अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण केशम द्वीप पर गुपचुप तरीके से सैन्य हमले किए हैं। इस हमले के बाद स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में स्थित इस द्वीप पर लगातार कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं। इसकी पुष्टि ईरानी सरकारी मीडिया एजेंसी IRNA ने भी की है।
अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि ये हमले हाल के हफ्तों में चलाए गए सीमित सैन्य अभियानों का हिस्सा थे। ऐसा कहा जा रहा है कि अमेरिका जानबूझकर इन हमलों को सीमित रूप से कर रहा है कि ईरान से बड़े पैमाने पर युद्ध की शुरुआत का संकेत न जाए। अमेरिका में अभी फिलहाल मिडटर्म चुनाव होने वाले है। पहले से ऐसी स्थिति बनी हुई है कि दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर है।
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अमेरिका और इजरायल के बीच मतभेद
ऐसा कहा जा रहा है कि इस हमले के बाद अमेरिका और इजरायल के बीच रणनीतिक मतभेद सामने आए हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर दबाव डाला है कि वह मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान पर नए सिरे से बड़े हमले करें। वहीं इसके उलट ट्रंप चाहते हैं कि फिलहाल कूटनीतिक बातचीत और समझौते को एक मौका दिया जाए। मीडिया से बातचीत करते हुए ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह चुनावों के बाद हमले की योजना बना रहे हैं? उन्होंने साफ तौर पर इस तरह किसी भी योजना से इनकार कर दिया।
समझौते पर अमेरिका का रुख
तनाव और हमलों के बीच अमेरिका और ईरान के बीत बातचीत का दौर जारी है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने उम्मीद जताई है कि दोनों देश किसी समझौते पर पहुंच सकते हैं। इससे नए हमलों की नौबत न आए। जेडी वेंस ने ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रजाई को लेटर भेजा था। ट्रंप ने बताया कि इस लेटर में ईरान को हेल्थ सामग्री और मानवीय सहायता देने की बात कही गई है। जेडी वांस ने कहा कि ईरान के साथ कई अच्छी दौर की बातचीत हुई है। दोनों देश बातचीत के जरिए समाधान निकलने को लेकर आशावादी हैं।
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फरवरी से चल रहे इस युद्ध के बीच केशम द्वीप पर हुए हमलों ने स्थिति को और तनावपूर्ण बना दिया है। एक तरफ जहां इजराइल अमेरिका पर सैन्य कार्रवाई का दबाव बना रहा है। वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी प्रशासन मिडटर्म चुनावों के बाद कूटनीतिक रास्ते से युद्ध को रोकने की आखिरी कोशिशों में जुटा है।
