए ‘एक्स’ पर पोस्ट कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। उन्होंने कहा, 'सीबीआई ने मेरे कैंप कार्यालय पर छापा मारा... अब पंजाब में ED और सीबीआई का दुरुपयोग किया जाएगा, ताकि पंजाब सरकार और मुझे बदनाम किया जा सके। लोगों से मिल रहे प्यार को देखकर बीजेपी घबरा गई है।' CM भगवंत मान ने बीजेपी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले की गई यह कार्रवाई राज्य में पैर जमाने की बीजेपी की बेताबी को उजागर करती है।
इस बीच, बीजेपी के वरिष्ठ नेता तरुण चुग ने नैतिक आधार पर मान के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि सीबीआई की कार्रवाई किसी राजनीतिक दल के कहने पर नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि सीबीआई अपना काम कर रही है। उन्होंने सवाल किया, 'AAP की सरकार क्यों घबरा रही है?' कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष परगट सिंह ने भी आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि उसकी नाव डूबने वाली है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने कहा कि सीबीआई की छापेमारी से सत्ता के गलियारों में हलचल मच गई है। सुखबीर बादल ने अपने X अकाउंट पर लिखा, 'सत्ता की दीवारें अब ढहने लगी हैं। सच्चाई को हमेशा दबाकर नहीं रखा जा सकता और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को परिणाम भुगतने होंगे।'
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कौन हैं वे 6 चेहरे?
राजबीर घुमन: मुख्यमंत्री भगंवत मान के करीबी और उनके OSD राजबीर घुमन इस केस के मुख्य आरोपी हैं। कहा जाता है कि जब 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान भगवंत मान अपना प्रचार कर रहे थे तभी राजबीर घुमन उनके साथ आए। भगवंत मान संगरूर के लोकसभा सांसद बने और राजबीर घुमने तब से ही उनके साथी बन गए। वह पेशे से इंजाीनियर रहे हैं और कुछ समय तक एक प्राइवेट इंजीनियर कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर भी रहे हैं।
नितिन गोहाल: मई के महीने में ईडी ने मोहाली के खरड़ में छापेमारी की थी। इस छापेमारी के दौरान एक शख्स ने 9वीं मंजिल से नोटों से भरे दो बैग फेंक दिए थे। ED ने जिस शख्स के घर पर छापेमारी की उनका ही नाम नितिन गोहाल है। आईटी सेक्टर में काम करने वाले नितिन गोहाल को राजबीर घुमन का दोस्त बताया जाता है। आरोप है कि नितिन ने सरकारी काम कराने के इच्छुक लोगों और राजबीर घुमन के बीच नितिन ने बिचौलिए का काम किया।
जितिन गोहाल उर्फ राजा: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जितिन गोहाल नितिन गोहाल का भाई है और इन गड़बड़ियों में वह भी आरोपी है। आरोप है कि नितिन ने अपने भाई जितिन को रोमी राजा महाजन और राजबीर घुमन के जरिए मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात करवाया।
रोमी राजा महाजन: गुरदासपुर के रोमी राजा महाजन पंजाब सरकार के स्वास्थ्य विभाग में काम करके रिटायर हो चुके हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जाता है कि वह दूसरे OSD की तरह काम करते थे और उनके जरिए ही जितिन गोहाल को CMO में रखवाया गया।
बीर देविंदर: AAP यूथ विंग के पदाधिकारी बीर देविंदर को भी आरोपी बनाया है। बीर देविंदर भी राजबीर घुमन के सहयोगी रहे हैं।
आर एस नागरा: आर एस नागरा भी लंबे समय से राजबीर घुमन के सहयोगी हैं।
इन 6 लोगों के अलावा कुछ अज्ञात सरकारी अधिकारियों और अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि इन अधिकारियों, कर्मचारियों और उनके सहयोगियों ने बिचौलिए के तौर पर काम किया। यही वजह रही कि CBI ने चंडीगढ़ के अलावा मोहाली, गुरदासपुर, लुधियाना, पटियाला, संगरूर और जालंधर में एकसाथ छापेमारी की।
