उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में अलग-अलग शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से छात्र धरना दे रहे हैं। एक तरफ छात्र टीजीटी यानी ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर (TGT) और पीजीटी यानी पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (PGT) परीक्षा की पुरानी नियमावली लागू करने की मांग कर रहे हैं, और नए बदलावों का विरोध कर रहे हैं। दूसरी ओर 60 हजार से अधिक खाली प्राथमिक शिक्षक पदों को भरने की मांग को लेकर डीएलएड और बीटीसी पास अभ्यर्थियों का धरना जारी है। आज 10 सितंबर की सुबह बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं सिविल लाइंस स्थित धरनास्थल के पास पहुंचे। पुलिस ने धरनास्थल की ओर जाने वाले रास्ते पर बैरिकेडिंग कर उन्हें आगे बढ़ने से रोका तो छात्रों ने हंगामा खड़ा कर दिया। 

 

हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएं सिविल लाइंस पहुंचकर प्रदर्शन कर रहे हैं और पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। जिन छात्रों को धरनास्थल पर जाने से रोका गया, वे हर्ष होटल के पास इकट्‌ठे होकर प्रदर्शन करने लगे। प्रदर्शन कर रहे स्टूडेंट्स का कहना है कि हमारा आंदोलन जारी रहेगा। जब तक सरकार की ओर से भर्ती को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया जाएगा, वे धरनास्थल से नहीं हटेंगे। 

 

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क्या है पूरा विवाद? 

बता दें कि प्रयागराज में चल रहे धरना-प्रदर्शन को समझने के लिए सबसे पहले यह जान लेना जरूरी है कि शिक्षक भर्ती को लेकर यहां अलग-अलग प्रदर्शन साथ-साथ चल रहे हैं। मुख्य मुद्दा TGT-PGT टीचर भर्ती का है। बताया जा रहा है कि सरकारी सहायता वाले स्कूल-कॉलेजों में करीब 20 हजार टीचर की जगहें खाली पड़ी हैं, लेकिन भर्ती नहीं हो रही। छात्रों की शिकायत है कि सरकार ने भर्ती के नियम बदल दिए हैं। 

 

नए नियम के तहत अब PGT टीचर बनने के लिए B.Ed डिग्री होना जरूरी कर दिया गया है। इसकी वजह से कई विषयों के हजारों पुराने अभ्यर्थी रेस से बाहर हो जाएंगे। छात्रों की मांग है कि भर्ती पुराने नियमों पर ही हो। बता दें कि यह मुद्दा कई महीनों से रुक-रुककर उठाया गया लेकिन अभी 31 अगस्त से लगातार इन्हीं मांगो को लेकर धरना जारी था, गुरुवार को 11वें दिन में पहुंच गया। कुछ छात्र 5 सितंबर से भूख हड़ताल पर भी बैठे हैं।

 

दूसरा मुद्दा प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती का है। 5 सितंबर यानी शिक्षक दिवस के दिन एक अलग छात्र संगठन ने प्रयागराज स्थित उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के दफ्तर को घेराव किया था और अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा था। डीएलएड और बीटीसी अभ्यर्थियों की मांग है कि 60 हजार प्राथमिक शिक्षकों के पदों पर नई भर्ती तत्काल जारी की जाए। इन पदों पर 8 साल से भर्ती नहीं हुई है। इसी मुद्दे को लेकर छात्र कई दिनों से अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन पर कर रहे हैं।  

 

आज यानी गुरुवार को यह आंदोलन और बड़ा हो गया। सुबह करीब एक हजार नए छात्र धरनास्थल पहुंच गए। भीड़ बढ़ता देख पुलिस ने रास्ता बंद कर दिया, ऐसे में हजारों छात्र पास के होटल के सामने जमा होकर नारेबाजी करने लगे। छात्रों ने बताया कि बीते बुधवार रात पुलिस ने उनके कुछ साथियों को जबरन हटाया और टेंट और सामान भी उठा ले गई, जबकि वे शांति से बैठे थे।

शिक्षक भर्ती आंदोलन, कब क्या हुआ? 

