अगर किसी कर्मचारी के ऑफिस ने सैलरी से टैक्स काटते समय नई टैक्स व्यवस्था को चुन लिया है, तो परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है। सरकार के नए नियमों के मुताबिक अभी नई टैक्स व्यवस्था ही डिफॉल्ट है लेकिन हर कर्मचारी के पास यह पूरा अधिकार है कि वह अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते समय इसे बदलकर पुरानी टैक्स व्यवस्था चुन सके। पुरानी व्यवस्था चुनकर कर्मचारी अपने निवेश और बाकी बचत पर मिलने वाली टैक्स छूट का पूरा फायदा उठा सकता है कि ऑफिस की तरफ से किया गया चुनाव कर्मचारी के लिए कोई पक्का फैसला नहीं होता है।

 

ऑफिस में जो टैक्स व्यवस्था चुनी जाती है उसका काम सिर्फ हर महीने की सैलरी से टैक्स काटना होता है। यह कोई आखिरी फैसला नहीं होता है। टैक्स भरने वाला व्यक्ति अपनी सुविधा और टैक्स बचाने के लिए जब अपना इनकम टैक्स रिटर्न भरता है तो उस समय वह नई या पुरानी व्यवस्था में से अपनी पसंद की कोई भी एक व्यवस्था चुन सकता है। ऑफिस में दी गई जानकारी बदलने का समय अगर निकल भी गया है तो भी इनकम टैक्स विभाग रिटर्न भरते समय अपनी पसंद की व्यवस्था चुनने का मौका देता है। ऑफिस का चुना हुआ विकल्प कर्मचारी के लिए पक्का नहीं होता है और वह इसे बदल सकता है।

 

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पुरानी व्यवस्था चुनने का तरीका

अगर आप पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनकर हाउस रेंट अलाउंस, लीव ट्रैवल अलाउंस और धारा 80सी जैसे निवेश जैसे कि पब्लिक प्रोविडेंट फंड, लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन और ट्यूशन फीस पर टैक्स बचाना चाहते हैं तो यह बहुत आसान है। इसके लिए सबसे पहले आपको इनकम टैक्स की वेबसाइट पर अपनी आईडी से लॉग-इन करना होगा। जब आप अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फॉर्म भरेंगे, तो वहां आपको टैक्स व्यवस्था चुनने का ऑप्शन मिलेगा। वहां पुरानी टैक्स व्यवस्था को चुनने के लिए 'ऑप्टिंग आउट ऑफ न्यू टैक्स रिजीम' के सामने 'यस' पर टिक करना होता है। ऐसा करने से आप पुरानी टैक्स व्यवस्था में आ जाएंगे और अपनी सभी जरूरी छूट का दावा कर पाएंगे। फॉर्म को वेबसाइट पर जमा करने से पहले अपनी सैलरी स्लिप और निवेश से जुड़े सभी जरूरी पेपर को अच्छे से चेक कर लेना चाहिए ताकि कोई भी गलती न हो।

रिटर्न भरने की आखिरी तारीख

पुरानी टैक्स व्यवस्था का फायदा लेने के लिए आपको समय पर अपना रिटर्न भरना होगा। जिन लोगों को अपना ऑडिट नहीं कराना है उन्हें 31 जुलाई 2026 तक अपना रिटर्न भरना जरूरी है। अगर यह तारीख निकल जाती है और आप देरी से अपना रिटर्न भरते हैं तो फिर आप पुरानी व्यवस्था नहीं चुन पाएंगे। उस समय आप पर नई टैक्स व्यवस्था ही लागू हो जाएगी क्योंकि नई व्यवस्था ही अभी डिफॉल्ट नियम है। समय पर रिटर्न भरने से आप पुरानी व्यवस्था का लाभ ले सकते हैं और किसी भी तरह की कानूनी या टैक्स संबंधी परेशानी से आसानी से बच सकते हैं।

 

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बिजनेस करने वालों के लिए नियम

अगर आपकी आय नौकरी के साथ-साथ किसी बिजनेस या काम से भी होती है तो आपके लिए नियम थोड़े अलग और सख्त हैं। ऐसे लोगों को पुरानी व्यवस्था चुनने के लिए 'फॉर्म 10-आई-ई-ए' (Form 10-IEA) भरना बहुत जरूरी होता है। जो लोग बिजनेस करते हैं उनके लिए बार-बार टैक्स व्यवस्था बदलने का मौका बहुत कम मिलता है।

 

अगर आपने एक बार पुरानी व्यवस्था को छोड़कर नई व्यवस्था चुन ली, तो दोबारा पुरानी व्यवस्था में लौटना काफी मुश्किल काम हो सकता है। बिजनेस करने वाले लोगों को कोई भी फैसला लेने से पहले अपनी पूरी जानकारी को ध्यान से समझ लेना चाहिए ताकि आगे चलकर टैक्स के मामले में कोई दिक्कत न आए।