व्हाट्सएप जल्द ही अपने करोड़ों यूजर्स के लिए यूजरनेम (Username) फीचर लाने वाला है। इस फीचर की मदद से लोग बिना अपना मोबाइल नंबर बताए भी एक-दूसरे से चैट कर सकेंगे। अब इस फीचर के लॉन्च होने से पहले ही भारत सरकार ने इसे लेकर चिंता जताई है। सरकार का कहना है कि अगर इस फीचर का गलत इस्तेमाल हुआ, तो ऑनलाइन ठगी, फर्जी पहचान बनाकर लोगों को धोखा देने और साइबर अपराध के मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है। जिसकी वजह से सरकार ने मेटा को नोटिस भेजा है और 3 दिनों के अंदर जवाब मांगा है।

 

नोटिस में कहा गया है, 'आशंका है कि यह फीचर ऑनलाइन ठगी, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट स्कैम और किसी दूसरे की पहचान बनाकर किए जाने वाले धोखाधड़ी के मामलों को काफी बढ़ा सकता है। इससे साइबर ठग लोगों से आसानी से संपर्क कर उन्हें मैसेज भेजकर अपने जाल में फंसा सकेंगे।'

 

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फर्जी पहचान बनाकर ठगी का खतरा

नोटिस में आगे कहा गया कि यह फीचर लोगों को किसी असली व्यक्ति या संस्था से मिलता-जुलता यूजरनेम रखने की छूट दे सकता है। इससे किसी की फर्जी पहचान बनाना आसान हो जाएगा। ऐसे में ठग आम लोगों, सरकारी अधिकारियों, बैंकों, वित्तीय संस्थानों और सरकारी एजेंसियों का नाम इस्तेमाल कर लोगों को आसानी से धोखा दे सकते हैं।

 

अधिकारियों ने आशंका जताई है कि कोई व्यक्ति विदेशी नंबर से अकाउंट बनाकर किसी बड़े सरकारी अधिकारी की फोटो और मिलते-जुलते यूजरनेम का इस्तेमाल कर फर्जी कॉल या मैसेज भेज सकता है। इससे लोगों के साथ धोखाधड़ी की घटनाएं बढ़ सकती हैं।

 

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सरकार ने मेटा से जवाब मांगा

इसलिए आपको यह बताने का निर्देश दिया जाता है कि आपके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT एक्ट), सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 (आईटी नियम, 2021) और अन्य संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। सरकार का कहना है कि आपका यह कदम साइबर अपराधों को बढ़ावा दे सकता है।

 

सरकार ने मेटा से कहा है कि इस नए फीचर को लेकर 3 दिन के भीतर सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ विस्तार से जवाब दें। साथ ही, सरकार ने साफ निर्देश दिया है कि जब तक इस मुद्दे पर बातचीत पूरी नहीं हो जाती और सरकार संतुष्ट नहीं हो जाती, तब तक इस फीचर को लॉन्च या रोलआउट न किया जाए।

 

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जांच एजेंसियों के सामने बढ़ेंगी चुनौतियां

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि अभी अगर किसी संदिग्ध का मोबाइल नंबर दिख जाता है, तो उसकी पहचान और लोकेशन का पता लगाना काफी आसान होता है। अगर व्हाट्सएप में सिर्फ यूजरनेम ही दिखाई देगा और मोबाइल नंबर छिपा रहेगा तो अपराधियों तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए काफी मुश्किल हो जाएगा।

 

जांच एजेंसियों का यह भी कहना है कि कई मामलों में व्हाट्सएप जरूरी जानकारी देने में काफी देर करता है। इसकी वजह से साइबर अपराधों की जांच प्रभावित होती है और अपराधियों के खिलाफ समय रहते कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता है।