  • 16 सितंबर 2025: नई TGT-PGT भर्ती नियमावली लागू हुई, जिसमें TET अनिवार्यता, B.Ed जरूरी किया गया और नया परीक्षा पैटर्न बनाया गया, यहीं से विवाद की शुरुआत यहीं से हुई
  • 22 जून 2026: युवा मंच ने पत्थर गिरजाघर (प्रयागराज) पर पहला बड़ा प्रदर्शन किया, पुरानी नियमावली बहाल करने की मांग रखी
  • जून-अगस्त 2026: आंदोलन महीनों तक रुक-रुककर चलता रहा
  • 31 अगस्त 2026: मौजूदा लगातार अनिश्चितकालीन धरना शुरू हुआ
  • 5 सितंबर 2026 (शिक्षक दिवस) के दिन TGT-PGT के कुछ छात्र भूख हड़ताल पर बैठे, एक अलग छात्र संगठन ने 60,000 प्राथमिक शिक्षक भर्ती की मांग रखी।
  • सितंबर के पहले हफ्ते में AISA (ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा और AAP सांसद संजय सिंह अनशन स्थल पहुंचे और छात्रों को अपना समर्थन दिया।
  • 9 सितंबर 2026: देर रात पुलिस ने बड़ी फोर्स के साथ धरना बलपूर्वक हटाया, टेंट और सामान हटाए। छात्रों ने लाठीचार्ज का भी आरोप लगाया। विपक्षी दलों सपा, CJP, चंद्रशेखर आजाद, संजय सिंह ने कार्रवाई की निंदा की
  • 10 सितंबर 2026 को डीएलएड अभ्यर्थियों ने प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए महाधरने का ऐलान किया, जिसमें सुबह करीब एक हजार नए छात्र धरनास्थल पहुंचे।
    पुलिस ने रास्ता रोका, हजारों छात्र सड़क पर जमा होकर नारेबाजी करने लगे। 

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कौन हैं इस आंदोलन के मुख्य चेहरे? 

इस आंदोलन के कई मुख्य चेहरे हैं, इनमें अनिल सिंह (युवा मंच के प्रदेश अध्यक्ष हैं और जिनके नेतृत्व में TGT-PGT आंदोलन चल रहा है) का नाम शामिल है। इसके अलावा, आमरण अनशन पर बैठे पांच प्रमुख अभ्यर्थी, शिमला पटेल, मीना देवी, रोशन सरोज, अभिषेक कुमार और प्रवीण यादव, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष,  नेहा बोरा का नाम शामिल है।  

 

वहीं आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह नेहा बोरा के साथ इस आंदोलन के समर्थन में सामने आए। सांसद चंद्रशेखर आजाद ने लाठीचार्ज पर कड़ी आपत्ति जताई और सरकार से गिरफ्तार छात्रों की तत्काल रिहाई और उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग की। 

 

इसके अलावा, संगठन की बात करें तो यह आंदोलन मुख्य तौर पर युवा मंच के बैनर तले चल रहा है, जिसने पत्थर गिरजाघर के पास अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू किया। TGT-PGT, डीएलएड/बीटीसी (प्राथमिक शिक्षक भर्ती) पक्ष में छात्र-छात्राओं इस आंदोलन में शामिल हैं। 

कहां हो रहा है यह आंदोलन?

यह आंदोलन मुख्य रूप से प्रयागराज के सिविल लाइंस इलाके में केंद्रित रहा है, जहां पत्थर गिरजाघर के पास धरना और आमरण अनशन चल रहा है। पुलिस ने धरनास्थल की ओर जाने वाला रास्ता बैरिकेडिंग कर बंद कर दिया तो बड़ी संख्या में छात्र पास के हर्ष होटल के सामने जमा होकर प्रदर्शन करने लगे। वहीं प्राथमिक शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर एक अलग छात्र संगठन ने प्रयागराज स्थित उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के कार्यालय का घेराव किया था,  अपनी मांगों का ज्ञापन भी वहीं सौंपा।

कैसे आंदोलन बढ़ता गया?

इसके पीछे की सबसे वजह और आंदोलन की जड़ है नियम बदलना, सितंबर 2025 में नई नियमावली में PGT के लिए B.Ed अनिवार्य किया गया, जिससे लाखों पुराने अभ्यर्थी बाहर हो गए। दूसरी ओर प्राथमिक शिक्षकों के 60 हजार पद 8 साल से खाली पड़े हैं, इसके अलावा सहायता प्राप्त स्कूलों में 20 हजार पद खाली हैं। वहीं TGT-PGT की नियमावली वापसी की मांग और प्राथमिक शिक्षक भर्ती की मांग एक ही समय में और एक ही शहर में उठने लगी। 

 

महीनों से यह मुद्दा सुर्खियों में बना हुआ है,  जून-अगस्त 2026 तक रुक-रुककर आंदोलन चला, कोई ठोस फैसला नहीं हुआ। 31 अगस्त से अनिश्चितकालीन धरना शुरू हुआ। पुलिस कार्रवाई के बाद विवाद और बढ़ गया। इस आंदोलन को राजनीतिक समर्थन खूब मिल रहा है, पहले AISA अध्यक्ष नेहा बोरा, AAP सांसद संजय सिंह अनशन स्थल पहुंचे। वहीं सपा, CJP, चंद्रशेखर आज़ाद ने पुलिस कार्रवाई की निंदा की।