महाराष्ट्र के पिंपरी चिंचवड में बीजेपी की पार्षद शैलजा मोरे के एक बयान पर हंगामा बरपा है। उन्होंने श्मशान घाट की खराब देखभाल को लेकर एक ठेकेदार को जिंदा जलाने की धमकी दी है। विपक्षी नेताओं और उनकी अपनी ही पार्टी के साथियों ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।
शैलजा मोरे पिंपरी चिंचवड महानगरपालिका की पूर्व उपमहापौर रह चुकी हैं। उन्होंने बुधवार को महानगरपालिका की सामान्य सभा की बैठक में यह बयान दिया। उन्होंने निगड़ी और शहर के दूसरे हिस्सों में स्थित श्मशान घाटों की हालत को दयनीय बताते हुए गुस्सा जाहिर किया।
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शैलजा मोरे के बयान पर क्यों हो रहा है हंगामा?
शैलजा मोरे ने बैठक में कहा कि श्मशान घाटों का रखरखाव ठीक से नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि पानी बिजली और स्टाफ की कमी के चलते श्मशान घाटों में तरह-तरह की दिक्कतें बनी हुई हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने 5 महीने पहले निगड़ी के इलेक्ट्रिक श्मशान घाट की खराब हालत को लेकर महापौर और महानगरपालिका आयुक्त को पत्र लिखा था लेकिन इसे सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया।
शैलजा मोरे, पार्षद, पिंपरी चिंचवड:-
'जहां किसी श्मशान घाट के लिए 10 कर्मचारियों की जरूरत होती है वहां ठेकेदार सिर्फ दो लोग ही उपलब्ध कराते हैं। श्मशान घाटों में कीचड़ भरा रहता है। मुझे ठेकेदार का नाम दो मैं उसे जिंदा जला दूंगी।'
अब क्या सफाई दे रही हैं पार्षद?
इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में शैलजा मोरे के बेटे अनूप ने कहा कि वह श्मशान घाटों की खराब हालत देखकर गुस्से में थीं। उन्होंने गुस्से में यह बयान दिया है। यह उनकी मंशा नहीं थीं, वह बस बेहतर काम चाहती थीं।
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क्यों अपने नेताओं के निशाने पर आईं शैलजा मोरे?
शैलजा मोरे की धमकी को लेकर लोग नाराज हैं। लोग उनकी भाषा पर सवाल उठा रहे हैं और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं। बीजेपी के पिंपरी चिंचवड अध्यक्ष बापू काटे ने कहा कि उनके शब्दों का इस्तेमाल गलत था। बापू काटे ने कहा, 'महापौर और मैं खुद इस मुद्दे पर शैलजा मोरे से बात करेंगे और उन्हें सदन में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल न करने के लिए कहेंगे।' महानगरपालिका की पूर्व स्थायी समिति अध्यक्ष सीमा सावले ने भी कहा कि सामान्य सभा की बैठक में शैलजा मोरे की भाषा पूरी तरह गलत और अनुचित थी। विरोधियों का कहना है कि ऐसी भाषा का इस्तेमाल, सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों को नहीं करना चाहिए।
