सरकार ने मंगलवार को UPI के जरिये 2,000 रुपये से ज्यादा के लेनदेन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की प्रक्रिया टाल दी है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने बताया कि यह शुल्क दिवाली के बाद लागू होगा। संशोधित तारीख की घोषणा अभी नहीं हुई है। इससे पहले MDR लागू करने की समयसीमा 15 अक्टूबर थी। UPI और सर्विसेज स्टीयरिंग कमिटी ने फैसला किया है कि दशहरा, दीपावली और छठ जैसे त्योहारों की वजह से पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) दिवाली के तुरंत बाद लागू किया जाएगा।
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने यह एलान किया है। UPI और सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने कुछ पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का फैसला किया है। यह दिवाली के तुरंत बाद लागू होगा। कमेटी ने यह फैसला त्योहारी सीजन को ध्यान में रखकर लिया है।
NPCI के बयान के मुताबिक UPI और सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने त्योहारी सीजन को देखते हुए चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI लेनदेन पर MDR दिवाली के तुरंत बाद लागू करने का फैसला किया है। तारीख अलग से घोषित की जाएगी। इस साल दिवाली 8 नवंबर को पड़ रही है।
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पहले सरकार क्या योजना लाई थी?
2,000 रुपये से ज्यादा के P2M लेनदेन पर व्यापारियों से MDR लिया जाना था। पर्सन टू पर्सन (P2P) भुगतान मुफ्त रहने वाले हैं। व्यापारियों ने इस योजना को लेकर आपत्ति जताई थी। व्यापारियों का कहना था कि इससे उन पर बेवजह आर्थिक बोझ बढ़ेगा, जबकि वे इनकम टैक्स लेकर GST तक भर रहे हैं।
क्या यह फैसला पहले ही टलने वाला था?
इस बदलाव में देरी की संभावना पहले ही जताई जा रही थी। कई मीडिया रिपोर्ट में पहले दावा किया गया था कि सरकार रोलआउट को कुछ महीने टालने पर विचार कर रही है। यह जनवरी 2027 तक भी जा सकता था। 15 अक्टूबर की समयसीमा के भीतर ही यह फैसला होने वाला था। अक्टूबर से दिसंबर तक चलने वाले त्योहारी सीजन में आम तौर पर उपभोक्ताओं का खर्च काफी बढ़ जाता है।
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क्यों टला है यह फैसला?
त्योहारी मौसम में ट्रांजेक्शन ज्यादा होता है। व्यापारी खुद पर आर्थिक बोझ का हवाला देकर विरोध कर रहे थे। पेमेंट कंपनियों को नया सिस्टम तैयार करने का ज्यादा वक्त मिलने की उम्मीद थी। निवेशक इस फीस को पेमेंट कंपनियों की कमाई का संभावित जरिया मान रहे थे। इन कंपनियों को इसकी आमदनी का हिस्सा मिलने की उम्मीद थी।
MDR क्या होता है?
MDR वह फीस है, जो व्यापारी को डिजिटल पेमेंट लेने पर देना होता है। यह आम तौर पर लेनदेन की रकम का एक तय प्रतिशत होता है। बैंक इसे काटकर बाकी रकम व्यापारी के खाते में जमा करता है।
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NPCI क्या है?
NPCI देश में खुदरा भुगतान और सेटलमेंट सिस्टम चलाने वाली संस्था है। इसे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय बैंक संघ (IBA) ने बनाया है। यह सिस्टम दुनियाभर में सराहा जाता है।
