बिहार में भ्रष्टाचारियों पर इकनॉमिक ऑफेंस यूनिट (EOU) का शिकंजा लगातार कस रहा है। इसी कड़ी में आर्थिक अपराध इकाई ने भवन निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता पवन कुमार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। पटना, भागलपुर, नोएडा और नई दिल्ली में स्थित उनके 6 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू करोड़ों की संपत्ति का पता लगाया है। आरोप है कि पवन कुमार ने अपनी ज्ञात आय से 104 प्रतिशत यानी 3.89 करोड़ रुपये ज्यादा की संपत्ति बना ली। भागलपुर के इंजीनियर पर यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है ।
विशेष न्यायालय से सर्च वारंट मिलते ही EOU की 6 अलग-अलग टीमें एक्शन में आ गईं। पुलिस उपाधीक्षक और निरीक्षक स्तर के अफसरों के नेतृत्व में टीमों ने सुबह से सर्च शुरू कर दिया। हर जगह दस्तावेज, बैंक डायरी, जमीन के पेपर और डिजिटल डेटा जब्त किए गए है। EOU के एक अधिकारी ने बताया, आय से अधिक संपत्ति की शिकायत पर निगरानी विभाग ने जांच शुरू की थी। सत्यापन में पाया गया कि पवन कुमार की वैध आय 3.74 करोड़ के आसपास है, जबकि उनके पास 7.63 करोड़ की संपत्ति है यानी 3.89 करोड़, 103.94 प्रतिशत ज्यादा। इसके बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कांड संख्या 12/26 दर्ज कर रेड की गई।
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कौन हैं पवन कुमार और क्या है पद?
पवन कुमार अभी भवन निर्माण अंचल (पटना) में अधीक्षण अभियंता के पद पर तैनात हैं। साथ ही निरीक्षण इकाई, पटना भवन प्रमंडल का निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी उनके पास है। 2010 बैच के इंजीनियर माने जाने वाले पवन टेंडर, बिल पासिंग और निर्माण कार्यों की मॉनिटरिंग देखते थे। विभाग में रसूख के कारण उनका नाम सुपर इंजीनियर के नाम से भी लिया जाता था।
कहां-कहां हुई रेड, क्या लगा हाथ?
EOU की टीमें एक साथ 6 जगहों पर पहुंचीं:
- पटना, उत्तरी श्रीकृष्णापुरी: यमुना निवास अपार्टमेंट का फ्लैट। यहां से जमीन और बैंक के कागजात मिले।
- पटना, भवन निर्माण विभाग कार्यालय: ऑफिस से टेंडर फाइल, बिल और निर्माण से जुड़ी फाइलें खंगाली गईं।
- भागलपुर, तिलकामांझी: आनंदगढ़ कॉलोनी स्थित आवास। भागलपुर कनेक्शन सामने आने के बाद स्थानीय लोग भी दंग रह गए।
- नोएडा, सेक्टर-75: यहां एक फ्लैट से लॉकर और प्रॉपर्टी के पेपर मिले।
- नोएडा: एक अन्य आवासीय परिसर में भी टीम ने सर्च किया।
- नई दिल्ली, द्वारका सेक्टर-10: फ्लैट से निवेश और विदेशी लेनदेन से जुड़े दस्तावेज मिले हैं।
- टीम को अब तक दर्जनों जमीन के कागजात, आधा दर्जन बैंक खातों की पासबुक, लग्जरी गाड़ियों के कागज और सोने-चांदी के आभूषणों की लिस्ट मिली है। कुछ संपत्ति पत्नी और रिश्तेदारों के नाम पर होने का भी शक है।
आय से 104 प्रतिशत ज्यादा संपत्ति कैसे बनी?
जांच में पता चला कि पवन कुमार की कुल वैध आय सैलरी, भत्ते और अन्य स्रोतों से करीब 3.74 करोड़ बनती है लेकिन उनके और परिवार के नाम पर 7.63 करोड़ की संपत्ति मिली। इसमें पटना, भागलपुर, नोएडा और दिल्ली की प्रॉपर्टी, बैंक बैलेंस, गाड़ियां और जेवर शामिल हैं। 3.89 करोड़ का अंतर सीधे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के दायरे में आता है।
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इस रेड के बाद भवन निर्माण विभाग के अन्य इंजीनियरों और अफसरों में हड़कंप मच गया। कई अफसरों ने अपने सीए को फोन कर पुराने कागजात निकलवाने शुरू कर दिए। एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, टेंडर और बिल का खेल हर कोई जानता है। पवन पकड़े गए, बाकी की बारी आनी तय है।
EOU का अगला कदम क्या?
EOU अधिकारियों के मुताबिक, 48 घंटे तक सर्च और जब्ती की कार्रवाई चलेगी। इसके बाद पवन कुमार से पूछताछ होगी। सारे दस्तावेजों का वैल्यूएशन कराया जाएगा। अगर आरोप साबित होते हैं तो संपत्ति कुर्क की जाएगी और सेवा से बर्खास्तगी की कार्रवाई भी हो सकती है। भवन निर्माण विभाग के प्रधान सचिव ने कहा है कि दोषी पाए जाने पर किसी को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं पवन कुमार की तरफ से अभी कोई बयान नहीं आया है।


