भारत इन दिनों एक क्रांति से गुजर रहा है। क्रांति की अगुवाई 'प्रबुद्ध' वर्ग नहीं कर रहा है, बल्कि साल 1997 से लेकर 2012 तक के बीच पैदा हुए युवा कर रहे हैं, जिन्हें दुनिया 'GenZ' के नाम से जान रही है। इनकी ताकत का अंदाजा ऐसा लगा लीजिए कि 3 बार से बहुमत में चुनी जा रही एनडीए गठबंधन की नरेंद्र मोदी सरकार NEET पेपरलीक के खिलाफ इनकी मांगों के सामने जुक गई, केंद्र के सबसे ताकतवर मंत्रियों में से एक धर्मेंद्र प्रधान को त्यागपत्र तक देना पड़ गया।

भारत के GenZ जंतर मंतर पर ऐसे टिके कि सरकार के पास कोई विकल्प ही नहीं बचा। सरकार परीक्षा पद्धति में सुधार का वादा करती रही, नया कानून बनाने की बात भी कही, यह भी कहा कि दोषी बख्शे नहीं जाएंगे, तब भी GenZ अपनी मांगों पर अड़े रहे कि इस्तीफा चाहिए, हर हाल में इस्तीफा चाहिए।

नतीजा यह हुआ कि 5 साल से ज्यादा कार्यकाल वाले धर्मेंद्र प्रधान को अपना पद छोड़ना पड़ा, वह भी उस भीड़ के दबाव में जिसके चेहरे बिखरे हुए रहे। एक तरफ कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास, आशुतोष रांका और अभिजीत रहे। दूसरी तरफ सोनम वागचुक के आमरण अनशन का दबाव रहा। कुछ जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की छात्राएं रहीं, जिन्होंने अनशन छेड़ दिया था और एक भीड़ थी, जिसका कोई चेहरा नहीं था।

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क्रांति हुई तो क्रांति को दबाने की कोशिशें भी हुईं। दिल्ली के जंतर मंतर से आगे निकलकर प्रदर्शनकारी 'चलो संसद' मार्च निकालने लगे, 20 जुलाई को जैसे ही राजीव चौक से आगे बढ़कर रेल भवन तक पहुंचे पुलिस ने लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले दागे। दावा किया गया कि पैलेट गन भी चली। कई लोग जख्मी हैं, जिनका इलाज चल रहा है। यह आंदोलन, इंस्टाग्राम पर भी समानांतर चल रहा था, देशभर से लोग जंतर मंतर का रुख कर रहे थे। 

भारत में भी नेपाल की तरह, इंस्टाग्राम रीलबाजी और फोटो शेयरिंग ऐप के दायरे से बाहर निकलकर इतना आगे आया कि मेन स्ट्रीम मीडिया को लोग नापसंद करने लगे। यूट्यूबर, डिजिटल पत्रकार तो छा गए लेकिन मेन स्ट्रीम मीडिया के पत्रकार बुरे पिटे। सरकार पर इस कदर दबाव है कि GenZ आंदोलन के बाद से 3 बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंस्टाग्राम पर वीडियो डाल चुके हैं, मंत्रियों से इंस्टाग्राम पर सक्रिय होने की अपील की जा रही है। इंस्टा, क्रांति का डिजिटल हथियार बन गया है।

कहां-कहां GenZ क्रांति ने हिलाईं सरकारें?

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह, GenZ क्रांति के उपज हैं। भ्रष्टाचार और नीतिगत कमियों से नाराज युवा समुदाय सड़कों पर उतरा और सरकार तक गिर गई। बालेन शाह से ठीक पहले जो तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी ओली को जान बचाकर भागना पड़ा। कई पूर्व प्रधानमंत्रियों के जान पर बन गई, कई मंत्रियों के सिर फटे। 

नेपाल में सितंबर 2025 में युवाओं ने सिर्फ दो दिन के प्रदर्शन में सरकार गिरा दी। वे भ्रष्टाचार, राजनीतिक बेईमानी और सोशल मीडिया पर लगे प्रतिबंध के खिलाफ थे।

6 महीने बाद युवाओं के समर्थन वाली पार्टी ने चुनाव में भारी जीत हासिल की। बालेन शाह रैपर हैं, 35 पार की उम्र है। वह खुद जेनजी नहीं हैं लेकिन युवा हैं। नेपाल की क्रांति, सबसे सफल जेनजी क्रांति है। GenZ सिर्फ सत्ता बदलना नहीं चाहते हैं, क्रांति चाहते हैं, जिसमें वे काफी हद तक सफल रहे हैं। दुनिया के और किन हिस्सों में ऐसा हुआ है, आइए जानते हैं- 

