आज मार्केट में एक जैसे कई प्रोडक्ट्स मौजूद हैं। चॉकलेट हो, नमक हो, साबुन हो या कार, हर कैटेगरी में ग्राहक के पास कई ब्रांड्स का ऑप्शन होता है। ऐसे में सिर्फ प्रोडक्ट की खूबियां बताकर ग्राहक को अपनी तरफ खींचना आसान नहीं है। यही वजह है कि कई ब्रांड्स अब प्रोडक्ट के साथ उसकी स्टोरी और इमोशन को भी अपनी मार्केटिंग का हिस्सा बना रहे हैं। कंपनियां ग्राहक को सिर्फ यह नहीं बतातीं कि उनका प्रोडक्ट क्या करता है बल्कि उसे किसी रिश्ते, खुशी, परिवार, त्योहार या रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़ देती हैं। इससे प्रोडक्ट के साथ एक भावना भी जुड़ जाती है और ग्राहक के दिमाग में ब्रांड की अलग पहचान बन सकती है। यही जीनियस मार्केटिंग का एक तरीका है, जहां कंपनियां प्रोडक्ट बेचने के साथ उसके पीछे की स्टोरी भी बेचती हैं।
इस तरीके को कैंटर की 2026 की क्रिएटिव इफेक्टिवनेस अवॉर्ड्स इंडिया रिपोर्ट में भी देखा गया है। कैंटर ने भारत के 1,500 से ज्यादा क्रिएटिव्स समेत दुनियाभर के 13,000 से ज्यादा क्रिएटिव्स को टेस्ट किया। भारत में 250 से ज्यादा विज्ञापनों का मूल्यांकन किया गया। कैंटर के मुताबिक, असरदार विज्ञापनों में अच्छी स्टोरी, कल्चर से जुड़ाव और ब्रांड को स्टोरी में सही तरीके से शामिल करना जरूरी है। सिर्फ ऐसी स्टोरी बनाना काफी नहीं है जिसे देखकर लोग भावुक हो जाएं। ग्राहक को यह भी समझ आना चाहिए कि वह स्टोरी किस ब्रांड की है। कैंटर के मुताबिक, क्रिएटर इन्फ्लुएंस में भी 77% की बढ़ोतरी हुई है लेकिन सिर्फ 27% क्रिएटर कंटेंट ही सही तरीके से स्पॉन्सरिंग ब्रांड से जुड़ पाता है।
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टाटा साल्ट ने विदाई से जोड़ा ब्रांड
टाटा साल्ट का ‘विदाई’ कैंपेन इसका एक अच्छा उदाहरण है। इसे कैंटर के 2026 के क्रिएटिव इफेक्टिवनेस अवॉर्ड्स में सहराया गया। इसमें भारतीय शादी और विदाई के इमोशनल पल को स्टोरी का हिस्सा बनाया गया। यहां सिर्फ नमक की खूबियों के बारे में नहीं बताया गया बल्कि ब्रांड को परिवार और रिश्तों से जुड़े एक ऐसे पल के साथ जोड़ा गया जिससे लोग आसानी से कनेक्ट कर सकें। इसका बिजनेस एंगल भी साफ है। नमक एक ऐसा प्रोडक्ट है जिसमें ग्राहक के पास कई ऑप्शन होते हैं। ऐसे में किसी खास भावना या याद से जुड़कर ब्रांड अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश करता है।
कैडबरी ने रिश्तों से जोड़ी चॉकलेट
कैडबरी डेयरी मिल्क का ‘न्यू नेबर’ कैंपेन भी कैंटर के 2026 में सराहे गए कैंपेन में शामिल है। इसमें नए पड़ोसी के आने और लोगों के बीच बनने वाले रिश्ते की स्टोरी दिखाई गई। चॉकलेट की कीमत या फीचर्स बताने के बजाय ब्रांड ने इंसानी रिश्ते को स्टोरी का हिस्सा बनाया। इस तरह कैडबरी चॉकलेट को सिर्फ खाने की चीज के तौर पर नहीं बल्कि खुशी और लोगों के बीच कनेक्शन से जोड़ता है। इससे ग्राहक के लिए प्रोडक्ट के साथ एक याद या भावना जुड़ सकती है।
किटकैट ने ब्रेक को बनाया पहचान
किटकैट का ‘ब्रेक पर सिर्फ किटकैट ब्रेक’ कैंपेन भी कैंटर के 2026 में सराहे गए कैंपेन में शामिल है। इसमें ब्रांड ने अपने प्रोडक्ट को ब्रेक लेने की आदत से जोड़ दिया। यानी किटकैट की मार्केटिंग में ब्रेक खुद ब्रांड की पहचान का हिस्सा बन गया। इससे ग्राहक के दिमाग में एक आसान कनेक्शन बनता है कि ब्रेक के साथ किटकैट को याद किया जाए। यहां कंपनी सिर्फ चॉकलेट की बिक्री की बात नहीं कर रही बल्कि रोजमर्रा की एक आम आदत को अपने ब्रांड से जोड़ रही है।
डेटॉल ने शादी को बनाया कैंपेन का हिस्सा
डेटॉल का ‘शादी का घर’ कैंपेन भी कैंटर के 2026 में सराहे गए कैंपेन में शामिल है। इसमें शादी जैसे परिचित भारतीय माहौल को स्टोरी का हिस्सा बनाया गया और प्रोडक्ट को उसी स्थिति में जरूरत के तौर पर दिखाया गया। ब्रांड ने सीधे प्रोडक्ट की खूबियां गिनाने के बजाय ऐसी स्थिति दिखाई जिससे ग्राहक पहले से जानते है। इससे प्रोडक्ट को स्टोरी के अंदर आसानी से जगह मिल जाती है और ब्रांड उस पूरे माहौल के साथ जुड़ जाता है।
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भारत में बढ़ रहा है विज्ञापन का मार्केट
इस पूरी मार्केटिंग को भारत के विज्ञापन मार्केट के बढ़ते आकार से भी समझा जा सकता है। डब्ल्यूपीपी मीडिया की ‘दिस ईयर नेक्स्ट ईयर 2026’ रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का विज्ञापन मार्केट 2026 में 9.7 प्रतिशत बढ़कर करीब 2,01,891 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। इसका मतलब है कि कंपनियां ग्राहकों तक पहुंचने के लिए विज्ञापन पर बड़े स्तर पर पैसा खर्च कर रही हैं। ऐसे में सिर्फ विज्ञापन दिखाना काफी नहीं है। ब्रांड के लिए यह भी जरूरी है कि ग्राहक उसे देखे, याद रखे और खरीदारी के समय उसे दूसरे ब्रांड्स से अलग पहचान सके। यही वजह है कि कंपनियां विज्ञापन में स्टोरी और इमोशन का इस्तेमाल कर रही हैं।
