यमन के हूती विद्रोहियों ने रविवार को सऊदी अरब के दक्षिणी इलाके में स्थित एक मिलिट्री बेस पर बैलेस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। हूती विद्रोहियों के प्रवक्ता याह्या सरी ने बताया कि दक्षिणी शरूरह बेस पर किए गए हमले में हथियारों के डिपो और कमांड एंड कंट्रोल सेंट्रल को निशाना बनाया गया। इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमले की दोबारा निंदा की। 

 

रविवार को शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर भी बात की। पाकिस्तानी प्रधानंत्री ने सऊदी अरब के साथ एकजुटता प्रकट की और रियाद को अपना पूर्ण समर्थन दोहराया। हालांकि मक्का रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तान ने अभी तक सैन्य दखल से इनकार किया है। तुर्की भी समझौते का हिस्सा है, लेकिन उसने भी अभी तक सैन्य समर्थन देने की बात नहीं की। इसके बाद से ही मक्का रक्षा समझौते पर सवाल उठने लगे हैं।

 

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक एक्स पोस्ट में बताया, 'प्रधानमंत्री मोहम्मद शहबाज शरीफ ने आज दोपहर सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से टेलीफोन पर बातचीत की। बातचीत गर्मजोशी भरी और बेहद दोस्ताना रही। पीएम शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब के आम नागरिकों और आर्थिक बुनियादी ढांचे पर हूतियों के हालिया हमलों की कड़ी निंदा को दोहराया।'

 

शहबाज शरीफ ने हूती विद्रोहियों के हमलों को क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा हैं और कहा कि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति में बाधा आ सकती है। आगे कहा कि वह फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और उप प्रधानमंत्री मोहम्मद इशाक डार के साथ मिलकर तनाव कम करने और क्षेत्र में शांति लाने का प्रयास जारी रखेंगे।

 

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यमन के हूती विद्रोहियों ने हाल ही में सबसे भीषण जंग शुरू की है। लाल सागर से सटे यमन के पूरे तट पर उनका कब्जा हो चुका है। बाब अल-मंडेब का नियंत्रण भी हूती विद्रोहियों के हाथों में है। उधर, ईरान समर्थित मिलिशिया ने इराक से सऊदी अरब पर ड्रोन हमला किया। नतीजा यह हुआ कि सऊदी अरब की 1200 किमी लंबी तेल पाइपलाइन कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई। इसके बाद रियाद को अस्थायी तौर पर पाइपलाइन को बंद करना पड़ा। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के बाद सऊदी अरब बड़ी मात्रा का तेल का निर्यात इसी पाइपलाइन के माध्यम से करता था।