यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमला किया है। इस हमले के बाद जंग के पूरे क्षेत्र में फैलने का खतरा बढ़ गया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के अलावा लाल सागर में एक नया मोर्चा खुल गया। उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि सऊदी अरब के तेल टैंकर पर हमला करने पर ईरान को कड़ी सजा का सामना करना पड़ेगा। उधर, हूती विद्रोहियों का कहना है कि सऊदी तेल टैंकरों ने नाकेबंदी का उल्लंघन किया है। इसके बाद ही उन पर हमला किया गया है।
हूती विद्रोहियों ने बताया कि उन्होंने एन्सेलिया और लैलिया नाम के दो सऊदी तेल टैंकरों को निशाना बनाया है। इन जहाजों ने उनकी नौसैनिक नाकाबंदी का उल्लंघन किया है। सऊदी अरब की सरकारी समाचार एजेंसी एसपीए ने जनरल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के एक सूत्र के हवाले से खबर दी कि लाल सागर में एन्सेलिया जहाज को निशाना बनाया गया। हमले के बाद जहाज के अगले हिस्से में आग लग गई। चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित हैं।
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हूती ने क्यों की सऊदी अरब की नाकेबंदी?
13 जुलाई को हूती प्रतिनिधिमंडल तेहरान से वापस लौट रहा था। उसी वक्त यमन की राजधानी सना में स्थित अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर सऊदी अरब समर्थित बलों ने हमला कर दिया था। बाद में हूती प्रतिनिधिमंडल के जहाज को दूसरे एयरपोर्ट पर उतरना पड़ा था। इसके तुरंत बाद हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर बैलेस्टिक मिसाइल से हमला किया था। वहीं सोमवार को सऊदी अरब के खिलाफ नाकेबंदी की घोषणा की थी।
ट्रंप ने क्या धमकी दी?
डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी ताजा धमकी में कहा कि अगर हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के जहाजों पर हमला किया तो इसकी सजा ईरान को भुगतनी पड़ेगी। अपने ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने लिखा, 'एक साल पहले अमेरिका ने व्यापार और वाणिज्य में बाधा डालने पर हूतियों पर गोलीबारी करके उन पर बहुत जोरदार हमला किया था। तब से ईरान के साथ हमारे संघर्ष के दौरान उन्होंने बहुत ही जिम्मेदारी से काम किया है।'
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ट्रंप ने आगे कहा, 'दुर्भाग्य से अब वे फिर से सक्रिय हो गए हैं और कल रात उन्होंने सऊदी अरब के दो जहाजों पर गोलीबारी की। कृपया इस सच्चाई को इस बात का प्रतीक समझें कि अगर वे ऐसा दोबारा करते हैं तो अमेरिका ईरान को जिम्मेदार ठहराएगा, क्योंकि हूती ईरान के प्रॉक्सी हैं। ईरान और हूतियों दोनों को कड़ी सैन्य सजा दी जाएगी।'
जंग आगे बढ़ने का खतरा
अगर सऊदी जहाजों पर हूतियों के हमले नहीं रुकते हैं तो लाल सागर भी जंग के मैदान में तब्दील हो सकता है। इसका असर यह होगा कि लाल सागर से भी तेल की आपूर्ति बाधिक हो सकती है। इसका खामियाजा पाकिस्तान जैसे देशों को उठाना पड़ सकता है, क्योंकि उसका अधिकांश तेल इसी मार्ग से आता है। इसके अलावा सऊदी अरब पर बढ़ते हमलों से अमेरिका पर सैन्य कार्रवाई का दबाव बढ़ सकता है।
