पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के सरकारी आवास के बगल में 50 नंबर सरकारी बंगले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ( CBI ) ने छापेमारी की है। हाई कोर्ट ने ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) राजबीर सिंह घुम्मन से जुड़े केस की जांच अब CBI को सौंप दी है। OSD राजबीर सिंह घुम्मन के गांव घ्राचों में भी CBI के अधिकारी जांच के लिए पहुंचे हैं। मोहाली में OSD के सहयोगियों से जुड़ी जगहों पर भी छानबीन की जा रही है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे पंजाब चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी की तैयारी बताई है।
भगवंत मान का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी चुनावी मोड में आ गई है, अब आम आदमी पार्टी और उनकी लोकप्रियता को बदनाम करने के लिए छापेमारी की जा रही है, दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि इतना प्यार मिल रहा है कि अब बीजेपी घबरा गई है। कुछ रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि सीएम पंजाब के कैंप ऑफिस पर ही रेड हुई है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों में FIR भी दर्ज की गई है।
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भगवंत मान, मुख्यमंत्री, पंजाब:-
बीजेपी ने पंजाब चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है। मेरे कैंप ऑफिस पर CBI का छापा पड़ा। अब पंजाब सरकार और मुझे बदनाम करने के लिए पंजाब में ED और CBI का गलत इस्तेमाल किया जाएगा। लोगों से मिल रहे प्यार से बीजेपी घबरा गई है।
कब से डटे हैं CBI के अधिकारी?
चंडीगढ़ में मंगलवार को CBI ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के कैंप ऑफिस और उनके OSD राजबीर सिंह के आवास पर तलाशी ली। CBI के अधिकारी शाम करीब 6.30 पर पहुंचे। यह कार्रवाई पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट के सोमवार के आदेश के एक दिन बाद हुई है। कोर्ट ने CBI को केस दर्ज कर मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया था।
भगवंत मान ने बीजेपी को घेरा
भगवंत मान ने X पर पोस्ट कर कहा कि BJP ने पंजाब चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। उनके मुताबिक कैंप ऑफिस पर CBI की छापेमारी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब पंजाब में ED और CBI का दुरुपयोग पंजाब सरकार और उन्हें बदनाम करने के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोगों के प्यार और समर्थन से BJP घबराई हुई है।
क्या है यह केस?
यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) के आरोपों से जुड़ा है। ED ने पंजाब सरकार में उच्च स्तर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। सोमवार की सुनवाई में हाईकोर्ट ने CBI को इनकी जांच के आदेश दिए। ED का आरोप है कि नितिन गोहल नाम का एक शख्स, सरकार से मदद चाहने वाले लोगों और OSD राजबीर के बीच बिचौलिया था। इस केस में तबादले, गोपनीय सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच और हथियार लाइसेंस दिलाने में मदद जैसे आरोप शामिल हैं।
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ईडी को क्या मिला है?
ED ने नितिन गोहल के यहां छापेमारी की थी। यह मनी लॉन्ड्रिंग जांच ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) से जुड़ी कंपनियों में लैंड यूज बदलाव (CLU) की मंजूरी और संदिग्ध बिक्री लेन-देन में कथित गड़बड़ियों को लेकर है। ED ने अपनी जानकारी पंजाब के DGP से साझा की थी। FIR दर्ज न होने पर एडवोकेट नितिन सराफ ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
हाई कोर्ट ने क्या कहा था?
चीफ जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की बेंच ने कहा कि ED की दलील, सार्वजनिक पद से जुड़े गंभीर अपराध दर्शाती है। बेंच ने पुलिस की धीमी कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। ED के 3 अगस्त को जानकारी देने के बाद सिर्फ प्रारंभिक जांच हुई। पुलिस ने ED के दस्तावेजों को पढ़ने में आई मुश्किलोंका जिक्र किया है।
हाई कोर्ट ने कोर्ट ने यह भी कहा कि OSD को जांच में शामिल होने के लिए नहीं बुलाया गया था, जबकि ED की ओर से पेश किए तथ्य में वह प्रमुख लोगों में शामिल हैं, जिन पर शक किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि मामले में प्रारंभिक जांच नहीं, FIR और विधिवत जांच जरूरी है। कोर्ट ने पंजाब सरकार और राज्य पुलिस को CBI की मदद करने का निर्देश दिया। यह आदेश नितिन सराफ की जनहित याचिका (PIL) पर आया है। पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
