भारत में डेटा सेंटर का बाजार बहुत तेजी से बढ़ रहा है। साल 2025 के शुरुआती छह महीनों में देश में डेटा सेंटर की कुल क्षमता 1,123 मेगावाट तक पहुंच गई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंटरनेट वाली सेवाओं की मांग बढ़ने की वजह से पिछले साल के मुकाबले इसमें 48 प्रतिशत की बड़ी बढ़ोतरी हुई है। बाजार में मांग इतनी ज्यादा है कि डेटा सेंटर में खाली जगह अब सिर्फ 4.3 प्रतिशत बची है जो पहले के मुकाबले बहुत कम है। अब बड़ी रियल एस्टेट कंपनियां भी इस सेक्टर में पैसा लगा रही हैं जिससे यह बाजार देश के डिजिटल विकास का एक मुख्य हिस्सा बन गया है।

 

भारत में रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REIT) अब ऑफिस बनाने के साथ-साथ डेटा सेंटर में भी पैसा लगा रहे हैं। पूरी दुनिया में यह बदलाव काफी बढ़ गया है और अब भारतीय कंपनियां भी अपने काम के तरीके को बदल रही हैं। डेटा सेंटर में निवेश को सुरक्षित माना जाता है,  इसमें कंपनियां लंबे समय के लिए जगह किराए पर लेती हैं। इससे पैसा लगाने वालों को लंबे समय तक एक जैसी कमाई मिलती रहती है और उन्हें सिर्फ ऑफिस के किराए पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। यह तरीका पूरी दुनिया में अपनाया जा रहा है और अब भारत में भी इसका असर दिख रहा है।

 

यह भी पढ़ें: बिजली बनाने वाली नहीं, पहुंचाने वाली कंपनियों पर क्यों दांव लगा रहे लोग?

मुंबई का बढ़ा महत्व

मुंबई अभी भी भारत में डेटा सेंटर का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है और देश की पूरे क्षमता में इसका 54 प्रतिशत हिस्सा है। यहां इंटरनेट की सुविधा और तारों का नेटवर्क बहुत अच्छा है,  कंपनियां अपना डेटा सेंटर यहीं बनाना सबसे ज्यादा पसंद करती हैं। उम्मीद है कि 2027 के आखिर तक भारत की कुल क्षमता बढ़कर 2,073 मेगावाट हो जाएगी। इस बड़े लक्ष्य को पूरा करने के लिए लगभग 1 करोड़ 7 लाख वर्ग फुट जमीन और 6 अरब 30 करोड़ अमेरिकी डॉलर के निवेश की जरूरत होगी।

 

डेटा सेंटर की तकनीक लगातार बदल रही है। भारत की अपनी क्लाउड कंपनियां अब बड़ी विदेशी कंपनियों को टक्कर दे रही हैं और लोगों को उनके हिसाब से सस्ती सुविधा दे रही हैं। एज कंप्यूटिंग का काम भी 2028 तक दोगुना यानी 160 से 180 मेगावाट तक पहुंचने की उम्मीद है जिससे इंटरनेट की स्पीड और बेहतर हो जाएगी। नियो क्लाउड कंपनियां अब छोटी कंपनियों और स्टार्टअप्स को जीपीयू की सुविधा कम कीमत पर दे रही हैं। इससे उन्हें बहुत महंगी मशीनें खरीदने की जरूरत नहीं पड़ रही है और उनका काम आसानी से हो रहा है।

 

यह भी पढ़ें: देश के सनराइज सेक्टर कौन से हैं, जिनसे है तगड़े मुनाफे की उम्मीद?

सरकारी नियमों से काम हुआ आसान

सरकार और अदालत के फैसलों ने इस सेक्टर के लिए रास्ते और आसान कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2025 में एक बड़ा फैसला लिया था जिससे 20,000 वर्ग मीटर से बड़े प्रोजेक्ट्स को पर्यावरण की मंजूरी अब जल्दी मिलने लगी है। राज्य स्तर की कमेटियां अब इन प्रोजेक्ट्स को तेजी से पास कर रही है जिससे डेटा सेंटर बनाने का काम जल्दी पूरा हो सकेगा। मांग बढ़ने और सरकारी सहयोग मिलने से इस सेक्टर में काम करने वाले लोगों के लिए यह एक बहुत ही अच्छा समय है।