अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, हिंद महासागर के 'चागोस' आइलैंड समूह को खरीदना चाहते हैं। अमेरिका ने मॉरिशस के इस हिस्से पर अपना दावा ठोका है। पहले इस द्वीप पर बिट्रेन का नियंत्रण था, अब अमेरिका इस पर पूरा नियंत्रण चाहता है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर चागोस द्वीपों का मालिकाना हक मॉरीशस को सौंपने जा रहे हैं, लेकिन अमेरिका इसे रोकने की कोशिश कर रहा है।
चागोस, अमेरिका के लिए रणनीतिक तौर पर बेहद जरूरी है। इस द्वीप समूह में डिएगो गार्सिया है, जो बेहद अहम सैन्य अड्डों में से एक है। यहां अमेरिकी नौसेना का बेस है, जो हिंद महासागर में अमेरिका की मौजूदगी बनाए रखता है। यहां से ईरान तक लंबी दूरी के बमवर्षक विमान आसानी से हमला कर सकते हैं।
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मॉरिशस की दुविधा क्या है?
मॉरीशस चीन और ईरान दोनों के साथ अच्छे संबंध रखता है। अमेरिका को डर है कि अगर ये द्वीप मॉरीशस के पास चले गए तो चीन का नौसैनिक प्रभाव बढ़ सकता है और वहां जासूसी गतिविधियां बढ़ सकती हैं। अमेरिका ब्रिटेन को इस सौदे से रोकने की कोशिश कर रहा है।
कीर स्टार्मर को क्यों कोस रहे हैं ट्रंप?
हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप पहले कीर स्टार्मर के प्लान का समर्थन करते थे, लेकिन बाद में उन्होंने इसे रोक दिया। उन्होंने कीर स्टार्मर पर आरोप लगाया कि वह कमजोरी दिखा रहे हैं और इस अहम द्वीप पर नियंत्रण खो रहे हैं। ट्रंप ने यहां से ईरान पर हमले की अनुमति मांगी थी, जिसे ब्रिटेन ने मना कर दिया था।
अमेरिका क्या सीक्रेट प्लान क्या है?
अमेरिका का प्लान ये है कि पहले ब्रिटेन अपना सौदा पूरा करे, द्वीपों का मालिकाना हक मॉरीशस को सौंपे, फिर बेस के लिए 99 साल का लीज अमेरिका ले लेगा। इसके बाद अमेरिका खुद मॉरीशस से सीधे बात करके द्वीप खरीदने या बेहतर सौदा करने की कोशिश करेगा।
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मॉरिशस का रुख क्या है?
मॉरीशस सरकार ने कहा है कि उसे अमेरिका की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं मिला है। उसका रुख साफ है कि चागोस द्वीपों पर उसका मालिकाना हक अटल है और इस पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
ब्रिटेन ने क्यों जमाया कंट्रोल?
चागोस द्वीप पहले मॉरीशस का हिस्सा थे। 1965 में ब्रिटेन ने इन्हें अलग कर लिया था। मॉरीशस 1968 में आजाद हुआ और तब से यह देश, अपना द्वीप वापस मांग रहा है। अमेरिका और ब्रिटेन दोनों इस बात पर सहमत हैं कि डिएगो गार्सिया का सैन्य बेस क्षेत्र की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। फिलहाल दोनों देश इस मुद्दे पर लगातार बातचीत कर रहे हैं।
आइलैंड की खासियत क्या है?
चागोस द्वीप समूह में डिएगो गार्सिया नाम का एक छोटा द्वीप है। यहां अमेरिका-ब्रिटेन का संयुक्त सैन्य बेस है। यह बेस हिंद महासागर में अमेरिकी नौसेना की मजबूत मौजूदगी बनाए रखता है। इसकी लोकेशन इतनी रणनीतिक है कि यहां से ईरान, मध्य पूर्व और पूरे हिंद महासागर पर नजर रखी जा सकती है। जरूरत पड़ने पर यहां से लंबी दूरी के बमवर्षक विमान आसानी से हमले कर सकते हैं।
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अमेरिका को डर क्यों लग रहा है?
मॉरीशस चीन और ईरान दोनों के साथ अच्छे रिश्ते रखता है। अगर द्वीप मॉरीशस के पास चले गए तो चीन वहां अपना प्रभाव बढ़ा सकता है। बेस पर जासूसी का खतरा हो सकता है। अमेरिका का हिंद महासागर में चीन को रोकने का प्लान कमजोर पड़ सकता है।
क्यों ब्रिटेन वापस सौंप रहा नियंत्रण?
चागोस द्वीप पहले मॉरीशस का हिस्सा थे। 1965 में ब्रिटेन ने इन्हें अलग कर लिया और 1966 में अमेरिका को बेस बनाने के लिए दिया। 1968 में मॉरीशस आजाद हुआ तो उसने द्वीप वापस मांगे। 2024-25 में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने द्वीप मॉरीशस को सौंपने का फैसला किया। लेकिन अमेरिका को यह पसंद नहीं आया। ट्रंप ने इसे कमजोरी बताया।
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क्यों अमेरिका के लिए जरूरी है यह द्वीप?
चागोस द्वीप से हिंद महासागर पर अमेरिका नियंत्रण रख सकता है। अभी हिंद महासागर का बेताज बादशाह चीन खुद को मानता है। डिएगो गार्सिया अमेरिका के लिए बहुत कीमती सैन्य अड्डा है, जिसे वह किसी भी कीमत पर सुरक्षित रखना चाहता है। अगर यह द्वीप, चीन के नियंत्रण में गया तो अमेरिका के लिए यह बड़ा रणनीतिक झटका होगा।
