इजरायल अपने दुश्मनों को चुन-चुनकर मारने के लिए कुख्यात है। इजरायली खुफिया एजेंसियां वर्षों तक अपने दुश्मनों का पीछा करती हैं। हाईटेक तरीके अपना कर उन्हें मौत के घाट उतारती हैं। मिसाइल, ड्रोन, रिमोट कंट्रोल गन और ड्राइवरलेस कार से हजारों किमी दूर हत्याकांड को अंजाम दे चुकी हैं। इजरायल की खुफिया एजेंसियां मोसाद, शिन बेट और मिलिट्री इंटेलिजेंस ने दुनियाभर में टारगेट किलिंग को खूब अंजाम दिया। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद इजरायल ने सबसे अधिक टारगेट किलिंग का इस्तेमाल अपने दुश्मनों को मारने में किया।

 

इजरायली खुफिया एजेंसियां सिर्फ विदेशी नेटवर्क बनाने, खुफिया जानकारी जुटाने और जासूसी तक सीमित नहीं है। जो भी इजरायल के लिए खतरा बनता है, उसे रास्ते से हटाने का काम भी इजरायल की खुफिया एजेंसियां करती हैं। साल 1972 के म्यूनिख ओलंपिक में आतंकियों ने 11 इजरायली खिलाड़ियों की हत्या कर दी। इजरायल ने बदला लेने की ठानी और ऑपरेशन 'रैथ ऑफ गॉड' आरंभ किया। यह ऑपरेशन लगभग 20 वर्षों तक चला और दुनियाभर में 'ब्लैक सितंबर' और 'पीएलओ' से जुड़े आतंकियों को ढूंढ-ढूंढकर मारा। आज बात करेंगे इजरायल के उन चुनिंदा टारगेट किलिंग ऑपरेशन की, जिनसे दुश्मन हैरान हुई और दुश्मनों में खौफ की नई लहर पैदा हुई। 

 

 

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कार में बम लगाकर दुश्मन को उड़ाया

इजरायल ने ब्लैक सितंबर के सबसे अहम ऑपरेशनल चेहरे में से एक अली हसन सलामेह क वर्षों तक पीछा किया। 22 जनवरी 1979 को लेबनान की राजधानी बेरूत में उसकी कार में विस्फोटक लगाकर उड़ा दिया। हमले में सलामेह समेत कई अन्य लोगों की जान गई। अली हसन सलामेह म्यूनिख ओलंपिक हमले से जुड़ा था। उसे मारने में मोसाद ने वर्षों तक टारगेट को ट्रैक करने की रणनीति अपनाई और सटीक समय पर मौत के घाट उतारा।

जब ट्यूनीशिया में अबू जिहाद को मारा

इजरायल ने वर्षों तक पीछा कर 16 अप्रैल 1988 को फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (PLO) के टॉप 2 नेता अबू जिहाद को मार गिराया। जिहाद यासिर अराफात का करीबी था और ट्यूनीशिया के सिदी बू सईद इलाके में इजरायल से छिपकर रह रहा था। उस वक्त इजरायल और ट्यूनीशिया में दुश्मनी थी। वहां की सरकार ने अबू जिहाद को अपनी सुरक्षा तक दे रखी थी। 

 

 

संयुक्त राष्ट्र में ट्यूनीशिया सरकार की ओर से दी गई शिकायत के मुताबिक आधी रात को इजरायली कमांडो अबू जिहाद के घर में घुसे। सुरक्षा गार्ड और एक माली को गोली मारी। इसके बाद अबू जिहाद की हत्या की। वारदात को अंजाम देने के बाद सभी कमांडो किराये की गाड़ियों से भाग निकले। ऑपरेशन के दौरान इजरायली सैन्य विमान ट्यूनीशिया के आसमान में थे। इजरायल के सैन्य अधिकारी नहूम लेव ने बाद में खुलासा किया था कि उन्होंने ही अबू जिहाद को गोली मारी थी।

होटल के कमरे में हमास नेता को ढेर किया 

मोसाद ने 19 जनवरी 2010 को दुबई में एक हैरतअंगेज ऑपरेशन को अंजाम दिया। इसमें उसके एजेंट फर्जी पहचान और 12 ब्रिटिश पासपोर्ट से दुबई पहुंचे। अपने लक्ष्य पर कई दिनों तक निगाह रखी। 19 जनवरी को इजरायली एजेंटों की टीम ने हमास के सीनियर नेता महमूद अल-मबहूह को होटल में तकिये से दम घोंटकर मार डाला। होटल और एयरपोर्ट के सीसीटीवी फुटेज जांच में संदिग्ध लोगों को देखा गया। मगर तब तक सभी यूएई से जा चुके थे।

