जो लोग बिजनेस करते हैं और नॉन-ऑडिट कैटेगरी में आते हैं, उन लोगों को 31 अगस्त तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न जमा करवाना था, कई लोगों ने 31 अगस्त को इनकम टैक्स रिटर्न जमा नहीं किया। ऐसे लोग बिलेटेड रिटर्न यानी देरी से भरने वाला रिटर्न भर सकते हैं। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के मुताबिक, बिलेटेड रिटर्न में व्यक्ति को ब्याज के साथ इनकम टैक्स रिटर्न भरना पड़ेगा।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के मुताबिक, जिन लोगों ने 31 अगस्त तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न जमा नहीं किया है, वे लोग 31 दिसंबर तक बिलेटेड रिटर्न जमा कर पाएंगे। हालांकि, देरी से ITR भरने से व्यक्ति को ज्यादा रुपये देने होंगे। साथ ही टैक्स में मिलने वाली कुछ छूट भी अब नहीं मिलेगी। अब सवाल उठता है कि लेट ITR जमा करने से व्यक्ति को कितना नुकसान झेलना पड़ सकता है।
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क्या होगा नुकसान?
जिन लोगों ने आखिरी तारीख तक ITR जमा नहीं की थी, उन्हें अब जुर्माना भरना पड़ सकता है। मिसाल के तौर पर, जिन लोगों की सालाना आय 5 लाख रुपये से ज्यादा है, उन्हें 5,000 रुपये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है। वहीं, जिन लोगों की सालाना आय 5 लाख रुपये से कम है, उन्हें 1,000 रुपये का जुर्माना भरना पड़ सकता है।
इनकम टैक्स एक्ट की धारा 234A के तहत देर से टैक्स जमा कराने वाले लोगों को 1 फीसदी प्रति महीने की दर से ब्याज भरना पड़ सकता है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के मुताबिक, देर से टेक्स भरने वाले लोगों को नुकसान को कैरी-फॉरवर्ड करने के लिए लॉस रिटर्न भरना होगा।
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किसे भरना था ITR?
इनकम टैक्स जानकारों के मुताबिक, यह ITR उन लोगों को भरना था जो बिजनेस या ऐसे प्रोफेशन में हैं, जिन्हें नॉन-ऑडिट कैटेगरी का माना जाता है। जिन लोगों की सालाना आय 50 लाख रुपये है, साथ ही जिन लोगों के बिजनेस का सालाना टर्नओवर 2 करोड़ रुपये है, उन्हें भी यह इनकम टैक्स रिटर्न जमा करवाना पड़ता है।
यह टैक्स रिटर्न ITR-3 के जरिए भरना पड़ता है। इसका मतलब साफ है कि ITR-1 और ITR-2 वाले लोगों को यह टैक्स रिटर्न नहीं भरना था। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इनकम टैक्स रिटर्न को लेकर अहम जानकारी दी थी, जिसमें अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर बताया कि 2026 में 7 करोड़ से ज्यादा ITR भरे गए।
