बेंगलुरु के एक चीफ एग्जीक्युटिव ऑफिसर (CEO) ने दावा किया है कि वह अब उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश के लोगों को नौकरी पर रखना बंद कर दिया है। CEO ने X पर यह दावा किया है, जिसके बाद बवाल मच गया। शख्स ने दावा किया कि इन लोगों का व्यवहार अपने महिला सहकर्मियों के प्रति ठीक हीं होता है।
बेंगलुरु की एक कंपनी 'AI स्पोर्ट्स वर्ल्ड' के CEO कार्तिक शिनॉय ने यह दावा किया है। वह इस ग्रुप के फउंडर भी हैं। यह कपनी, बच्चों के लिए अलग-अलग कार्यक्रमों का आयोजन कराती है। कंपनी के CEO ने कहा है कि महिलाओं के प्रति बार-बार खराब व्यवहार के बाद यह नीति तैयार की गई है।
कार्तिक शिनॉय ने दावा किया कि उन्होंने कंपनी में मौजूद लोगों से चर्चा और बहस के बाद यह फैसला किया है। उन्होंने कहा है कि उनके इस फैसले का समर्थन एक राजस्थानी महिला ने भी किया है। कार्तिक का कहना है कि इन राज्यों के लोगों का व्यहार ठीक नहीं नहीं होता है।
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कार्तिक ने लिखा क्या है?
मैं यह कहने के लिए क्षमाप्रार्थी हूं लेकिन हमने आज एक लंबे झगड़े के बाद फैसला लिया है। हम लोग अब उत्तर भारत के इन 4 राज्यों को नहीं हायर करेंगे। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और मध्य प्रदेश का नाम शामिल है। हमारे साथ काम कर रही एक राजस्थानी महिला ने इसका समर्थन किया है।'
क्यों कंपनी ने यह फैसला लिया है?
कार्तिक ने दावा किया कि वह बार-बार अपने सहकर्मी को टोक रहे थे कि व्यवहार बदले। उसने 2 बार की चेतावनी के बाद भी महिला सहकर्मियों के प्रति अपने व्यवहार में कोई तब्दीली नहीं लाई। वह महिला सहकर्मी के साथ जबरदस्ती कर रहा था, जिसके बाद कंपनी ने चर्चा के बाद यह फैसला लिया है। उनके इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर हंगामा बरपा है।
फैसले को सही क्यों ठहरा रहे CEO?
कार्तिक ने अपने फैसले के पक्ष में कहा कि उनकी संस्था बच्चों के लिए काम करती है इसलिए ऐसे मानोवृत्ति के लोगों को रखना ठीक नहीं होगा, जिनके मन में यह सब चल रहा हो। इससे बच्चों पर असर पड़ सकता है। ऐसे लोगों के लिए रोजगार के अवसर नहीं होने चाहिए।
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कार्तिक ने दावा किया कि A1 स्पोर्ट वर्ल्ड में करीब 32 लोग काम करते हैं, जिनमें 14 महिलाएं भी हैं। 20 राज्यों के लोग काम करते हैं, 12 गैर दक्षिण भारतीय राज्यों से हैं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग धार्मिक पृष्ठभूमि के लोग यहां काम करते हैं, हिंदू, मुसलमान, ईसाई, सिख और बौद्ध सभी धर्मों के लोग यहां काम करते हैं।
और किस बात पर मचा है बवाल?
कार्तिक का दावा है कि भारतीय असुरक्षित और अहंकारी हैं, वे खामियों को नहीं मानते हैं, बल्कि उनका मजाक उड़ाते हैं, न उसे सुधारने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा, 'लगभग 85-90 फीसदी जवाब बिहार से क्यों आ रहे हैं।' उनका कहना है कि लिंग, धर्म, जाति या पंथ के भेदभाव के बिना सभी को एक जैसा अवसर देने में भरोसा रखती है। उन्होंने कहा है कि कर्नाटक में भी समस्याएं हैं, कोई राज्य साफ नहीं है।
कौन है वह कर्मचारी जिसकी वजह से बवाल मचा?
कार्तिक का कहना है कि जिस कर्मचारी की वजह से यह फैसला लेना पड़ा वह 24 साल का था, MBA ग्रेजुएट था। उसकी नियुक्ति के दो महीने बाद उसके व्यवहार में बदलाव आया।
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लोगों ने क्या कहा?
लोगों का कहना है कि किसी एक व्यक्ति के व्यहार की वजह से पूरे राज्य पर ही सवाल उठाना गलत है। क्या उसे निकालने के अलावा कोई और कानूनी फैसला किया गया है या नहीं? कानूनन कोई सजा सुनाई गई है या नहीं। मनगढ़ंत कहानी की जगह कोई कानूनी कार्रवाई की गई है या नहीं।
लोगों का कहना है कि किसी भी राज्य के लोगों के खिलाफ ऐसा पूर्वाग्रह गलत हैं। किसी भी राज्य के लोग दूध के धुले नहीं होते हैं, हर जगह खराब लोग होते हैं। आपका दावा है कि कर्नाटक सुधर रहा है लेकिन इसके खिलाफ आंकड़े कोई दे दे तो क्या होगा। कुछ लोग कह रहे हैं कि यह नफरती बात है, इसे सार्वजनिक करने की जरूरत नहीं थी।
