अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीय जहाजों पर ईरान हमला कर रहा है। यह भी दावा किया कि भारतीय जहाजों पर ड्रोन हमलों को नाकाम कर दिया गया है। चेतावनी भरे लहजे में ट्रंप ने कहा कि यह हरकत बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। उधर, भारत ने जहाजों पर अमेरिकी हमले की निंदा की। 48 घंटे के भीतर अमेरिका के चार्ज डी'अफेयर्स जेसन मीक्स को दूसरी बार तलब किया। भारत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसे हमले बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है।
हाल ही में ओमान तट के करीब तीन जहाजों पर मिसाइल से हमला किया गया। तीनों जहाजों पर हमले की जिम्मेदारी अमेरिकी नौसेना ने ली। बावजूद इसके ट्रंप ईरान पर हमले का आरोप लगाने में जुटे हैं। अमेरिकी हमलों में तीन भारतीयों की जान जा चुकी है। वहीं जहाजों पर सवार अन्य भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया है।
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भारतीय जहाजों पर हमला स्वीकार्य नहीं: ट्रंप
अपने ट्रुथ सोशल पर डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा, 'कल रात होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे भारतीय जहाजों पर उनके (ईरान) ड्रोन हमले को पूरी तरह नाकाम कर दिया गया। यह हरकत बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। उन्हें जल्द से जल्द अपनी हरकतों को सुधार लेनी चाहिए।'
अमेरिका ने कब-कब जहाज पर किया हमला?
आठ जून को एमटी मारिवेक्स पर हमला किया गया था। इसके अगले दिन यानी 9 जून को एमटी सेटेबेलो को निशाना बनाया गया। दोनों ही जहाजों पर पलाऊ का झंडा लगा था। अमेरिकी नौसेना ने इन जहाजों पर हमले की जिम्मेदारी ली। 11 जून को ओमान की खाड़ी के पास एमटी जलवीर पर अमेरिका ने अटैक किया और अपने एक्स अकाउंट पर यूएस सेंट्रल कमांड ने लिखा कि यह इस हफ्ते निष्क्रिय होने वाला तीसरा जहाज है। अमेरिका का आरोप है कि इन जहाजों ने ईरानी तेल ले जाने का प्रयास करेक नाकेबंदी का उल्लंघन किया। एमटी जलवीर पर गिनी-बिसाऊ का झंडा लगा था।
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नौ जहाजों पर हमला कर चुका अमेरिका
अमेरिकी नौसेना ने 13 अप्रैल से ईरान की नाकेबंदी कर रखी है। उसका कहना है कि नाकेबंदी का उल्लघंन करने वाले नौ जहाजों को अब तक निष्क्रिय किया गया है। 135 जहाजों को रास्ता बदलने पर मजबूर किया गया। वहीं मानवीय सहायता करने वाले 42 जहाजों को गुजरने की अनुमति दी गई।
'ईमानदारी से कोई डील नहीं हो सकती'
दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते की जानकारी लीक करने पर ईरान की आलोचना की। उन्होंने लिखा, 'ईरान ने फेक न्यूज को जो शर्तें बताई हैं, उनका लिखित में तय हुई शर्तों से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने जो कुछ भी कहा है, जिसमें डील के बारे में उनका कमजोर और शर्मनाक बयान भी शामिल है- उसका सच्चाई से कोई वास्ता नहीं है। इनके साथ डील करना बहुत ही बेईमानी भरा काम है। इनके साथ ईमानदारी से कोई डील नहीं हो सकती। कमाल है!'
