शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित तख्त श्री हजूर साहिब परिसर में जानलेवा हमला हुआ है। गुरुवार को गुरुद्वारा माता साहिब देवन जी में माथा टेकने पहुंचे सुखबीर बादल पर एक निहंग ने कृपाण से वार करने की कोशिश की। हमले में सुखबीर के दाहिने हाथ में गंभीर चोट आई, जबकि उन्हें बचाने की कोशिश में सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी भी घायल हुआ। हमलावर को मौके पर ही पकड़ लिया गया। सुखबीर बादल उस शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख हैं जिसे 100 साल से भी ज्यादा समय से सिख अपनी पार्टी मानते आए हैं लेकिन अब निहंग ही सुखबीर बादल पर हमला कर रहे हैं। 

 

सुखबीर बादल पर हमला गुरुवार दोपहर करीब पौने दो बजे हुआ है। सुखबीर बादल अपनी पत्नी और सांसद हरसिमरत कौर बादल, बेटियों और दामाद के साथ गुरुद्वारा माता साहिब देवन जी पहुंचे थे। दर्शन के बाद जब वह सीढ़ियों से नीचे आ रहे थे, तभी वहां मौजूद एक व्यक्ति ने अचानक कृपाण निकालकर उन पर हमला कर दिया। पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हमलावर ने बेहद नजदीक से वार किया। सुखबीर बादल ने बचाव में अपना हाथ आगे कर दिया, जिससे कृपाण उनके सीने तक नहीं पहुंच सकी और हाथ में चोट लगी। सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत हमलावर को पकड़ लिया।

 

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किसने किया हमला?

हमलावर की पहचान 62 वर्षीय जसपाल सिंह के रूप में हुई है। वह पुणे का रहने वाला बताया गया है और करीब दो साल से गुरुद्वारे में सेवादार के तौर पर काम कर रहा था। पुलिस के अनुसार, वह पहले वकालत भी कर चुका है और फिलहाल उसके किसी पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी सामने नहीं आई है। 

 

हमले की वजह को लेकर पुलिस पूछताछ में एक शुरुआती जानकारी सामने आई है। नांदेड़ के पुलिस अधीक्षक निलाभ रोहन के अनुसार, पूछताछ में जसपाल सिंह ने कहा कि वह पंजाब में बढ़ते नशे की समस्या को लेकर नाराज था और इसी गुस्से में उसने सुखबीर बादल को निशाना बनाया। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने यह भी बताया कि उसका इरादा सुखबीर की छाती पर वार करने का था। हालांकि, पुलिस ने अभी इसे हमले का अंतिम कारण नहीं माना है। आरोपी से पूछताछ जारी है और उसके संपर्कों, पृष्ठभूमि और किसी संभावित साजिश की भी जांच की जा रही है। पुलिस और एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड मामले के अलग-अलग पहलुओं को खंगाल रहे हैं। अभी तक किसी आपराधिक या गैंग कनेक्शन की पुष्टि नहीं हुई है।

सुखबीर की हालत कैसी है?

हमले के बाद सुखबीर बादल को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। शुरुआती जानकारी में उनके हाथ में कट लगने और टांके लगाए जाने की बात सामने आई थी। बाद में अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने बताया कि चोट गंभीर थी और हाथ की हड्डी में फ्रैक्चर हुआ है। मजीठिया के मुताबिक, सुखबीर को करीब 150 टांके लगाए गए हैं और अब वह खतरे से बाहर हैं। मजीठिया ने यह भी कहा कि हमलावर का निशाना सुखबीर का दिल था, लेकिन गुरु साहिब की कृपा से वह बच गए। 

पहले भी हुआ हमला

यह पहली बार नहीं है जब सुखबीर बादल को धार्मिक स्थल पर निशाना बनाया गया हो। 4 दिसंबर 2024 को अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के बाहर सेवादार की ड्यूटी कर रहे सुखबीर पर नारायण सिंह चौड़ा ने कथित तौर पर गोली चलाने की कोशिश की थी। हालांकि, पास में मौजूद लोगों ने उन्हें बचा लिया था और उन्हें गोली नहीं लगी थी। करीब दो साल के भीतर यह उन पर दूसरा बड़ा हमला है।

आखिर नाराज क्यों हैं पंथक धड़ा?

सुखबीर बादल शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख हैं। उनके पिता प्रकाश सिंह बादल पार्टी के बड़े नेता थे और वह कई बार पंजाब के सीएम रहे। सुखबीर बादल भी उनकी कैबिनेट में मंत्री और डिप्टी सीएम रहे। अकाली दल पिछले 100 सालों से सिखों की आवाज उठा रहा है और अब तक इसे सिखों की एक बड़ी पार्टी माना जाता रहा है। हालांकि, आज पार्टी अपने राजनीतिक वजूद को काफी हद तक खो चुकी है और फिर से जमीन तलाश रही है। 2017 में पार्टी की बुरी तरह हार हुई और पार्टी सत्ता से  बाहर हुई। इसके बाद लगातार पार्टी कमजोर होती जा रही है और सिख समाज का एक बड़ा धड़ा उनसे नाराज हो गया है। इसके पीछे कई कारण हैं। 

  • 2015 की बेअदबी की घटनाएं और बरगाड़ी मामले को लेकर तत्कालीन अकाली सरकार की भूमिका।
  • बहबल कलां और कोटकपूरा पुलिस फायरिंग, जिसमें बहबल कलां में दो प्रदर्शनकारियों की मौत हुई।
  • डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को माफी दिए जाने का विवाद। इस फैसले में सुखबीर बादल की भूमिका को लेकर सवाल उठे थे।
  • अकाली दल के बादल परिवार-केंद्रित होने और पंथक मुद्दों से दूर जाने के आरोप।

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सुखबीर बादल के सामने चुनौती

सुखबीर बादल के सामने अब अपनी राजनीतिक साख बचाने और अपने मजबूत आधार यानी पंथक वोट को फिर से अपने पाले में करना है। हालांकि, यह उनके लिए आसान नहीं होगा क्योंकि पंजाब में कई कट्टरपंथी सिख पार्टियों का उदय हो चुका है। खालिस्तानी समर्थक अमृतपाल की शिरोमणि अकाली दल  (वारिद पंजाब दे) ने पंथक नेताओं को एक मंच पर लाने की कोशिश की है और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए तैयारी कर रहा है। ऐसे में सुखबीर बादल के सामने और भी मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। उकी सुरक्षा को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं।