दुनियाभर में उठक-पटक का माहौल है। यूरोप के कई देशों में हिंसा, दंगा, प्रदर्शन और अराजकता का माहौल है। मध्य-पूर्व जंग की चपेट में है। ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं। यूक्रेन और रूस के बीच ड्रोन और मिसाइलों का युद्ध जारी है। सूडान में गृह युद्ध की आग अभी ठंडी नहीं हुई है। इरिट्रिया और इथियोपियो में तनाव बरकरार है। सऊदी अरब खुद को बचाने की जद्दोजहद में जुटा है। इस बीच जापान, यूनाइटेड किंगडम (UK) और अमेरिका के कदमों ने दुनियाभर को हैरत में डाल दिया है। 

 

यूके और जापान की सरकार ने अपने नागरिकों को जरूरी सामान घर में इकट्ठा रखने की अपील की है। अमेरिकी एयरबेस अलर्ट पर हैं। इन एयरबेसों को 90 दिनों तक 'ऑफ-ग्रिड' काम करने का आदेश दिया गया है। अमेरिका की सेना बड़े पैमाने पर कब्र खोदने का अभ्यास कर रही है।

 

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बड़े पैमाने पर कब्र खोदने का अभ्यास क्यों कर रही यूएस आर्मी? 

1950-1953 के बीच कोरिया युद्ध के बाद पहली बार अमेरिका की सेना बड़े पैमाने पर युद्ध के मैदान में कब्रों को खोदने का अभ्यास कर रही है। दुनिया इस बात से हैरान है कि अमेरिका की सेना यह अभ्यास क्यों कर रही है, कौन सी आफत आने वाली है। 

 

अमेरिका सेना ने नॉर्थ कैरोलिना में टेस्ट-ऑफ-कॉन्सेप्ट अभ्यास किया। बड़े पैमाने पर कब्रों को खोदा। एक भूखंड में पांच गढ्ढे खोदे गए। हर गड्ढे में 100 शवों को दफनाने की व्यवस्था की गई। इसमें सैनिकों ने सीखा कि कैसे इंसानी शव को नुकसान पहुंचाने बिना दोबारा कब्र को बंद किया जाए। इसमें मिलिट्री चैपलेन (पादरी) और धार्मिक मामलों के स्पेशलिस्ट को बड़े पैमाने पर होने वाली मौतों को संभालने की ट्रेनिंग भी दी गई। अमेरिकी सेना का कहना है कि इस अभ्यास से हमें यह समझने का मौका मिला कि हम एक हाई-इंटेंसिटी लड़ाई में अपने शहीदों का सम्मान, आदर और सिस्टमैटिक तरीके से कैसे दफनाते हैं।

90 दिनों तक ऑफ ग्रिड काम करेंगे मिलिट्री बेस

अमेरिका के युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने अमेरिकी मिलिट्री बेसों को 90 दिनों तक ऑफ-ग्रिड काम करने के लिए तैयार रहने का आदेश दिया। इसके तहत दुनियाभर में अमेरिकी बेस बिना किसी बाहरी बिजली और आपूर्ति के अपना कामकाज करेंगे। माना जा रहा है कि अमेरिका की इस तैयारी का मकसद यह है कि अगर युद्ध, साइबर अटैक या किसी प्राकृतिक आपदा में बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचता है तो अमेरिका के मिलिट्री बेस बिना किसी रुकावट के अपना कामकाज कर सके। 

 

उधर, अमेरिका का रक्षा विभाग न्यूक्लियर माइक्रोरिएक्टर बनाने में जुटा है। अगर यह सफल होता है तो अमेरिकी बेस खुद अपनी बिजली बनाने में सक्षम होंगे। अमेरिका की इस तैयारी से आशंका जताई जाने लगी है कि आने वाले संघर्ष में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है। 

यूके में बी रेडी कैंपने 

यूनाइटेड किंगडम ने पिछले हफ्ते 'बी रेडी' कैंपने की शुरुआत की। इसके तहत अपने नागरिकों को तीन दिन का जरूरी सामान स्टॉक में रखने की सलाह दी। इसमें खाना-पानी, टॉर्च, टॉयलेट पेपर, दवाइयां और नकदी रखने जैसी अपील शामिल है।

जापान में भी जनता को स्टॉक रखने की सलाह

यूके के बाद जापान ने अपने नागरिकों से तीन दिन से एक हफ्ते तक जरूरी सामान का स्टॉक रखने की अपील की है। हालांकि जापान अपनी सलाह को आपदा से जोड़कर देख रहा है, लेकिन लोगों के मन में तरह तरह की आशंकाएं जन्म लेने लगी हैं। जापान के डिजास्टर मैनेजमेंट मिनिस्टर गोशी होसोनो ने कहा कि कम से कम तीन दिन और बेहतर होगा कि एक सप्ताह का खाना, टॉयलेट, पानी और ऐसी दूसरी चीजें तैयार होनी चाहिए।'

 

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अमेरिका में सर्वाइवल एक्सपर्ट कर रहे आगाह

अमेरिका के सर्वाइवल एक्सपर्ट मायकेल हॉक ने भी न्यूजनेशन से बातचीत में चेतावनी दी कि अमेरिकी नागरिकों को भी उन खतरों पर ध्यान देना होगा। जिनकी तैयारी मिलिट्री प्लानर करने में जुटे हैं। उनका मानना है कि बुनियादी ढांचे पर हमले का असर आम जनता पर भी पड़ सकता है। उन्होंने लोगों को आपातकाल में खाना पकाने के तरीके, पीने का पानी, साफ-सफाई की व्यवस्था करने और जरूरी सामान का स्टॉक रखने की सलाह दी।