अमेरिका और ईरान के बीच जंग अभी तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास केंद्रित रही। एक तरफ जहां अमेरिका ने पूरे ईरान को निशाना बनाया तो वहीं तेहरान ने जवाब में पूरे खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया। सबसे अधिक असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में देखने को मिला। लेकिन अब ईरान ने अमेरिका को एक नई धमकी दी है। इसमें जंग को हिंद महासागर तक ले जाने की बात कही।
ईरान की अर्ध-सरकारी न्यूज एजेंसी फार्स ने मेजर-जनरल याह्या रहीम सफावी का एक वीडियो साझा किया। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका और इजरायल दोबारा हमला करते हैं तो युद्ध को ईरान हिंद महासागर तक फैला सकता है। उन्होंने कहा, 'यह संघर्ष फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से लाल सागर तक फैल चुका है। इस लिहाज से यह संभव है कि और अधिक युद्ध की प्रतिक्रिया में यह मोर्चा और भी आगे बढ़कर हिंद महासागर और शायद उससे भी आगे तक पहुंच जाए।'
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हूती विद्रोहियों की तारीफ की
याह्या रहीम सफावी ने यमन के हूती विद्रोहियों की जमकर तारीफ भी की। उन्होंने कहा, '100 से अधिक वर्षों से यमन के लोगों ने किसी भी आक्रमणकारी शक्ति का डटकर सामना किया है, जिसने भी उनकी क्षेत्रीय अखंडता पर अतिक्रमण करने का प्रयास किया।' रहीम सफावी ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के सलाहकार है। इस वजह से उनका बयान बेहद मायने रखता है।
अमेरिका के साथ बढ़ रहा तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव नए सिरे से बढ़ने लगा है। कई मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिका हमले की तैयारी में है। अमेरिका के संभावित हमले के जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों को निशाना बनाने की धमकी दी।
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हिंद महासागर में तनाव का क्या असर होगा?
लाल सागर को हिंद महासागर से जोड़ने वाले बाब अल-मंडेब स्ट्रेट पर हूती विद्रोहियों का कब्जा है। वहीं फारस की खाड़ी को अरब सागर और आगे हिंद महासागर पर जोड़ने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान ने नाकेबंदी लगा रखी है। हिंद महासागर से भारत के व्यापक हित जुड़े हैं। यहां किसी भी उथल-पुथल का सीधा असर भारत पर पड़ेगा। अफ्रीका, यूरोप और एशिया के बीच अहम व्यापारिक मार्ग भी हिंद महासागर से गुजरता है। भारत के वाणिज्यिक और ऊर्जा इससे जुड़े हैं।