 

रिमोट कंट्रोल गन से परमाणु वैज्ञानिक को मारा

इजरायल ने साल 2010 से 2020 के बीच ईरान के तमाम परमाणु वैज्ञानिकों को टारगेट करके मारा। साइबर हमले से नतांज परमाणु प्लांट को भारी नुकसान पहुंचाया। मगर सबसे साहसिक और सनसनीखेज ऑपरेशन को साल 2020 में अंजाम दिया। ईरान के परमाणु कार्यक्रम के पितामह मोहसिन फखरीजादेह अपनी पत्नी सेदिगे कासेमी के साथ काले रंग की निशान टियना गाड़ी से अपने विला जा रहे थे। राजधानी तेहरान से 40 मील दूर अबसाद में उन्हें गोलियों से भून दिया गया। 27 नवंबर 2020 को शाम करीब 6 बजे घटना को अंजाम दिया गया।


 
इजरायली एजेंटों को फखरीजादेह के बारे में सटीक जानकारी थी। कब वह आते हैं और कब जाते हैं। कौन से रास्तों का इस्तेमाल करते हैं। उनकी सुरक्षा में कितने लोग तैनात रहते हैं। मोसाद ने फखरीजादेह की हत्या में रिमोट कंट्रोल सैटेलाइट से जुड़ी मशीन गन का इस्तेमाल किया। इसे निसान पिकअप पर लगे रोबोटिक उपकरण से जोड़ा गया था। मशीन गन एआई संचालित थी। मोसाद के एजेंटों ने करीब 1000 मील दूर तेल अवीव से हत्याकांड को अंजाम दिया। इन हथियारों को टुकड़ों में ईरान लाकर अंसेबल किया गया था। 20 लोगों की टीम ने करीब 8 महीने में पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया।

ऑपरेशन रैथ ऑफ गॉड 

1972 में जर्मनी के म्यूनिख ओलंपिक खेलों का आयोजन किया गया था। इसमें इजरायली टीमों ने भी हिस्सा लिया। 5 सितंबर 1972 को ब्लैक सितंबर के आतंकियों ने इजरायली खिलाड़ियों को बंधक बना लिया। बाद में 11 इजरायली खिलाड़ियों और कोच की हत्या कर दी। इस घटना ने पूरे इजरायल को झकझोर दिया। तत्कालीन इजरायली प्रधानमंत्री गोल्डा मेयर ने आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन 'रैथ ऑफ गॉड' को हरी झंडी दी। इजरायल ने हत्या करने वाले आतंकियों के अलावा साजिश रचने वाले चेहरों को भी निशाना बनाने की ठानी।

 

 

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साल 1972 से 1992 तक इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने 20 वर्षों तक आतंकियों को दुनियाभर में चुन-चुनकर मारा। 1973 में पेरिस में मोहम्मद बौदिया की हत्या की। कार में बम लगाकर मोसाद ने उसे उड़ाया। इसी साल 9 और 10 अप्रैल को बेरूत में 'ऑपरेशन स्प्रिंग ऑफ यूथ' को अंजाम दिया। एहुद बराक की अगुवाई में इजरायली कमांडो ने फिलिस्तीनी मुक्ति संगठन के टॉप थ्री लीडर मुहम्मद यूसुफ अल-नज्जर, कमल अदवान, और कमल नासिर को ढेर किया। इस ऑपरेशन की खास बात यह थी कि इजरायली कमांडो लड़की की वेशभूषा में बेरूत पहुंचे थे। बाद में ऑपरेशन की अगुवाई करने वाले एहुद बराक इजरायल के प्रधानमंत्री बने। 

जब विफल हुआ मोसाद का ऑपरेशन

मोसाद ने हमास के राजनीतिक ब्यूरो प्रमुख खालिद मशाल को मारने की ठानी। उसके एजेंटों ने जॉर्डन की राजधानी अम्मान में डेरा डाला। 25 सितंबर 1997 को इजरायली एजेंटों ने मशाल के कान के पास एक जहरीला पदार्थ छोड़ा। मशाल की तबीयत बिगड़ने पर जॉर्डन की सुरक्षा एजेंसियों ने इजरायली एजेंटों को दबोच लिया। जॉर्डन के दबाव पर इजरायल को जहर का एंटीडोट देना पड़ा। इससे मशाल की जान बच गई। इस तरह मोसाद का जॉर्डन में एक बड़ा ऑपरेशन फेल हो गया।