बॉलीवुड में किसी भी फिल्म का सफर सिनेमाघरों तक पहुंचने से बहुत पहले ही शुरू हो जाता है। जब कोई नई फिल्म बनाई जाती है तो उसके लिए सबसे पहला और सबसे जरूरी काम एक सही नाम चुनना होता है। फिल्म का नाम ही वह पहली चीज़ होती है जो दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचती है और फिल्म की पूरी पहचान बनाती है। कई बार मेकर्स जो नाम सबसे पहले सोचते हैं वह बाद में जाकर कई वजहों से बदल जाता है। 

 

कभी कानूनी पचड़े सामने आ जाते हैं कभी किसी बात पर बड़ा विवाद खड़ा हो जाता है तो कभी सेंसर बोर्ड या समाज के अलग-अलग वर्गों की तरफ से आपत्ति उठ जाती है। इन तमाम रुकावटों और प्लानिंग के चलते थिएटर्स में आने से पहले फिल्मों के नाम कई बार बदले जाते हैं और पर्दे के पीछे की यह कहानी बेहद दिलचस्प होती है। 

 

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10 फिल्में जिनके नाम बदले

रूही: राजकुमार राव और जाह्नवी कपूर की इस हॉरर-कॉमेडी फिल्म का नाम पहले 'रूही अफजा' था। इसके बाद इसे बदलकर 'रूही अफजाना' किया गया और आखिर में इसका नाम सिर्फ 'रूही' रखा गया। टाइटल में यह बदलाव ब्रैंड नेम, ट्रेडमार्क और दूसरे मौजूदा नामों से टकराव जैसी वजहों से जुड़ा हुआ था ताकि किसी भी कानूनी परेशानी से बचा जा सके।

 

लक्ष्मी: इस फिल्म का पहला नाम 'लक्ष्मी बॉम' था। बाद में इस नाम को लेकर आपत्तियां उठीं जिसके बाद फिल्म का नाम बदलकर लक्ष्मी कर दिया गया। यहां मुख्य वजह यह है कि कई बार टाइटल सिर्फ एक क्रिएटिव पसंद नहीं रहता बल्कि विवादों से बचने का एक फैसला बन जाता है।

 

पद्मावत: इस फिल्म का शुरुआती नाम 'पद्मावती' था। विवाद और सेंसर बोर्ड की सर्टिफिकेशन प्रक्रिया के दौरान इसके नाम में बदलाव किया गया। यह इस बात को दिखाता है कि किसी ऐतिहासिक किरदार पर बनी फिल्म में उसका नाम खुद कितना संवेदनशील मुद्दा बन सकता है।

 

लगे रहो मुन्ना भाई: इस फिल्म के टाइटल में सीधे तौर पर गांधी का नाम शामिल था और शुरुआती दौर में इसका नाम 'मुन्ना भाई Meets Mahatma Gandhi' था। बाद में इसे बदलकर 'लगे रहो मुन्ना भाई' कर दिया गया। इसके पीछे यह सवाल रहता है कि क्या मेकर्स ने इस तरह टाइटल से फिल्म की कहानी पहले ही रिलीज होने या रिवील होने से बचाया।

 

गब्बर इज बैक: इस फिल्म के लिए पहले गब्बर और फिर 'मेन गब्बर' जैसे टाइटल्स पर काम किया गया था और आखिर में इसे 'गब्बर इज बैक' नाम दिया गया। यहां यह समझाया जा सकता है कि टाइटल में किया गया एक छोटा बदलाव फिल्म की पूरी पोजीशनिंग को कैसे बदल देता है।

 

लवरात्रि:  इस फिल्म का नाम पहले 'लवरात्रि' था। रिलीज से पहले आपत्ति आई कि यह नवरात्रि से मिलता-जुलता है। विवाद से बचने के लिए मेकर्स ने स्पेलिंग बदलकर इसे 'लवयात्री' कर दिया।

 

बिल्लू बार्बर: इस फिल्म का शुरुआती नाम 'बिल्लू बार्बर' था। फिल्म के रिलीज के समय 'बार्बर' शब्द को लेकर आपत्ति जताई गई और इसे अपमानजनक बताया गया। इसके बाद बिना किसी विवाद के फिल्म का नाम छोटा करके सिर्फ बिल्लू कर दिया गया।

 

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चेन्नई एक्सप्रेस: इस फिल्म का शुरुआती नाम 'चेन्नई टू चाइना' था। बाद में मेकर्स को लगा कि यह नाम फिल्म की कहानी को सही से नहीं दिखाता है, इसे बदलकर 'चेन्नई एक्सप्रेस' कर दिया गया।

 

स्टूडेंट ऑफ द ईयर:  इस फिल्म की शुरुआती चर्चा के दौरान इसका नाम कुछ और सोचा जा रहा था। बाद में फिल्म की यूथफुल थीम के हिसाब से इसका नाम 'स्टूडेंट ऑफ द ईयर' तय किया गया ताकि यह आसानी से समझ आ जाए।

 

जब तक है जान: यश चोपड़ा की इस आखिरी फिल्म की शूटिंग के दौरान इसे अनटाइटल्ड फिल्म कहा जा रहा था और बीच में इसके नाम के रूप में 'ये कहां आ गए' पर भी चर्चा हुई थी। आखिर में गानों की लाइन के आधार पर इसे 'जब तक है जान' नाम दिया गया।