मेडागास्कर, जिस कर्नल ने बगावत किया, वह राष्ट्रपति बना

नेपाल के कुछ हफ्ते बाद मेडागास्कर में भी जेन Z के प्रदर्शन हुए। सेना के कर्नल माइकल रात्रियानिरिना  ने युवाओं का साथ दिया, जिसके बाद राष्ट्रपति एंड्री राजोएलिना देश छोड़कर भाग गए। अब वह कर्नल ही नए राष्ट्रपति बन गए हैं। उन्होंने भ्रष्टाचार रोकने के लिए मंत्रियों को लाई-डिटेक्टर टेस्ट देने का फैसला किया है। चुनाव अगले साल होने वाले हैं। यहां भी क्रांति इंस्टाग्राम और सोशल मीडिया से आई। 

पेरू में भी क्रांति लेकिन उम्मीदों जैसे नतीजे नहीं

पेरू में राष्ट्रपति दीना बोलुआर्टे की विदाई, भी GenZ क्रांति की उपज रही। उनके कार्यकाल के दौरान हिंसा, सिंडेकेट पर बढ़ता दबाव और गृहयुद्ध जैसे हालात की वजह से उनके खिलाफ युवा सड़कों पर उतर गए। वहां की अंतरिम राष्ट्रपति जोस मारिया बाल्काजर हैं, नवनिर्वाचित राष्ट्रपति केइको फुजिमोरी 28 जुलाई 2026 को आधिकारिक तौर पर पदभार ग्रहण करेंगी। यहां की क्रांति में भी इंस्टाग्राम की भूमिका रही।

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इंडोनेशिया में भी हालात बदलने की कोशिश

इंडोनेशिया में अगस्त 2025 में युवाओं ने सांसदों को मिलने वाली सुविधाओं के खिलाफ प्रदर्शन किए। महंगाई और बेरोजगारी भी मुद्दा था। राष्ट्रपति  प्रबोवो सुबियांटो ने कुछ सुविधाएं कम कीं, लेकिन सिस्टम नहीं बदला। जेन जी क्रांति का आंशिक असर हुआ, यह पीढ़ी भी इंस्टा के सहारे क्रांति की ओर बढ़ी। हजारों लोग हिरासत में लिए गए।

फिलीपींस का नतीजा क्या निकला?

 फिलीपींस में भी सितंबर 2025 में युवाओं ने भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शन किए। दोनों देशों में युवा सत्ता परिवर्तन चाहते थे लेकिन कामयाबी नहीं मिल पाई। पुरानी सत्ता व्यवस्था ही काबिज है। राष्ट्रपति फर्डिनेंड 'बोंगबोंग' मार्कोस जूनियर सत्ता में कायम हैं लेकिन कई सुधारों को लागू करने के लिए मजबूर भी हुए हैं। सैकड़ों लोग हिरासत में लिए गए, हिंसा भड़की। 

मोरक्को, मौतें हुईं लेकिन परिवर्तन नहीं 

मोरक्को में युवा बेरोजगारी, खराब स्कूल-हॉस्पिटल और महंगे स्टेडियम प्रोजेक्ट्स के खिलाफ सड़कों पर आए। लेकिन पुलिस की सख्ती में कई लोग मारे गए और कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ। केन्या और टोगो जैसे युवा-बहुल देशों में भी यही स्थिति रही।

बांग्लादेश, जहां GenZ सबसे पहले हुई क्रांति

2024 में सबसे पहले बांग्लादेश में जेन Z ने सफल क्रांति की। खूनी प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना सरकार की जान बचाने के लिए भागना पड़ा। शेख हसीना 6 अगस्त 2024 से ही भारत में हैं। अब वहां सत्ता बदल चुकी है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के निर्वासित बेटे, तारिक रहमान सत्ता में आए। फरवरी 2026 में वहां चुनाव हुए थे, तब तक अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस थे। तुर्की, मैक्सिको और तंजानिया, केन्या, मालदीव, तिमोर-लेस्ते, पैराग्वे जैसे देशों में भी क्रांतियां हुईं लेकिन नतीजा नहीं निकाल।